बॉलीवुड में जब दो बड़े और मंझे हुए कलाकार एक साथ पर्दे पर आते हैं, तो दर्शकों की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच जाती हैं। थ्रिलर और सस्पेंस ड्रामा के शौकीनों के लिए इस बार सिनेमाघरों में ‘दायरा’ (Daayra) दस्तक दे चुकी है। साउथ सिनेमा में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले पृथ्वीराज सुकुमारन और बॉलीवुड की बेबाक अदाकारा करीना कपूर खान की जोड़ी को पहली बार एक साथ देखना अपने आप में एक बड़ा आकर्षण है। निर्देशक मेघना गुलजार ने इस फिल्म में अपराध, नैतिकता, जांच-पड़ताल और सामाजिक दायरे की उन परतों को उधेड़ने की कोशिश की है, जो अक्सर अंधेरे में छिपी रहती हैं। चार रहस्मयी लाशों के इर्द-गिर्द बुनी गई यह कहानी शुरुआत से ही दर्शक को अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिश करती है, लेकिन क्या यह अपनी इस कोशिश में पूरी तरह सफल हो पाती है? आइए जानते हैं इस विस्तृत और निष्पक्ष रिव्यू में।
कहानी का ताना-बाना: चार लाशें और अनसुलझी गुत्थी
फिल्म की शुरुआत एक बेहद शांत और सुनसान इलाके में मिलती चार लावारिस लाशों से होती है। ये मौतें सामान्य नहीं हैं; हत्याओं के पीछे एक खास पैटर्न दिखाई देता है, जो पुलिस प्रशासन के होश उड़ा देता है। कहानी के मुख्य केंद्र में हैं सीनियर कड़क पुलिस ऑफिसर कबीर देशमुख (पृथ्वीराज सुकुमारन)। कबीर एक ऐसा पुलिस अधिकारी है जो नियम-कानूनों की परवाह किए बिना अपने तरीके से इंसाफ करने में यकीन रखता है। उसके भीतर एक अजीब सा गुस्सा है, एक कड़वाहट है, जो उसके अतीत के हादसों से जुड़ी हुई है।
दूसरी ओर, करीना कपूर खान (राधिका) का किरदार एक निडर जर्नलिस्ट और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट का है। राधिका हर उस बात पर सवाल उठाती है जिसे व्यवस्था दबाना चाहती है। जब चार लाशों का यह मामला सामने आता है, तो कबीर अपनी आक्रामक कार्यशैली से इसे सुलझाने में लग जाता है, वहीं राधिका सिस्टम, पुलिसिया कार्रवाई और इन मौतों के पीछे के असली सच पर सवाल खड़े करने लगती है। पृथ्वीराज का गुस्सा और करीना का तीखा सवाल ही इस फिल्म का मुख्य वैचारिक संघर्ष है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, परतें खुलती हैं और चार लाशों का यह राज कई बड़े चेहरों, राजनीतिक साठगांठ और समाज के तथाकथित ‘दायरे’ को बेनकाब करता है।

अभिनय का जादू: पृथ्वीराज की आक्रामकता और करीना का ठहराव
अभिनय के दृष्टिकोण से यह फिल्म पूरी तरह से पृथ्वीराज सुकुमारन और करीना कपूर खान के कंधों पर टिकी है।
- पृथ्वीराज सुकुमारन: कबीर के किरदार में पृथ्वीराज ने बेहतरीन काम किया है। उनके चेहरे की सख्ती, आंखों में दबा गुस्सा और एक टूटे हुए इंसान की तड़प उनके अभिनय में साफ झलकती है। जब वे पर्दे पर आते हैं, तो अपनी बॉडी लैंग्वेज और भारी आवाज से पूरे फ्रेम पर कब्जा कर लेते हैं। एक्शन सीन हो या फिर करीना के साथ संवाद वाले इंटेंस सीन, पृथ्वीराज का स्क्रीन प्रेजेंस कमाल का है।
- करीना कपूर खान: करीना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल ग्लैमरस किरदारों तक सीमित नहीं हैं। राधिका के किरदार में उन्होंने एक परिपक्व और संयमित अभिनय पेश किया है। बिना किसी ओवर-ड्रामा के, केवल अपनी आंखों और संवाद अदायगी से वे सिस्टम पर तीखे प्रहार करती हैं। पृथ्वीराज के उग्र किरदार के सामने करीना का ठहराव फिल्म को एक संतुलन प्रदान करता है।
- सहायक कलाकार: फिल्म में विजय राज और जाकिर हुसैन जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। विजय राज ने एक संदिग्ध और रहस्यमयी किरदार को इतनी बारीकी से निभाया है कि वे हर सीन में दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष: कसावट और सिनेमैटोग्राफी
मेघना गुलजार थ्रिलर और संवेदनशील विषयों को पर्दे पर उतारने के लिए जानी जाती हैं। ‘दायरा’ में भी उन्होंने माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी (कैमरा वर्क) बेहद शानदार है। डार्क टोन, धुंधले बैकग्राउंड और रात के शॉट्स फिल्म के रहस्यमयी मूड को बखूबी उभारते हैं। बैकग्राउंड स्कोर सस्पेंस को बढ़ाने में मदद करता है और दर्शकों की धड़कनों को थ्रिलर सीन्स के साथ बांधकर रखता है। संवाद चुटीले हैं और न्याय, कानून व नैतिकता के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
अंतिम फैसला: देखें या ना देखें?
‘दायरा’ एक ऐसी क्राइम थ्रिलर है जो समाज के कड़वे सच और न्याय व्यवस्था की सीमाओं पर कड़ा प्रहार करती है। यदि आप पृथ्वीराज सुकुमारन और करीना कपूर खान के मुरीद हैं और आपको इंटेंस, डार्क और संजीदा क्राइम थ्रिलर देखना पसंद है, तो यह फिल्म आपके लिए एक बार देखने लायक (One-Time Watch) जरूर है।
लेकिन, अगर आप ‘दृश्यम’ या ‘अंधाधुंध’ जैसे हर मिनट में बदलने वाले और चौंका देने वाले क्लाइमेक्स की उम्मीद में जा रहे हैं, तो शायद आपको थोड़ा हताश होना पड़े। कुल मिलाकर, ‘दायरा’ में बेहतरीन अभिनय, उम्दा निर्देशन और मसाला खूब है, लेकिन पटकथा का ढीलापन इसे एक मास्टरपीस बनने से रोक देता है।
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