पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ और दिल्ली के बीच बसा औद्योगिक शहर ‘मोदीनगर’ भारतीय उद्योग जगत के उस सुनहरे दौर का साक्षी रहा है, जब देश में स्वदेशी विनिर्माण की नींव रखी जा रही थी। इस ऐतिहासिक औद्योगिक शहर को बसाने का श्रेय महान उद्योगपति रायबहादुर गुजरमल मोदी को जाता है। उन्होंने वर्ष 1933 में बेगमबाद नामक एक छोटे से गांव में चीनी मिल लगाकर जिस मोदी एंटरप्राइजेज की नींव रखी थी, उसने आगे चलकर भारत के व्यापारिक परिदृश्य को बदलकर रख दिया।
हालांकि, इस औद्योगिक घराने की सबसे दिलचस्प गाथा तब शुरू हुई जब गुजरमल मोदी के बेटे डॉक्टर भूपेंद्र कुमार मोदी (बी. के. मोदी) ने पारिवारिक विरासत को संभाला और उसे भारतीय सीमाओं से बाहर निकालकर अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया। बी. के. मोदी ने न केवल भारत में वैश्विक तकनीकों की एंट्री करवाई, बल्कि सिंगापुर को अपना केंद्र बनाकर एक बहुराष्ट्रीय व्यापारिक साम्राज्य खड़ा किया।
रायबहादुर गुजरमल मोदी और औद्योगिक शहर की नींव
गुजरमल मोदी का जन्म पटियाला में हुआ था। उन्होंने महज 400 रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ अपनी व्यावसायिक यात्रा शुरू की थी। 1930 के दशक में उन्होंने मेरठ के पास एक बंजर और गुमनाम इलाके को चुना और वहां पहली शुगर मिल स्थापित की। धीरे-धीरे उन्होंने कपड़ा, वनस्पति तेल, पेंट, साबुन और लालटेन जैसे दैनिक उपभोग के सामान बनाने वाले कारखानों का जाल बिछा दिया।
श्रमिकों और कर्मचारियों के रहने के लिए आधुनिक सुविधाएं, स्कूल, अस्पताल और मंदिर बनवाए गए। इस तेजी से विकसित होते औद्योगिक केंद्र की महत्ता को देखते हुए 1945 में इस स्थान का नाम आधिकारिक तौर पर ‘मोदीनगर‘ रख दिया गया। देश के स्वतंत्रता संग्राम और उसके बाद के शुरुआती वर्षों में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गुजरमल मोदी को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
बी. के. मोदी का आगमन और बिजनेस का मॉडर्नाइजेशन
1970 के दशक में जब गुजरमल मोदी का निधन हुआ, तब मोदी समूह भारत के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में से एक था। उनके बेटे भूपेंद्र कुमार मोदी (बी. के. मोदी) ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका से बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री ली।
परंपरागत पारिवारिक व्यवसाय को संभालने के बजाय, बी. के. मोदी का विजन काफी आधुनिक था। वे समझ चुके थे कि आने वाला समय तकनीक, टेलीकम्युनिकेशन और कंप्यूटिंग का है। उन्होंने मोदी ग्रुप को पारंपरिक विनिर्माण से निकालकर टेक्नोलॉजी और जॉइंट वेंचर्स की दिशा में मोड़ दिया।
वैश्विक दिग्गजों के साथ रणनीतिक साझेदारियां
बी. के. मोदी को भारतीय व्यापार जगत में “जॉइंट वेंचर किंग” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने दुनिया की दिग्गज कंपनियों को भारतीय बाजार में लाने का मार्ग प्रशस्त किया:
- ज़ेरॉक्स (Xerox): 1980 के दशक में उन्होंने मोदी ज़ेरॉक्स (Modi Xerox) की शुरुआत की, जिसने भारत में फोटोकॉपिंग तकनीक की क्रांति ला दी।
- ऑलिवेट्टी (Olivetti): इतालवी कंपनी के साथ मिलकर कंप्यूटिंग और ऑफिस ऑटोमेशन के क्षेत्र में कदम रखा।
- ओब्सी (Modi Telstra): 1995 में ऑस्ट्रेलिया की टेल्स्ट्रा कंपनी के साथ मिलकर भारत में पहली मोबाइल कॉल सेवा (Spic Macay) की शुरुआत करवाई, जिसने देश के दूरसंचार इतिहास में नया अध्याय लिखा।
- कॉन्टिनेंटल टायर्स और ओपेक: ऑटोमोबाइल और कंपोनेंट सेक्टर में वैश्विक तकनीक को भारत से जोड़ा।
सिंगापुर का रुख और स्मार्ट इन्वेस्टमेंट्स
2000 के दशक में पारिवारिक परिसंपत्तियों के पुनर्गठन और वैश्विक व्यापारिक विस्तार के तहत बी. के. मोदी ने अपना मुख्य ध्यान अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर केंद्रित किया। उन्होंने सिंगापुर को अपना कॉर्पोरेट मुख्यालय बनाया और ‘स्मार्ट ग्लोबल होल्डिंग्स’ (Smart Global Group) की स्थापना की।
सिंगापुर की व्यापार-अनुकूल नीतियों और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए बी. के. मोदी ने हेल्थकेयर, रियल एस्टेट, टेलीकॉम, टेक्नोलॉजी और वेलनेस सेक्टर में भारी निवेश किया। सिंगापुर नागरिकता प्राप्त करने के बाद भी वे भारतीय जड़ों से जुड़े रहे और सिंगापुर-भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
| पैरामीटर | विवरण |
| मूल संस्थापक | रायबहादुर गुजरमल मोदी (स्थापना: 1933) |
| वैश्विक विस्तारक | डॉ. भूपेंद्र कुमार मोदी (बी. के. मोदी) |
| अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय | सिंगापुर (स्मार्ट ग्लोबल ग्रुप) |
| प्रमुख क्षेत्र | टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, हेल्थकेयर, रियल एस्टेट |
विरासत और समकालीन पहचान
गुजरमल मोदी द्वारा मोदीनगर की मिट्टी में रोपा गया छोटा सा पौधा आज उनके वंशजों के माध्यम से वैश्विक पहचान बना चुका है। जहां एक ओर मोदीनगर आज भी उत्तर प्रदेश के एक ऐतिहासिक औद्योगिक केंद्र के रूप में दर्ज है, वहीं दूसरी ओर सिंगापुर में खड़ा बी. के. मोदी का अंतरराष्ट्रीय साम्राज्य यह दर्शाता है कि कैसे एक भारतीय कारोबारी परिवार ने खुद को बदलते दौर के साथ ढाला।
बी. के. मोदी की यह कहानी भारतीय उद्यमिता के उस जज्बे को दर्शाती है, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी वैश्विक आसमान को छूने का साहस रखती है।
यह भी पढ़ें: ग्लोबल मार्केट क्रैश: क्या आज फिर टूटेगा भारतीय शेयर बाजार