गुजरात के दाहोद जिले से एक मामला सामने आया है, जहाँ आपातकालीन सेवाओं के लिए तैनात फायर ब्रिगेड की गाड़ी का इस्तेमाल किसी आगजनी या हादसे को रोकने के लिए नहीं, बल्कि पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक के बंगले की धुलाई के लिए किया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया है।
वायरल वीडियो और पूरा मामला
यह घटना गुजरात के दाहोद जिले के तहत आने वाली देवगढ़ बारिया नगरपालिका और धानपुर तहसील के पीपेरो गांव की बताई जा रही है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि देवगढ़ बारिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक और पूर्व मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के निजी आवास पर फायर ब्रिगेड का वाहन तैनात है।
फायर ब्रिगेड की टीम गाड़ी से हाई-प्रेशर वॉटर होज (पानी के पाइप) के जरिए बंगले के बाहरी हिस्से, दीवारों और आहाते की सफाई और धुलाई कर रही है। जैसे ही स्थानीय लोगों और राहगीरों ने इस नजारे को देखा, किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। देखते ही देखते वीडियो तेजी से प्रसारित हो गया और लोगों ने प्रशासनिक संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
आपातकालीन सेवाओं के इस्तेमाल पर उठे सवाल
फायर ब्रिगेड की मुख्य जिम्मेदारी आग लगने की घटनाओं पर काबू पाना, आपदा राहत कार्यों में मदद करना और आपात स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
वीडियो सामने आने के बाद आम नागरिकों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई सवाल खड़े किए हैं:
- क्या किसी जनप्रतिनिधि या वीआईपी व्यक्ति के निजी घर की धुलाई के लिए इमरजेंसी वाहनों को भेजा जा सकता है?
- यदि धुलाई के दौरान क्षेत्र में कहीं आग लगने की अप्रिय घटना घट जाती, तो आपात स्थिति से निपटने के लिए जिम्मेदार कौन होता?
- क्या स्थानीय निकाय के नियमों के तहत निजी बंगले की सफाई के लिए फायर ब्रिगेड की सेवाएं लेने का कोई प्रावधान है?
प्रशासन की कार्रवाई और फीस की रसीद
वीडियो वायरल होने और मामला गरमाने के बाद देवगढ़ बारिया नगरपालिका प्रशासन हरकत में आया। मामले पर पर्दा डालने और स्थिति को संभालने के लिए नगरपालिका की ओर से तुरंत कदम उठाए गए।
- फीस की वसूली: नगरपालिका अधिकारियों के अनुसार, विधायक बच्चूभाई खाबड़ के बेटे बलवंत खाबड़ के नाम पर ₹2,700 की रसीद काटी गई और शुल्क वसूल किया गया।
- चीफ ऑफिसर का बयान: नगरपालिका के चीफ ऑफिसर ने स्पष्ट किया कि मामले की जानकारी मिलते ही पूरे प्रकरण की समीक्षा की जा रही है और कानूनी व नियमानुसार जांच जारी है।
- जांच का विषय: प्रशासन अब इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या फायर ब्रिगेड वाहन को भेजने की कोई आधिकारिक अनुमति दी गई थी या यह सीधे तौर पर अधिकारों का दुरुपयोग था।
वीआईपी कल्चर को लेकर चर्चाएँ
इस घटना के बाद एक बार फिर सरकारी मशीनरी और वीआईपी कल्चर के इस्तेमाल पर चर्चा शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि बाद में ₹2,700 की रसीद फाड़ देना केवल औपचारिक पूर्ति जैसा दिखता है, जबकि सवाल यह है कि इमरजेंसी सेवाओं को किसी निजी धुलाई कार्य के लिए तैनात ही क्यों किया गया।
फिलहाल, नगरपालिका प्रशासन की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि इस मामले में किसकी लापरवाही थी और क्या संबंधित कर्मचारियों या अधिकारियों पर कोई विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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