छोटे पर्दे पर अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाली मशहूर टीवी अभिनेत्री ऐश्वर्या सखूजा किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। ‘सास बिना ससुराल’, ‘त्रिदेवियां’ और ‘ये हैं चाहतें’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी भूमिकाओं से घर-घर में प्रसिद्ध हुई ऐश्वर्या केवल अपनी कला के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अटूट हिम्मत और जीवटता के लिए भी जानी जाती हैं। स्क्रीन पर मुस्कुराती और हर किरदार को जीवंत करती ऐश्वर्या के व्यक्तिगत जीवन में एक ऐसा संघर्ष भी शामिल है, जिससे वह पिछले कई सालों से हर single मिनट लड़ रही हैं। यह संघर्ष है—टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) का।
अक्सर जब लोग ‘डायबिटीज’ का नाम सुनते हैं, तो वे इसे उम्र बढ़ने, खराब जीवनशैली या खान-पान की अनियमितताओं से जोड़कर देखते हैं। लेकिन ऐश्वर्या सखूजा का मामला पूरी तरह से अलग है। टाइप 1 डायबिटीज एक ऐसी ऑटोइम्यून स्थिति (Autoimmune Condition) है, जिसमें शरीर का अपना ही इम्यून सिस्टम अग्न्याशय (Pancreas) की उन कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देता है जो इंसुलिन बनाती हैं। इसका मतलब है कि मरीज का शरीर खुद इंसुलिन बनाना पूरी तरह से बंद कर देता है। इस बीमारी के साथ जीना कैसा होता है, अपनी दिनचर्या को कैसे प्रबंधित करना पड़ता है और मानसिक व शारीरिक रूप से यह कितना चुनौतीपूर्ण है—ऐश्वर्या सखूजा ने इस पर खुलकर बात की है और अपनी जीवन यात्रा को दुनिया के सामने साझा किया है।
बीमारी का पता चलना और शुरुआती सदमा
ऐश्वर्या सखूजा को जब पहली बार अपनी इस बीमारी के बारे में पता चला, तब वह अपने करियर के बेहतरीन मोड़ पर थीं। काम की व्यस्तता, शूटिंग की भागदौड़ और लंबे वर्किंग आवर्स के बीच जब उनके शरीर में अचानक अत्यधिक थकान, वजन का तेजी से गिरना और बार-बार प्यास लगने जैसे लक्षण दिखाई देने लगे, तो उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया। जब जांच रिपोर्ट में टाइप 1 डायबिटीज की पुष्टि हुई, तो यह उनके और उनके परिवार के लिए एक बहुत बड़ा झटका था।
ऐश्वर्या बताती हैं कि किसी भी युवा कलाकार के लिए यह स्वीकार करना बेहद मुश्किल होता है कि अब उन्हें पूरी जिंदगी एक ऐसी बीमारी के साथ जीना होगा जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। शुरुआती दिनों में मन में कई सवाल थे—”मेरे साथ ही ऐसा क्यों?”, “क्या मैं अब दोबारा सामान्य तरीके से शूटिंग कर पाऊँगी?”, “क्या मेरी जिंदगी कभी पहले जैसी हो पाएगी?” यह दौर मानसिक रूप से बेहद कष्टदायक था। बीमारी का स्वीकार करना ही सबसे पहला और बड़ा कदम था।
टाइप 1 डायबिटीज के साथ 24 घंटे का प्रबंधन
टाइप 1 डायबिटीज कोई ऐसी स्थिति नहीं है जिसमें आप सुबह एक गोली खाएं और दिनभर के लिए बेफिक्र हो जाएं। यह 24 घंटे का एक ऐसा प्रबंधन (Management) है, जिसमें एक मिनट की लापरवाही भी सेहत पर भारी पड़ सकती है। ऐश्वर्या बताती हैं कि उनका जीवन अब सुइयों (Injections), ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइसेस और कैलोरी की गिनती के इर्द-गिर्द घूमता है।
- इंसुलिन पर निर्भरता: ऐश्वर्या को दिन में कई बार अपने रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर की जांच करनी पड़ती है और खाने के हिसाब से इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं।
- लो और हाई शुगर का खतरा: हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर का अचानक कम होना) और हाइपरग्लाइसीमिया (शुगर का अत्यधिक बढ़ जाना) दोनों ही स्थितियां बेहद खतरनाक होती हैं। जब शुगर अचानक गिरती है, तो शरीर में कपकपी, अत्यधिक पसीना, घबराहट और चक्कर आने लगते हैं। ऐसे में तुरंत शुगर या ग्लूकोज लेना जरूरी होता है।
- शूटिंग का दबाव: टीवी इंडस्ट्री में काम करने की अपनी अलग चुनौतियां हैं। लंबे और अनिश्चित शूटिंग शेड्यूल, हैवी ड्रेसेस, मेकअप और लगातार लाइटों के बीच काम करते हुए अपने शुगर लेवल को संतुलित रखना आसान नहीं होता। ऐश्वर्या हमेशा अपने साथ इंसुलिन किट, ग्लूकोज मॉनिटर और इमरजेंसी स्नैक्स रखती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य और बीमारी का सामाजिक पहलू
ऐश्वर्या सखूजा का मानना है कि किसी भी पुरानी (Chronic) बीमारी से लड़ते समय मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। बार-बार ब्लड शुगर का फ्लक्चुएट होना मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान का कारण बनता है। इसके अलावा, समाज में डायबिटीज को लेकर फैली भ्रांतियां भी मरीज के लिए मानसिक तनाव बढ़ाती हैं।
लोग अक्सर बिन मांगी सलाह देने लगते हैं—”अरे, मीठा खाना छोड़ दो, ठीक हो जाओगी” या “योग करो, डायबिटीज जड़ से खत्म हो जाएगी।” ऐश्वर्या स्पष्ट करती हैं कि लोग अक्सर टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के बीच का अंतर नहीं समझते। टाइप 1 डायबिटीज में परहेज या वर्कआउट से इंसुलिन बनना शुरू नहीं होता, यहाँ इंसुलिन बाहरी रूप से लेना ही जीवन रक्षा का एकमात्र जरिया है। ऐसे में लोगों को जागरूक करना और बीमारी के प्रति सही जानकारी फैलाना बेहद आवश्यक है।
अनुशासित जीवनशैली और आहार का नियमन
इस बीमारी से हार मानने के बजाय ऐश्वर्या ने इसे अपनी ताकत बनाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी जीवनशैली में अनुशासन को सर्वोपरि रखा।
- संतुलित आहार (Balanced Diet): ऐश्वर्या अपने आहार में लो-कार्बोहाइड्रेट और हाई-फाइबर वाली चीजों को प्राथमिकता देती हैं। वह प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक मीठी चीजों और जंक फूड से पूरी तरह दूरी बनाए रखती हैं।
- नियमित व्यायाम (Regular Exercise): शारीरिक रूप से सक्रिय रहना उनके दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। योग, लाइट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वॉक से उनका इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर रहता है और तनाव कम होता है।
यह भी पढ़ें: PSSSB JE Recruitment 2026: पंजाब में जूनियर इंजीनियर के 262 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया फिर से शुरू