बेटे शमशेर की कब्र पर टूटीं सेलिना जेटली, आंसू बनकर आंखों से छलका दर्द, बोलीं- ‘मां का प्यार कोर्ट को कैसे समझाऊं?’

पूर्व मिस इंडिया और बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली इस समय अपनी जिंदगी के सबसे कठिन और अंधकारमय दौर से गुजर रही हैं। हाल ही में अपने ऑस्ट्रियाई पति पीटर हाग से तलाक और घरेलू हिंसा की कानूनी लड़ाई के बीच, सेलिना अपने दिवंगत बेटे शमशेर की कब्र पर पहुंचीं, जहां उनका दिल का गुबार आंसुओं के रूप में बह निकला। इस भावुक पल की तस्वीरें और संदेश सोशल मीडिया पर सामने आते ही हर किसी की आंखें नम हो गईं।

सेलिना का दर्द सिर्फ एक अभिनेत्री का नहीं, बल्कि उस मां का है जो कानून की चौखट और अपने मरे हुए बच्चे की यादों के बीच पिस रही है। कब्र के पास बैठकर रोती हुई सेलिना ने जो सवाल उठाया—“एक मां का प्यार और उसका दर्द मैं किसी अदालत के कमरों और कानूनी कागजों पर कैसे समझाऊं?”—उसने हर इंसान की रूह को कपा कर रख दिया है।

मासूम की कब्र पर बेबस मां का विलाप

वर्ष 2017 में सेलिना जेटली ने दूसरी बार जुड़वां बच्चों (शमशेर और अर्थार) को जन्म दिया था। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जन्म के तुरंत बाद गंभीर हृदय विकार (हाइपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम) के कारण उनके एक बेटे शमशेर का निधन हो गया। उस समय सेलिना के दिल का जो टुकड़ा टूटा था, वह जख्म आज तक हरा है।

हाल ही में जब सेलिना शमशेर की अंतिम विश्राम स्थली (कब्र) पर पहुंचीं, तो वह अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। फूलों से सजी उस छोटी सी कब्र को पकड़कर रोती सेलिना ने अपने सोशल मीडिया पर एक बेहद मार्मिक नोट लिखा। उन्होंने लिखा कि दुनिया के लिए समय बीत गया होगा, लेकिन एक मां के लिए उस मासूम की सांसों का थम जाना कल की ही बात लगती है। कानूनी दांव-पेचों, अदालती सुनवाइयों और बच्चे की कस्टडी की जंग के बीच एक मां की ममता किस तरह बेबस हो जाती है, यह सेलिना के शब्दों में साफ छलक रहा था।

‘कोर्ट को कैसे समझाऊं मां का प्यार?’: कानूनी लड़ाई का कड़वा सच

सेलिना जेटली और उनके पति पीटर हाग के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद अब पूरी तरह से अदालती गलियारों में पहुंच चुका है। सेलिना ने अपने पति और उनके परिवार पर मानसिक उत्पीड़न और गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चों की कस्टडी को लेकर भी लंबी कानूनी प्रक्रिया जारी है।

कब्र के पास खड़े होकर सेलिना ने न्याय प्रणाली पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि अपनी बेबसी जाहिर की। उन्होंने लिखा:

“अदालतें सबूत मांगती हैं, दस्तावेज मांगती हैं और दलीलें सुनती हैं। लेकिन जो दर्द एक मां अपने सीने में लिए घूमती है, जो रातों की नींद उसने अपने बच्चे को खोने के बाद गंवाई है, उसे किस धारा या कानून के तहत साबित किया जाए? मैं कोर्ट रूम के बंद कमरों में जजों और वकीलों को यह कैसे समझाऊं कि एक मां की ममता किसी फैसले या कस्टडी के कागजों की मोहताज नहीं होती?”

उनका यह बयान उन तमाम महिलाओं की आवाज बन गया है जो तलाक या कस्टडी की कानूनी लड़ाइयों में अपनी मानसिक और भावनात्मक स्थिति को साबित करने के लिए संघर्ष करती हैं।

शमशेर को खोने का दर्द और ‘अर्थार’ की जिम्मेदारी

सेलिना जेटली का जीवन पिछले कुछ सालों में दुखों का पहाड़ झेलता रहा है। 2017 में जब उन्होंने शमशेर को खोया, उसी दौरान उनके पिता का भी निधन हो गया था और इसके कुछ ही महीनों बाद उनकी मां भी दुनिया छोड़ गईं। एक साथ तीन अपनों को खोने के सदमे ने सेलिना को मानसिक रूप से तोड़ दिया था।

लेकिन शमशेर का जुड़वां भाई ‘अर्थार’ और उनके बड़े जुड़वां बेटे (विंस्टन और विराज) उनकी जीने की वजह बने। सेलिना ने अपने पोस्ट में इस बात का भी जिक्र किया कि शमशेर की कब्र पर आकर उन्हें अपने जीवित बच्चों के लिए लड़ने की ताकत मिलती है। उन्होंने कहा कि शमशेर भले ही इस दुनिया में नहीं है, लेकिन वह आसमान से अपनी मां को हिम्मत दे रहा है ताकि वह अपने बाकी बच्चों के हक के लिए निडर होकर लड़ सकें।

फैंस और बॉलीवुड का मिला संबल

सेलिना जेटली का यह दर्दनाक संदेश इंटरनेट पर आते ही तेजी से वायरल हो गया। आम जनता से लेकर बॉलीवुड के कई सितारों ने सेलिना के प्रति संवेदना व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर लोग उनके साहस की सराहना कर रहे हैं और उन्हें इस कठिन समय में मजबूत बने रहने की दुआएं दे रहे हैं।

कई यूजर्स ने लिखा कि एक मां का दर्द दुनिया का सबसे बड़ा दर्द होता है और किसी भी इंसान को अपनी ही औलाद की कब्र पर इस तरह न्याय की गुहार नहीं लगानी पड़नी चाहिए। लोगों का मानना है कि सेलिना का यह कदम उन लाखों माताओं को हिम्मत देगा जो अपने बच्चों और अपने आत्मसम्मान के लिए अकेले लड़ाई लड़ रही हैं।

एक मां की अटूट हिम्मत

सेलिना जेटली का यह भावुक रूप हमें सिखाता है कि शोबिज की चकाचौंध के पीछे भी इंसानी दर्द और भावनाएं उतनी ही गहरी होती हैं। ग्लैमरस दुनिया का हिस्सा रहने के बावजूद, जब बात औलाद और आत्मसम्मान की आती है, तो एक औरत केवल एक ‘मां’ होती है।

शमशेर की कब्र पर बहने वाला हर एक आंसू सेलिना के उस अटूट हौसले का गवाह है, जो तमाम मुश्किलों, अदालती लड़ाइयों और व्यक्तिगत दुखों के बावजूद हार मानने को तैयार नहीं है। अब देखना यह होगा कि कानून इस बेबस मां के दर्द और न्याय की गुहार को किस तरह सुनता है, लेकिन फिलहाल सेलिना का यह सच हर दिल को झकझोर रहा है।

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  • Rashika Sharma

    राशिका शर्मा एक उभरती हुई युवा पत्रकार एवं कंटेंट राइटर हैं, जो समाज, शिक्षा, डिजिटल मीडिया, लाइफस्टाइल और समसामयिक विषयों पर प्रभावशाली एवं तथ्यात्मक लेखन के लिए जानी जाती हैं। उन्हें समाचार लेखन के माध्यम से लोगों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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