लोक आस्था, पवित्रता और कठिन नियमों के पालन के लिए जाना जाने वाला बिहार का महापर्व छठ पूरी दुनिया में अपनी एक खास पहचान रखता है। इस साल यह पावन पर्व न केवल आम जनमानस के बीच बल्कि फिल्मी दुनिया के सितारों में भी बेहद उत्साह के साथ मनाया गया। बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री तमन्ना भाटिया और अभिनेता सिद्धार्थ ने भी इस महापर्व छठ के दौरान पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। छठ के तीसरे दिन संध्या अर्घ्य के पावन अवसर पर दोनों कलाकार पूरी तरह से छठ पर्व के रंगों में रंगे नजर आए। कोसी भरने की परंपरा से लेकर नदी के पवित्र जल में सूप उठाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने तक, उनकी भक्ति और समर्पण की खूबसूरत तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
कोसी भराई की पावन परंपरा और विशेष तैयारी
छठ पूजा में ‘कोसी भराई’ या ‘कोसी पूजन’ की परंपरा का बेहद खास महत्व माना जाता है। यह अनुष्ठान मुख्य रूप से मन्नत पूरी होने या परिवार में सुख-समृद्धि और मंगल की कामना के लिए किया जाता है। संध्या अर्घ्य के बाद घर के आंगन या पूजा स्थल पर मिट्टी के पांच या सात हाथियों के साथ गन्ने का छत्र (मंडप) बनाया जाता है। इसके बाद मिट्टी के घड़ों (कोसी) में ठेकुआ, फल, चना, सुथनी, केला, गन्ना और अन्य पूजन सामग्रियां रखकर भक्ति भाव से दीप प्रज्वलित किए जाते हैं।
तमन्ना भाटिया और सिद्धार्थ की वायरल तस्वीरों में इस विशेष परंपरा को बेहद पारंपरिक और भव्य तरीके से निभाते हुए देखा जा सकता है। तस्वीरों में तमन्ना भाटिया पारंपरिक परिधान में गन्ने से बने मंडप के नीचे दीया जलाते हुए और कोसी की पूजा करते हुए नजर आ रही हैं। वहीं, सिद्धार्थ भी भक्ति भाव से लीन होकर इस पावन अनुष्ठान का हिस्सा बने। दोनों ने मिलकर छठी मैया का ध्यान किया और पारंपरिक छठ गीतों की गूंज के बीच कोसी भराई की रस्म पूरी की।
पवित्र जल में सूप लेकर दिया पहला अर्घ्य
छठ पर्व का सबसे मुख्य और मनमोहक दृश्य संध्या अर्घ्य के समय देखने को मिलता है। ढलते सूर्य को नमन करने और जल में खड़े होकर पूजा की दउरा व सूप अर्पित करने का यह समय बेहद पवित्र माना जाता है। तस्वीरों में तमन्ना भाटिया और सिद्धार्थ हाथ में सूप लिए घुटने भर जल में खड़े दिखाई दे रहे हैं। सूप में ठेकुआ, सेब, गन्ना, नारियल, और मौसमी फल सजे हुए हैं।
तमन्ना भाटिया पीले और लाल रंग की खूबसूरत पारंपरिक साड़ी में नजर आ रही हैं, वहीं सिद्धार्थ ने सादा कुर्त्ता-पायजामा और गमछा धारण किया हुआ है। दोनों ने सूर्य देव की ओर मुख करके अत्यंत श्रद्धा से दूध और जल से पहला अर्घ्य अर्पित किया। डूबते हुए सूर्य को नमन करते समय उनके चेहरों पर जो अपार शांति, श्रद्धा और भक्ति का भाव देखा जा सकता है, उसने प्रशंसकों और छठ व्रतियों का दिल जीत लिया है।
छठ पूजा का धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा का यह चार दिवसीय पर्व केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और भगवान सूर्य के प्रति आभार प्रकट करने का एक अनूठा जरिया है। नहाय-खाय से शुरू होकर खरना, संध्या अर्घ्य और अंत में उषा अर्घ्य के साथ समाप्त होने वाले इस व्रत में स्वच्छता, पवित्रता और अनुशासन का कड़ाई से पालन किया जाता है।
यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि जीवन में जिस तरह चढ़ते सूर्य की पूजा की जाती है, उसी प्रकार ढलते सूर्य को भी सम्मान और अर्घ्य दिया जाता है। यह संस्कृति हमें सिखाती है कि सुख और दुःख, उत्थान और पतन, जीवन के दो अनिवार्य पहलू हैं। तमन्ना और सिद्धार्थ ने जिस सादगी और निष्ठा के साथ इस लोक पर्व के नियमों को समझा और मनाया, उसकी सराहना हर तरफ हो रही है।
प्रशंसकों और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
जैसे ही तमन्ना भाटिया और सिद्धार्थ की छठ पूजा की ये तस्वीरें इंटरनेट पर सामने आईं, प्रशंसकों की प्रतिक्रियाओं का बाढ़ आ गई। बिहार और झारखंड से जुड़े लोगों ने इस बात पर विशेष खुशी जताई कि भारतीय सिनेमा के इतने बड़े सितारे उनकी संस्कृति और पावन परंपराओं को इतनी आत्मीयता से अपना रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग इन तस्वीरों को शेयर करते हुए दोनों को छठ पर्व की शुभकामनाएं दे रहे हैं।
फैंस का कहना है कि चमक-धमक की दुनिया से दूर पारंपरिक वेशभूषा में जल के बीच खड़े होकर पूजा करना यह दर्शाता है कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना कितना सुखद और सम्मानजनक अनुभव होता है। कई लोगों ने तमन्ना भाटिया की सादगी और उनके पारंपरिक अवतार की जमकर तारीफ की है।
उषा अर्घ्य और पारण के साथ महापर्व का समापन
संध्या अर्घ्य देने के बाद अब चौथे और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य (उषा अर्घ्य) देने की तैयारी है। तड़के सुबह से ही व्रती और श्रद्धालु घाटों पर एकत्र होकर भगवान भास्कर के उदय होने का इंतजार करते हैं। सूर्य की पहली किरण के साथ अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करके अपना 36 घंटे का निर्जला उपवास (पारण) समाप्त करते हैं। तमन्ना और सिद्धार्थ भी इस अंतिम चरण के अनुष्ठान में भाग लेकर अपनी पूजा संपन्न करेंगे।
यह महापर्व न केवल आस्था का संगम है, बल्कि आपसी भाईचारे, समरसता और प्रकृति प्रेम का भी संदेश देता है। सितारों द्वारा इस तरह भारतीय लोक संस्कृति के त्योहारों को उत्साहपूर्वक मनाना देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।
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