जनसमाज संवाददाता, मुंबई: 90 के दशक का iconic संगीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खास जगह रखता है। जब भी उस दौर के गानों की बात होती है, तो फिल्म ‘गुलाम’ (1998) का मशहूर रोमांटिक ट्रैक “आंखों से तुमने यह क्या कह दिया” लोगों के जेहन में अपने आप गुनगुनाने लगता है। दिग्गज संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित (Jatin-Lalit) द्वारा कंपोज किया गया और कुमार सानू व अलका याग्निक की मखमली आवाजों में सजा यह गीत आज भी भारतीय संगीत उद्योग की एक अनमोल धरोहर माना जाता है। हालांकि, हाल ही में रिलीज़ हुए इसके नए रीमिक्स वर्जन “आंखों से तुमने 2.0 – भाई तेरा स्टार है” को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मूल गाने के संगीतकार जतिन पंडित ने इस नए रीमिक्स की कड़ी आलोचना की है और इसे पूरी तरह से बिना भावना वाला, यांत्रिक और AI-जनरेटेड (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जैसा करार दिया है।
रीमिक्स कल्चर और ‘आंखों से तुमने 2.0’ पर जताई नाराजगी
हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में, संगीतकार जतिन पंडित ने बिना किसी झिझक के नए रीमिक्स वर्जन पर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि पुराने सदाबहार गानों को आधुनिक बनाने के नाम पर उनके मूल आत्मा और भावों की हत्या की जा रही है। ‘भाई तेरा स्टार है’ (Bhai Tera Star Hai) टाइटल वाले इस नए रीक्रिएशन को सुनते ही जतिन पंडित ने इस पर अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की।
उनका मानना है कि इस रीमिक्स में न तो धुनों की गहराई है और न ही गायकी का वह ठहराव, जो मूल गीत को खास बनाता था। जतिन पंडित ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे इस गाने को किसी इंसान ने दिल से नहीं बनाया, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके मशीन द्वारा तैयार कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयोग केवल संगीत के गिरते स्तर को दर्शाते हैं और इनसे क्लासिक गानों का वजूद कमजोर होता है।
‘गुलाम’ फिल्म के मूल गीत की ‘पवित्रता’ और यादें
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए जतिन पंडित ने 1998 में आई फिल्म ‘गुलाम’ के दौरान इस गाने की रिकॉर्डिंग और निर्माण प्रक्रिया को याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में संगीत बनाना केवल एक व्यावसायिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक साधना थी।
“उस समय जब हमने ‘आंखों से तुमने यह क्या कह दिया’ बनाया था, तो उसमें एक पवित्रता (Purity) थी। हर एक धुन, हर एक वाद्य यंत्र (instrument) का तालमेल और कुमार सानू तथा अलका याग्निक की गायकी में एक रूहानी खिंचाव था। हमने और समीर जी (गीतकार) ने मिलकर इस गाने के हर एक शब्द पर काम किया था। आमिर खान और रानी मुखर्जी पर फिल्माया गया यह गाना भावनाओं से भरपूर था। लेकिन आज के रीमिक्स में से वह भावनाएं, वह ‘पवित्रता’ पूरी तरह से गायब हो चुकी है।”
जतिन पंडित ने जोर देकर कहा कि संगीत में जब तक भावनाएं और मानवीय जुड़ाव नहीं होगा, तब तक वह लोगों के दिलों को लंबे समय तक नहीं छू सकता। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि आजकल के संगीतकार बिना मेहनत के पुराने हिट गानों के हुक स्टेप्स और लिरिक्स उठाकर उनमें बेस (Bass) और रैप जोड़ देते हैं, जिससे गाने की मूल सुंदरता खत्म हो जाती है।
क्या वाकई हावी हो रहा है AI और रीमिक्स ट्रेंड?
संगीत उद्योग में रीमिक्स और रीक्रिएशन का चलन कोई नया नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पुराने क्लासिक गानों को रीमेक करने की होड़ सी मच गई है। जतिन पंडित का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे बॉलीवुड में AI तकनीक और ओरिजिनल म्यूजिक की कमी को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
- भावनाओं की कमी: पुराने संगीतकारों का मानना है कि AI और अत्यधिक ऑटो-ट्यून के इस्तेमाल से गानों में गायकों की वास्तविक भावनाएं दब जाती हैं।
- ओरिजिनेलिटी का अभाव: नए गानों की रचना करने के बजाय स्थापित हिट गानों को रीसायकल करना बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए एक आसान रास्ता बनता जा रहा है।
- श्रोताओं की प्रतिक्रिया: जहां एक तरफ युवा पीढ़ी कुछ समय के लिए इन रीमिक्स गानों पर रील्स और शॉर्ट्स बनाती है, वहीं दूसरी तरफ संगीत के जानकार और क्लासिक गानों के प्रशंसक इस ट्रेंड की लगातार आलोचना कर रहे हैं।
क्लासिक संगीत की सुरक्षा की जरूरत
जतिन पंडित का यह बयान सिर्फ एक रीमिक्स गाने के खिलाफ नाराजगी नहीं है, बल्कि यह पूरे संगीत उद्योग के लिए एक चेतावनी की तरह है। जब तक नए संगीतकार गानों की आत्मा और उनके इतिहास का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक इस तरह के विवाद सामने आते रहेंगे। ‘आंखों से तुमने यह क्या कह दिया’ जैसे गाने समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं क्योंकि उनमें सच्चाई और संगीतकारों की मेहनत छुपी थी। जतिन पंडित के इस सख्त रुख के बाद अब देखना यह होगा कि रीमिक्स बनाने वाले निर्माता और नए दौर के संगीतकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
यह भी पढ़ें: PM मोदी पर विवादित टिप्पणी: 15 साल की रुचिका सिंह ने मांगी माफी