उद्योगपति श्रीकांत बोल्ला के प्रेरणादायक जीवन पर बनी बायोपिक फिल्म ‘श्रीकांत’ (Srikanth) ने भारतीय सिनेमा क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (72nd National Film Awards) में इस फिल्म को ‘सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म’ (Best Hindi Feature Film) का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया है। इस बड़ी सफलता और ऑस्कर की आधिकारिक प्रविष्टि (India’s Official Entry to Oscars) से फिल्म के चूक जाने पर टी-सीरीज (T-Series) के प्रमुख और फिल्म के निर्माता भूषण कुमार (Bhushan Kumar) तथा सह-निर्माता निधि परमार हिरनंदानी (Nidhi Parmar Hiranandani) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
फिल्म जगत में यह चर्चा जोरों पर थी कि ऑस्कर की रेस में जगह न मिलने के बाद टीम का रुख क्या रहेगा, लेकिन निर्माताओं ने स्पष्ट कर दिया कि देश का सर्वोच्च सिनेमाई सम्मान यानी नेशनल अवॉर्ड (National Award) उनके लिए सबसे बड़ा गौरव है।
नेशनल अवॉर्ड जीत पर भूषण कुमार की प्रतिक्रिया
फिल्म ‘श्रीकांत’ को मिले राष्ट्रीय सम्मान पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए टी-सीरीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक भूषण कुमार ने कहा:
भूषण कुमार का मानना है कि जब किसी फिल्म को अपने ही देश की मिट्टी और दर्शकों से इतना बड़ा सम्मान मिलता है, तो वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर की किसी भी रेस या नामांकन से कहीं अधिक मायने रखता है।
ऑस्कर की रेस और ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’ का महत्व
फिल्म रिलीज होने के बाद से ही फिल्म समीक्षकों और दर्शकों का मानना था कि ‘श्रीकांत’ को भारत की ओर से ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा जा सकता है। हालांकि, जब फिल्म को ऑस्कर एंट्री के लिए नहीं चुना गया, तो टीम को थोड़ी निराशा जरूर हुई थी।
सह-निर्माता निधि परमार हिरनंदानी ने एक हालिया साक्षात्कार में इस पर खुलकर बात करते हुए कहा कि जब फिल्म ऑस्कर की रेस से बाहर हुई, तो उन्होंने किसी भी बड़े अवॉर्ड की उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा हुई, तो यह पूरी टीम के लिए एक सुखद और भावुक कर देने वाला क्षण था।
निर्माताओं का कहना है कि:
- देश का सर्वोच्च सम्मान: भारत में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से बड़ा कोई सिनेमाई सम्मान नहीं है।
- ईमानदार कहानी की जीत: व्यावसायिक दबावों से परे जाकर बनाई गई फिल्में जब ऐसा मुकाम हासिल करती हैं, तो यह सिनेमा की ताकत को दर्शाता है।
- दर्शकों का जुड़ाव: ऑस्कर की दावेदारी से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि फिल्म ने देश भर के दर्शकों के दिलों को छुआ है।
राजकुमार राव के प्रदर्शन और ‘बेस्ट एक्टर’ की चर्चा
फिल्म ‘श्रीकांत’ में दृष्टिबाधित उद्योगपति श्रीकांत बोल्ला का किरदार अभिनेता राजकुमार राव (Rajkummar Rao) ने निभाया है। उनके अभिनय की आलोचकों और दर्शकों दोनों ने जमकर तारीफ की थी। हालांकि, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (Best Actor) का पुरस्कार संयुक्त रूप से कार्तिक आर्यन (Chandu Champion) और मम्मुटी (Bramayugam) को मिला।
राजकुमार राव को व्यक्तिगत तौर पर नेशनल अवॉर्ड न मिलने पर निधि परमार ने कहा:
- राजकुमार का बेमिसाल अभिनय: “राजकुमार राव इतने शानदार अभिनेता हैं कि उन्हें किसी भी तरह से नजरअंदाज (Snub) नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस फिल्म में अपने करियर का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दिया है।”
- जूरी के फैसले का सम्मान: “जूरी ने सोच-समझकर फैसला लिया होगा। कार्तिक आर्यन ने ‘चंदू चैंपियन’ में और मम्मुटी सर ने ‘भ्रमयुगम’ में असाधारण काम किया है, और वे इस सम्मान के पूरी तरह हकदार हैं।”
- टीम की जीत: फिल्म को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म’ का पुरस्कार सिर्फ निर्देशकों या निर्माताओं का नहीं, बल्कि राजकुमार राव और पूरी स्टारकास्ट की मेहनत का परिणाम है।
‘श्रीकांत’ की सफर और उसकी चुनौतियां
तुषार हिरनंदानी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘श्रीकांत’ केवल एक बायोपिक नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और सफलता की एक अद्भुत मिसाल है।
| पहलू | विवरण |
| मुख्य विषय | दृष्टिबाधित उद्योगपति श्रीकांत बोल्ला की वास्तविक जीवन कहानी। |
| स्टार कास्ट | राजकुमार राव, ज्योतिका, अलाया एफ, शरद केलकर। |
| निर्देशक | तुषार हिरनंदानी। |
| निर्माता | भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, निधि परमार हिरनंदानी (T-Series & Chalk and Cheese Films)। |
| प्रमुख सम्मान | 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म’। |
फिल्म में श्रीकांत की शिक्षिका ‘देविका मैम’ का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री ज्योतिका (Jyotika) ने भी इस जीत को एक भावुक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सीमित बजट और कई कठिनाइयों के बावजूद जब कोई फिल्म अपनी नीयत और कंटेंट के दम पर जीतती है, तो वह पूरी टीम के लिए यादगार बन जाती है।
निष्कर्ष
ऑस्कर जैसी वैश्विक रेस में शामिल न हो पाने के बावजूद, ‘श्रीकांत’ की टीम का मानना है कि भारतीय दर्शकों का प्यार और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का तमगा उनके लिए सबसे बड़ा मेडल है। भूषण कुमार और उनकी टीम का यह रुख दिखाता है कि अपनी जमीन और अपने देश के सम्मान की जगह कोई भी विदेशी पुरस्कार नहीं ले सकता।
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