ताजनगरी आगरा में बदलते मौसम और मौसमी संक्रमणों के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगी हैं। शहर से लेकर देहात इलाकों तक घर-घर में लोग बुखार, सूखी और बलगम वाली खांसी, गले में खराश और बदन दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सरोजिनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज की बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। बीते दिन एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में कुल 4,304 नए और पुराने मरीज पहुंचे, जिनमें से लगभग आधे से अधिक मरीज मौसमी बुखार, खांसी, मांसपेशियों में जकड़न और गंभीर सिरदर्द से पीड़ित थे।
अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों के अनुसार, इस समय ओपीडी में आने वाले मरीजों में सबसे आम लक्षण मांसपेशियों में अत्यधिक थकावट व दर्द और सिर में तेज जकड़न महसूस होना है। कई मरीजों में वायरल फीवर के साथ-साथ डेंगू, चिकनगुनिया और टाइफाइड जैसे लक्षणों की संभावना को देखते हुए पैथोलॉजी जांच भी कराई जा रही है।
ओपीडी में मरीजों का तांता, पंजीकरण काउंटरों पर लंबी कतारें
एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन, बाल रोग और चेस्ट विभाग की ओपीडी के बाहर सुबह 8 बजे से ही मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर से परामर्श लेने और दवा वितरण केंद्र तक हर जगह अफरा-तफरी और भारी भीड़ का माहौल बना हुआ है।
अस्पताल के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य दिनों की तुलना में इस समय मौसमी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ओपीडी में पहुंचे 4,304 मरीजों में से अकेले मेडिसिन विभाग में ही 1,500 से अधिक मरीजों ने परामर्श लिया। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने अतिरिक्त काउंटर शुरू किए हैं और डॉक्टरों को अतिरिक्त समय देकर मरीजों को देखने के निर्देश दिए हैं।
मांसपेशियों में तेज दर्द और सिरदर्द बने नए प्रमुख लक्षण
इस बार फैल रहे वायरल इन्फेक्शन में डॉक्टरों ने एक विशेष पैटर्न देखा है। आमतौर पर वायरल बुखार में हल्का बदन दर्द और बुखार होता है, लेकिन इस मौसम में आ रहे मरीजों में मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द (मायलगिया) और सिर में तेज जकड़न प्राथमिक लक्षण बनकर उभर रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार:
- मांसपेशियों का दर्द: मरीज शिकायत कर रहे हैं कि बुखार उतरने के बाद भी हाथों, पैरों, पीठ और जोड़ों में तेज ऐंठन और दर्द बना रहता है, जिससे सामान्य चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है।
- अत्यधिक थकावट: बुखार ठीक होने में 4 से 5 दिन का समय लग रहा है, लेकिन शारीरिक कमजोरी और सुस्ती 10 से 15 दिनों तक बनी रहती है।
- गंभीर सिरदर्द: आंखों के पीछे और माथे में निरंतर भारीपन और दर्द की समस्या देखी जा रही है, जो कई बार डिहाइड्रेशन या लगातार खांसी के कारण बढ़ जाती है।
- लगातार खांसी: बुखार उतर जाने के बावजूद गले में खराश और सूखी खांसी कई हफ्तों तक मरीजों को परेशान कर रही है।
बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर
बदलते तापमान और हवा में नमी की वजह से बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग (पीडियाट्रिक्स) में भी बच्चों की संख्या काफी बढ़ गई है। छोटे बच्चों में तेज बुखार के साथ उल्टी, दस्त और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण भी देखे जा रहे हैं।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में इम्युनिटी कमजोर होने के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है। स्कूल जाने वाले बच्चों में एक-दूसरे से संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है। अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि यदि बच्चे को बुखार या खांसी के लक्षण दिखें, तो उसे स्कूल न भेजें और पर्याप्त आराम कराएं।
इसी तरह बुजुर्गों और पहले से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या सांस की बीमारी (अस्थमा) से पीड़ित मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि मौसमी बुखार इनके लिए गंभीर रूप ले सकता है।
मौसम में बदलाव और प्रदूषण भी एक बड़ा कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिन और रात के तापमान में अंतर तथा हवा की गिरती गुणवत्ता इस बीमारी के तेजी से फैलने का प्रमुख कारण है। दिन के समय तेज धूप और गर्मी रहती है, जबकि रात और तड़के तापमान में गिरावट आ जाती है। इस तापमान परिवर्तन के कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित होती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से शरीर पर हमला कर देते हैं।
इसके अलावा, वातावरण में धूल-मिट्टी और प्रदूषण के कणों की वजह से सांस की नलियों में सूजन आ जाती है, जिससे खांसी और गले का संक्रमण लंबे समय तक ठीक नहीं हो पाता। खान-पान में लापरवाही, ठंडा पानी या फ्रिज का सामान इस्तेमाल करना भी गले में खराश और बुखार को न्योता दे रहा है।
डॉक्टरों की सलाह: खुद से दवा न लें, बरतें ये सावधानियां
स्वास्थ्य विभाग और एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने आम जनता से अपील की है कि वे बुखार या खांसी होने पर मनमाने ढंग से मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक या पेनकिलर गोलियां न खरीदें। बिना डॉक्टरी सलाह के ली गई एंटीबायोटिक दवाएं शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं और इनसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है।
बीमारी से बचाव और देखभाल के मुख्य उपाय:
- पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें: शरीर में पानी की कमी न होने दें। नारियल पानी, गुनगुना पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, और ताजा सूप का सेवन करें।
- गुनगुने पानी से गरारे करें: गले में खराश और दर्द से राहत पाने के लिए दिन में दो से तीन बार नमक डालकर गुनगुने पानी से गरारे करें।
- संतुलित और सुपाच्य भोजन करें: सुपाच्य, ताजा और घर का बना खाना खाएं। बासी भोजन, फास्ट फूड और ज्यादा ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करें।
- खुद से दवाइयां न लें: केवल पैरासिटामोल जैसी सामान्य दवाएं ही प्राथमिक तौर पर लें। यदि बुखार 2-3 दिन से अधिक बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर खून की जांच करवाएं।
- पर्याप्त आराम करें: शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए आराम की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। कम से कम 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लें।
- साफ-सफाई का ध्यान रखें: घर और आसपास जलजमाव न होने दें ताकि मच्छर न पनप सकें। बार-बार हाथ धोएं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का प्रयोग करें।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर
शहर में बीमारियों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और स्वास्थ्य विभाग ने भी अलर्ट जारी किया है। जिला अस्पताल, लेडी लायल और देहात के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर आवश्यक दवाओं, जैसे पैरासिटामोल, एंटी-एलर्जिक और ओआरएस के पैकेट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए सभी विभागों में पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं। नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, केवल सही समय पर डॉक्टरी परामर्श और बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है।
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