राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission – NMC) ने देश के एमबीबीएस (MBBS) छात्रों को एक बड़ी राहत प्रदान की है। आयोग के अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (UGMEB) ने फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा (First Professional MBBS Examination) को पास करने के लिए एक अतिरिक्त ‘दया अवसर’ यानी ‘मर्सी अटेंप्ट’ (Mercy Attempt) देने की घोषणा की है।
यह निर्णय विशेष रूप से उन छात्रों के लिए एक जीवनदायिनी अवसर की तरह आया है जो विभिन्न कारणों से अपनी प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण करने में विफल रहे थे और करियर के मोड़ पर अनिश्चितता का सामना कर रहे थे।
1. NMC का बड़ा फैसला: क्या है ‘मर्सी अटेंप्ट’ योजना?
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने अपनी 18वीं गवर्निंग बैठक में प्राप्त विभिन्न प्रतिवेदन (representations) और छात्रों की समस्याओं की समीक्षा करने के बाद यह निर्णय लिया।
- अतिरिक्त प्रयास की अनुमति: वर्तमान नियमों के अनुसार, MBBS के प्रथम वर्ष (First Professional) की परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अधिकतम 4 प्रयास (Attempts) निर्धारित हैं। NMC के नए फैसले के तहत पात्र छात्रों को 4 निर्धारित प्रयासों के अतिरिक्त 1 अंतिम मर्सी अटेंप्ट (कुल 5 प्रयास) दिया जाएगा।
- एकमुश्त राहत (One-time Measure): आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल एक बार की विशेष छूट (One-time transitional measure) है। इसे भविष्य के बैचों के लिए एक स्थायी नियम या पूर्वदृष्टान्त (Precedent) के रूप में लागू नहीं किया जाएगा।
2. पात्रता की शर्तें: किन्हें मिलेगा इस राहत का लाभ?
NMC द्वारा जारी आधिकारिक सार्वजनिक सूचना के अनुसार, इस अतिरिक्त दया अवसर का लाभ उठाने के लिए छात्रों को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:
- शैक्षणिक सत्र: यह छूट उन सभी छात्रों पर लागू होगी जिन्होंने शैक्षणिक सत्र 2019-20 या उसके बाद (2019-20 and onwards) एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश लिया था।
- वैध दाखिला: छात्र का कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश वैध होना चाहिए। यदि संबंधित विश्वविद्यालय अथवा मेडिकल कॉलेज द्वारा छात्र का एडमिशन रद्द कर दिया गया है, तो उसे यह अवसर नहीं मिलेगा।
- 4 वर्ष की सीमा पार होने पर भी अवसर: जिन छात्रों ने फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस कोर्स पूरा करने के लिए निर्धारित 4 साल का समय पार भी कर लिया है, लेकिन उनका दाखिला वैध है, वे भी इस अतिरिक्त प्रयास में शामिल हो सकेंगे।
3. किन्हें नहीं मिलेगा अतिरिक्त मौका?
NMC ने अपने दिशा-निर्देशों में कठोरता से यह स्पष्ट किया है कि कौन से छात्र इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे:
- छठा (6th) प्रयास मान्य नहीं: जो छात्र पहले ही किसी पिछले NMC आदेश या अदालती निर्देश के माध्यम से 5वें (मर्सी) प्रयास का उपयोग कर चुके हैं और उसमें भी अनुत्तीर्ण रहे हैं, उन्हें छठा अवसर नहीं दिया जाएगा।
- न्यायालय का हवाला नहीं: NMC ने साफ किया है कि पूर्व में दिए गए किसी भी न्यायिक फैसले या आयोग के पुराने आदेशों का हवाला देकर छठे प्रयास की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
4. 10 साल की कुल अवधि का नियम यथावत रहेगा
अतिरिक्त परीक्षा अवसर प्रदान करने के बावजूद, NMC ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम को पूरा करने की कुल समय सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है:
- 10-वर्षीय सीमा (10-Year Completion Rule): एमबीबीएस में दाखिले की तिथि से लेकर अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप (CRMI) सहित पूरा कोर्स समाप्त करने की अधिकतम समय सीमा 10 वर्ष ही रहेगी।
- मर्सी अटेंप्ट मिलने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि छात्र की 10 साल की कुल समयावधि बढ़ा दी जाएगी। सभी छात्रों को इसी तय समय सीमा के भीतर अपनी डिग्री और इंटर्नशिप पूरी करनी होगी।
5. छात्रों और मेडिकल कॉलेजों के लिए मुख्य बिंदु
| विवरण | NMC नियम / दिशानिर्देश |
| पात्र बैच | शैक्षणिक सत्र 2019-20 और उसके बाद के एमबीबीएस छात्र |
| परीक्षा में प्रयास की कुल संख्या | 4 निर्धारित प्रयास + 1 मर्सी प्रयास = कुल 5 प्रयास |
| कोर्स की अधिकतम अवधि | दाखिले के दिन से अधिकतम 10 वर्ष (CRMI सहित) |
| प्रकृति | केवल लंबित मामलों के निपटारे के लिए एकमुश्त राहत (One-Time Relaxation) |
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) का यह कदम उन सैकड़ों मेडिकल छात्रों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जिनका मेडिकल करियर प्रथम वर्ष की परीक्षा न निकाल पाने के कारण अधर में लटका हुआ था। कोविड-19 महामारी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और व्यक्तिगत विकट परिस्थितियों से प्रभावित रहे छात्रों के लिए यह एक अंतिम और निर्णायक अवसर है। सभी संबंधित विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे NMC के इस नोटिस के अनुसार पात्र छात्रों के आवेदनों को त्वरित रूप से संसाधित करें।
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