झारखंड में छात्रों का उग्र प्रदर्शन: पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले, कई प्रदर्शनकारी घायल

जनसमाज संवाददाता, रांची: झारखंड की राजधानी रांची में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों और युवाओं के आंदोलन ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। राज्य सरकार की रोजगार नीतियों, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और विभिन्न विभागों में लंबित नियुक्तियों के विरोध में हजारों की संख्या में छात्र और अभ्यर्थी प्रशासनिक परिसर की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें आंसू गैस के गोले दागे गए और वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया गया। इस झड़प में कई प्रदर्शनकारी छात्र घायल हो गए हैं, जिन्हें निकटतम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, धक्का-मुक्की और पथराव में कुछ पुलिसकर्मियों के भी चोटिल होने की खबर है।

कैसे शुरू हुआ विवाद और क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें?

झारखंड के विभिन्न जिलों से आए हजारों छात्र और युवा पिछले काफी समय से सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया में हो रही देरी और परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर अपनी आवाज उठा रहे थे। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि राज्य में वर्षों से कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाएं अधर में लटकी हुई हैं। बार-बार परीक्षाओं की तिथियां स्थगित होने, प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं और अंतिम परिणाम में देरी के कारण अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितता के अंधकार में धकेला जा रहा है।

छात्रों द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें:

  • पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए और धांधली के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच हो।
  • समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर: वर्ष के प्रारंभ में ही आयोग द्वारा स्पष्ट और अनिवार्य परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए, जिसका समय पर पालन हो।
  • उम्र सीमा में छूट: कोरोना काल और विगत वर्षों में रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं के कारण अपनी अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके अभ्यर्थियों को आयु सीमा में विशेष छूट दी जाए।
  • लंबित नियुक्तियों को जल्द पूरा करना: विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े हजारों पदों पर अविलंब बहाली प्रक्रिया शुरू की जाए और पूर्व की परीक्षाओं के परिणाम जल्द घोषित किए जाएं।

मार्च के दौरान बढ़ा तनाव और पुलिस कार्रवाई

नियोजित कार्यक्रम के अनुसार, छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने के लिए प्रशासनिक कार्यालयों और मुख्य प्रशासनिक भवनों की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था और जगह-जगह बहुस्तरीय बैरिकेडिंग लगा दी गई थी।

जैसे ही छात्रों का समूह मुख्य बैरिकेड के पास पहुंचा, स्थिति तनावपूर्ण हो गई। छात्रों ने बैरिकेड्स को तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने माइक के जरिए प्रदर्शनकारियों को शांत रहने और आगे न बढ़ने की चेतावनी दी, लेकिन आक्रोशित छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे और नारेबाजी करते रहे।

तनाव बढ़ने के साथ ही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पहले वाटर कैनन की मदद से पानी की बौछारें छोड़ीं। इसके बावजूद जब भीड़ नियंत्रित नहीं हुई, तो पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। आंसू गैस के धुएं और अफरा-तफरी के माहौल में कई छात्र गिरकर घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भागदौड़ के दौरान कई अभ्यर्थियों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन का सामना करना पड़ा।

घायल छात्रों का इलाज और मौके पर स्थिति

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और अन्य साथी छात्रों की मदद से घायल अभ्यर्थियों को एम्बुलेंस और निजी वाहनों के माध्यम से पास के सदर अस्पताल और अन्य चिकित्सा केंद्रों में पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद कुछ छात्रों को छुट्टी दे दी गई है, जबकि कुछ का इलाज अभी जारी है।

घटनास्थल पर तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और त्वरित कार्य बल (RAF) की तैनाती कर दी गई है। पूरा क्षेत्र छावनी में तब्दील हो चुका है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और इलाके में शांति बनाए रखने के लिए गश्त बढ़ा दी गई है।

छात्र संगठनों और प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना के बाद छात्र संगठनों ने पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि वे केवल अपनी न्यायसंगत मांगों और अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे थे। सरकार और प्रशासन द्वारा संवाद स्थापित करने के बजाय दमनकारी नीति अपनाना पूरी तरह अनुचित है। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और घायल छात्रों की समुचित चिकित्सा व्यवस्था नहीं की गई, तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले लेगा।

दूसरी ओर, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सख्त हिदायत दी गई थी। पुलिस के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ को उकसाने और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था खतरे में पड़ गई थी। प्रशासन का दावा है कि स्थिति को पूरी तरह बेकाबू होने से रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम आवश्यक बल प्रयोग किया गया।

आगे की राह और युवाओं की चिंता

झारखंड में युवाओं और छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि राज्य के युवाओं के बीच रोजगार और परीक्षाओं को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि इस तरह के आंदोलनों को केवल बल प्रयोग से दबाने के बजाय सरकार को छात्र प्रतिनिधियों के साथ मेज पर बैठकर संवाद स्थापित करना चाहिए।

राज्य के विकास और युवाओं के सुनहरे भविष्य के लिए जरूरी है कि भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध, पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाया जाए, ताकि युवाओं का भरोसा राज्य की लोकतांत्रिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर बना रहे। फिलहाल, राजधानी में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन छात्रों का आक्रोश शांत होता नजर नहीं आ रहा है।

यह भी पढ़ें: BEL Recruitment 2026: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में प्रोजेक्ट इंजीनियर के 14 पदों पर भर्ती

Author

  • Rahul Kaushik

    Senior Editor

    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

    पत्रकारिता के क्षेत्र में राहुल कौशिक की लेखन शैली तथ्यात्मक, सहज और पाठकों को जानकारी के साथ जागरूक करने वाली मानी जाती है। वे विशेष रूप से युवा वर्ग, डिजिटल इंडिया, नई तकनीकों और सामाजिक मुद्दों से संबंधित विषयों पर सक्रिय रूप से कार्य करते हैं।

    राहुल कौशिक का उद्देश्य विश्वसनीय, उपयोगी और सकारात्मक पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक सही जानकारी पहुँचाना तथा समाज में जागरूकता को बढ़ावा देना है।

Leave a Comment