उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित लोअर पीसीएस (Lower Subordinate Services) मुख्य परीक्षा में शामिल हुए लाखों अभ्यर्थियों के मन में इस समय एक ही सबसे बड़ा सवाल तैर रहा है— “मेंस परीक्षा के बाद फाइनल सेलेक्शन के लिए कौन सा स्कोर सुरक्षित (Safe Score) रहेगा?” आयोग द्वारा आधिकारिक उत्तर कुंजी (Answer Key) जारी किए जाने के बाद अभ्यर्थियों ने अपने प्राप्तांकों का मिलान तो कर लिया है, लेकिन अंतिम चयन सूची (Merit List) और दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) की प्रक्रिया को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
विषय विशेषज्ञों और प्रमुख कोचिंग संस्थानों के विश्लेषकों का मानना है कि इस बार की मुख्य परीक्षा का स्तर और प्रश्न पत्र का पैटर्न कटऑफ को काफी हद तक प्रभावित करने वाला है। आइए विस्तार से समझते हैं कि श्रेणीवार अनुमानित कटऑफ क्या रह सकती है और किन-किन कारकों का असर आपके फाइनल रिजल्ट पर पड़ेगा।
परीक्षा का स्तर और अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया
आयोग द्वारा आयोजित यह मुख्य परीक्षा 100 अंकों के लिए एक ही पाली में आयोजित की गई थी। प्रश्न पत्र में मुख्य रूप से सामान्य हिंदी, कंप्यूटर ज्ञान, भारत एवं विश्व का भूगोल तथा समसामयिकी (Current Affairs) से प्रश्न पूछे गए थे।
परीक्षा देकर निकले अधिकांश छात्रों और विशेषज्ञों के अनुसार, प्रश्न पत्र का समग्र स्तर ‘मध्यम से कठिन’ (Moderate to Difficult) था। विशेष रूप से:
- कंप्यूटर और आईटी सेक्टर के प्रश्न: इन प्रश्नों ने कई अभ्यर्थियों को उलझाया क्योंकि इनमें सीधे तथ्यात्मक ज्ञान के बजाय व्यावहारिक और तकनीकी अवधारणाओं पर आधारित प्रश्न अधिक थे।
- करंट अफेयर्स और सामान्य अध्ययन: समसामयिकी के प्रश्नों में हाल की घटनाओं के विस्तृत पहलुओं को पूछा गया था, जिससे गलत उत्तर होने की संभावना बढ़ गई।
- सामान्य हिंदी: हिंदी का खंड अपेक्षाकृत संतुलित था, जहाँ नियमित रूप से तैयारी करने वाले छात्रों ने बेहतर स्कोर किया।
ऋणात्मक अंकन (Negative Marking) का बड़ा प्रभाव
इस परीक्षा में 0.25 (1/4) अंक की निगेटिव मार्किंग लागू थी। विशेषज्ञ बताते हैं कि नेगेटिव मार्किंग के कारण अक्सर अभ्यर्थियों का अनुमानित स्कोर अंतिम कटऑफ के समय 4 से 6 अंक तक नीचे गिर जाता है।
उत्तर कुंजी मिलाने के बाद अधिकांश अभ्यर्थी केवल अपने सही उत्तरों को गिन लेते हैं और गलत उत्तरों के ऋणात्मक अंक काटना भूल जाते हैं। जब तक गलत प्रश्नों के अंक काटकर ‘नेगेटिव-एडजस्टेड स्कोर’ न निकाला जाए, तब तक सटीक स्थिति का पता लगाना मुश्किल होता है।
विषय विशेषज्ञों के अनुसार श्रेणीवार संभावित कटऑफ (100 अंकों में से)
प्रसिद्ध शिक्षाविदों और परीक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों के लिए अपेक्षित कटऑफ का अनुमान निम्न प्रकार से लगाया गया है:
| श्रेणी (Category) | अनुमानित कटऑफ (Expected Cutoff Marks) |
| अनारक्षित (General/Unreserved) | 70 – 75 अंक |
| ओबीसी (OBC) | 67 – 72 अंक |
| ईडब्ल्यूएस (EWS) | 68 – 73 अंक |
| अनुसूचित जाति (SC) | 60 – 66 अंक |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 55 – 62 अंक |
ध्यान दें: यह आंकड़े विभिन्न कोचिंग संस्थानों और विशेषज्ञों के फीडबैक पर आधारित अनुमान हैं। अंतिम एवं आधिकारिक कटऑफ आयोग (UPSSSC) द्वारा परिणाम जारी किए जाने के समय ही घोषित की जाएगी।
आपके प्राप्तांक के आधार पर आपकी चयन संभावना (Safe Score Zone)
विशेषज्ञों ने अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों के आधार पर चार मुख्य ज़ोन (Zones) में स्थिति को स्पष्ट किया है:
- सुरक्षित स्थिति (75+ अंक):जिन अभ्यर्थियों के ऋणात्मक अंक घटाने के बाद 75 या उससे अधिक अंक बन रहे हैं, वे खुद को बेहद मजबूत और सुरक्षित स्थिति में मान सकते हैं। ऐसे अभ्यर्थियों का फाइनल चयन और मनपसंद पद मिलने के आसार अत्यधिक प्रबल हैं।
- अच्छी संभावना (72 से 74 अंक):सामान्य और ईडब्ल्यूएस वर्ग में 72 से 74 अंक पाने वाले उम्मीदवारों की स्थिति भी काफी अच्छी मानी जा रही है। इस ब्रैकेट में आने वाले अभ्यर्थियों के चयन की संभावना काफी अधिक है।
- कड़ी टक्कर और कटऑफ पर निर्भर (68 से 71 अंक):इस स्कोर ब्रैकेट में सबसे अधिक अभ्यर्थी मौजूद हैं। 68 से 71 अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों की किस्मत श्रेणीवार आरक्षण और अंतिम आधिकारिक कटऑफ की बारीकियों पर टिकी होगी।
- बॉर्डर ज़ोन (65 से 67 अंक):65 से 67 अंकों के बीच स्कोर करने वाले उम्मीदवारों का मुकाबला काफी नजदीकी (Close Fight) रहने वाला है। आरक्षित श्रेणियों (जैसे SC/ST) के लिए यह स्कोर सुरक्षित हो सकता है, लेकिन अनारक्षित वर्ग के लिए परिस्थितियाँ कठिन हो सकती हैं।
- 65 अंक से कम:अनारक्षित और ओबीसी वर्ग में 65 से कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों के लिए फाइनल सेलेक्शन की संभावनाएं अपेक्षाकृत थोड़ी कम मानी जा रही हैं।
कटऑफ को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
यूपीएसएसएससी लोअर पीसीएस का अंतिम कटऑफ कई तकनीकी और प्रशासनिक कारकों पर निर्भर करता है:
- साक्षात्कार (Interview) का न होना: इस भर्ती प्रक्रिया में साक्षात्कार का चरण नहीं रखा गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि मुख्य परीक्षा के अंक ही अंतिम चयन का एकमात्र आधार बनेंगे। ऐसे में मेंस परीक्षा की कटऑफ पहले के वर्षों की तुलना में थोड़ी सख्त रहने की उम्मीद होती है।
- रिक्तियों की कुल संख्या (Total Vacancies): विज्ञापित पदों की कुल संख्या के अनुपात में ही अभ्यर्थियों को दस्तावेज़ सत्यापन के लिए आमंत्रित किया जाएगा। पदों की संख्या जितनी अधिक होगी, कटऑफ में उतनी ही स्थिरता देखने को मिलेगी।
- उपस्थिति दर (Attendance): मुख्य परीक्षा में उपस्थित होने वाले अभ्यर्थियों का प्रतिशत भी औसत प्राप्तांकों को प्रभावित करता है।
आगे क्या करें अभ्यर्थियों के लिए मार्गदर्शन?
विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन अभ्यर्थियों के प्राप्तांक अनुमानित सेफ ज़ोन (70+ अंक) के आसपास आ रहे हैं, वे अपने सभी शैक्षणिक, जाति, निवास तथा आरक्षण से जुड़े दस्तावेजों को दुरुस्त रखें ताकि दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) के समय किसी प्रकार की बाधा न आए।
वहीं, जिन अभ्यर्थियों का स्कोर इस बार थोड़ा कम रह गया है, उन्हें हताश होने के बजाय अपनी कमियों (विशेषकर नेगेटिव मार्किंग में कटे अंकों) का विश्लेषण करना चाहिए और उत्तर प्रदेश की अन्य आगामी अधीनस्थ परीक्षाओं की तैयारी में नए सिरे से जुट जाना चाहिए।
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