परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नंदन नीलेकणि समिति को मिला जनवरी 2027 तक का समय

नई दिल्ली: देश की प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने, प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को स्थायी रूप से रोकने और डिजिटल तकनीकों के समावेश के लिए गठित ‘उच्च-स्तरीय परीक्षा सुधार टास्क फोर्स’ (High-Powered Exam Reform Task Force) की समय-सीमा बढ़ा दी गई है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली छह-सदस्यीय इस विशेषज्ञ समिति को केंद्र सरकार ने अब जनवरी 2027 तक अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने की अनुमति दी है।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य हितधारकों, राज्यों, विषय विशेषज्ञों और विभिन्न परीक्षा एजेंसियों के साथ व्यापक स्तर पर परामर्श प्रक्रिया को पूरा करना है ताकि देश में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) समेत अन्य संस्थाओं की परीक्षा प्रक्रियाओं को सुरक्षित और फुलप्रूफ बनाया जा सके।

क्यों पड़ी समिति का कार्यकाल बढ़ाने की आवश्यकता?

नीलेकणि समिति का गठन प्रतियोगी परीक्षाओं (विशेषकर नीट-यूजी और यूजीसी-नेट जैसी परीक्षाओं) के दौरान हुई धांधलियों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद एक दीर्घकालिक सुधार ढांचा तैयार करने के लिए किया गया था। शुरुआती समय-सीमा के अनुसार समिति को अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट जमा करनी थी, परंतु अब तक समिति को देशभर से 50,000 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं।

इन सुझावों में छात्र, अभिभावक, शिक्षक, विषय विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और परीक्षा आयोजित कराने वाले संस्थान शामिल हैं। समिति ने अब तक दर्जनों आंतरिक बैठकें की हैं और इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन सहित विभिन्न दिग्गजों के साथ परामर्श किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भी हलफनामे के जरिए समिति की अब तक की प्रगति की जानकारी दी है। व्यापक परामर्श और राज्यों के साथ तालमेल बिठाने के लिए ही समिति की समय-सीमा को विस्तारित किया गया है।

किन प्रमुख सुधारों पर काम कर रही है नीलेकणि समिति?

नीलेकणि टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में मूलभूत संरचनात्मक परिवर्तन लाने पर विचार कर रही है:

  • कम्प्यूटर-आधारित परीक्षा (CBT) एवं हाइब्रिड मॉडल: पारंपरिक पेन-एंड-पेपर (ओएमआर शीट) आधारित परीक्षाओं के स्थान पर चरणबद्ध तरीके से कम्प्यूटर आधारित या हाइब्रिड प्रणाली लागू करना।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग: प्रश्नपत्र तैयार करने और उनके डिजिटाइज्ड वितरण में AI और आधुनिक एन्क्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल करना।
  • साझा परीक्षा कैलेंडर (Common Exam Calendar): NTA, SSC, IBPS और रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जैसी प्रमुख एजेंसियों की परीक्षाओं की तिथियों में टकराव (Clash) रोकने के लिए एक केंद्रीकृत कैलेंडर तैयार करना।
  • जिला स्तरीय सुरक्षित केंद्र: हर जिले में सरकार द्वारा संचालित और पूर्ण सुरक्षित डिजिटल परीक्षा केंद्र स्थापित करना।

परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम

देश में हर साल करोड़ों छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं। प्रश्नपत्र लीक या तकनीकी खामियों से न केवल छात्रों का समय और मेहनत बर्बाद होती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। नंदन नीलेकणि, जिन्होंने भारत की ‘आधार’ (Aadhaar) परियोजना के डिजिटल ढांचे की नींव रखी थी, की अगुवाई वाली यह समिति एक ऐसे तकनीकी मॉडल पर काम कर रही है जिसे भेद पाना नामुमकिन हो।

जनवरी 2027 में आने वाली यह रिपोर्ट न केवल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज की समीक्षा करेगी, बल्कि भविष्य में भारत में पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार-मुक्त परीक्षा प्रणाली की नई रूपरेखा तय करेगी।

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  • Maanshii Sharma

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