बॉलीवुड अभिनेत्री और मंडी से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर अपने 10 साल पुराने पार्टी और डांस वीडियो वायरल किए जाने और राजनीतिक विचारधारा बदलने को लेकर हो रही ट्रोलिंग पर कंगना ने करारा जवाब दिया है।
एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कंगना ने आलोचकों को आड़े हाथों लिया और कहा कि जिस तरह समाज अन्य लोगों के जीवन शैली और विचारों में बदलाव को स्वीकार करता है, ठीक उसी तरह उन्हें भी अपनी आस्था और विचारधारा चुनने का पूरा अधिकार है।
पुराने वीडियो वायरल करने वालों पर साधा निशाना
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कंगना रनौत के 2018 के कान फिल्म महोत्सव (Cannes After-Party) के डांस वीडियो और उनके पुराने लाइफस्टाइल से जुड़े क्लिप्स तेजी से शेयर किए जा रहे थे। आलोचकों का तर्क था कि एक समय लिबरल और मॉडर्न लाइफस्टाइल जीने वाली कंगना अब ‘संघी’ और ‘कट्टर हिंदू’ बनने की बात कैसे कर सकती हैं।
इस पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कंगना ने कहा:
“जब बात हिंदू बेटियों की आती है, तो समाज के तथाकथित ठेकेदार हमारी 10 साल पुरानी बातें निकालकर लाते हैं— तुम तो पार्टी करती थी, तुम तो ये करती थी। ठीक है, मैं सब कुछ करती थी! लेकिन आज मुझे भी कन्वर्ट होना है और एक परिभाषित, अनुशासित और जागृत हिंदू बनना है। मेरे लिए वो रास्ता क्यों बंद है?”
‘हाँ, मैं मॉडरेट हिंदू थी, अब संघी बनना चाहती हूँ’
कंगना ने वीडियो में स्वीकार किया कि अतीत में वह एक ‘उदारवादी’ (Moderate) विचार रखने वाली व्यक्ति थीं। लेकिन समय के साथ उनके विचारों और सोच में परिपक्वता आई है। उन्होंने अपने आलोचकों से सीधा सवाल किया कि क्या किसी व्यक्ति को वैचारिक रूप से बदलने का अधिकार नहीं है?
- वैचारिक बदलाव का अधिकार: कंगना ने कहा कि यदि लोग किसी विशेष विचारधारा या धर्म की ओर आकर्षित होकर बदलाव अपना सकते हैं, तो एक हिंदू महिला को बीजेपी और आरएसएस (RSS) की विचारधारा अपनाने से क्यों रोका जाता है?
- तंज का जवाब: उन्होंने कहा, “लोग मुझसे तंज कसकर पूछते हैं कि तुम कब से ‘संघी’ बन गई? तो मेरा साफ कहना है कि हाँ, मुझे संघी बनना है! मुझे बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा अपनानी है और एक जागृत हिंदू बनना है।”
- आत्मरक्षा से इनकार: कंगना ने स्पष्ट किया कि वह अपने अतीत की सफाई देने या अपने पिछले फैसलों का बचाव करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
‘दोगलेपन की राजनीति नहीं चलेगी’
कंगना ने फिल्म उद्योग की कार्यप्रणाली और समाज के दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई अन्य अभिनेत्री किसी खास सोच या परिवार से जुड़कर अपनी विचारधारा बदलती है, तो उसे ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ और ‘संवैधानिक अधिकार’ का नाम दिया जाता है। लेकिन जब कोई हिंदू महिला राष्ट्रवादी या सनातनी विचारधारा अपनाती है, तो उस पर पुरानी बातों को लेकर सवाल खड़े किए जाते हैं।
कंगना ने कहा:
- संवैधानिक स्वतंत्रता: देश का संविधान हर नागरिक को अपनी इच्छा अनुसार विचारधारा और जीवन मार्ग चुनने की पूर्ण आजादी देता है।
- अतीत का मूल्यांकन अनुचित: किसी व्यक्ति के 10-15 साल पुराने जीवन के आधार पर उसकी वर्तमान धार्मिक और राजनीतिक निष्ठा का परीक्षण करना गलत है।
- युवाओं और बेटियों के लिए संदेश: अगर आज वह स्वयं के अधिकारों के लिए आवाज़ नहीं उठाएंगी, तो आने वाली कई लड़कियां अपनी सोच और विश्वास को बदलने से डरेंगी।
क्या है पूरा विवाद?
कंगना का यह बयान उस समय आया है जब सोशल मीडिया पर उनकी पिछली फ़िल्मों, इंटरव्यूज़ और पार्टियों की पुरानी वीडियो क्लिप्स के जरिए उन्हें ट्रोल किया जा रहा था। कंगना का कहना है कि उन्होंने बॉलीवुड में नेपोटिज्म, पे-पैरिटी (समान वेतन) और आइटम गानों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। इसके बावजूद लोग उनकी वर्तमान निष्ठा पर सवाल उठाने के लिए उनके व्यक्तिगत अतीत को घसीटते हैं।
इस तीखे बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। जहाँ एक तरफ कंगना के समर्थक उनकी स्पष्टवादिता और वैचारिक स्वतंत्रता के पक्ष का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके विरोधी इसे राजनीतिक पैंतरा करार दे रहे हैं।
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