विमानन क्षेत्र में सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं होता। जब भी कोई यात्री विमान आसमान में हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा होता है, तो उसकी कमान पूरी तरह से कॉकपिट में बैठे पायलटों के हाथों में होती है। ग्राउंड पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और आसमान में पायलट के बीच का संपर्क ही किसी भी उड़ान की सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है। लेकिन सोचिए, क्या हो जब अचानक एटीसी की स्क्रीन पर पायलट की तरफ से हाईजैकिंग का संकेत यानी ‘Squawk 7500’ कोड फ्लैश होने लगे? ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया, जिसने नागरिक उड्डयन मंत्रालय, सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइन के होश उड़ा दिए। पायलट द्वारा भेजे गए इस एक सिग्नल के बाद हड़कंप मच गया और तुरंत पूरे देश का सुरक्षा तंत्र ‘रेड अलर्ट’ पर आ गया।
आसमान में क्या हुआ था उस वक्त?
विमान ने अपनी निर्धारित समय-सारणी के अनुसार रनवे से सुरक्षित उड़ान भरी थी। शुरुआती कुछ समय तक सब कुछ बिल्कुल सामान्य था। यात्री अपने-अपने सफर का आनंद ले रहे थे, केबिन क्रू यात्रियों की सेवा में व्यस्त था और विमान अपनी तय ऊंचाई और गति पर गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। लेकिन उड़ान के बीच में अचानक कॉकपिट से एटीसी को एक खास ट्रांसपोंडर कोड प्राप्त हुआ। यह कोई सामान्य मैसेज नहीं था, बल्कि यह 7500 कोड था—वह कोड जिसका इस्तेमाल विमानन उद्योग में केवल और केवल ‘हाइजैकिंग’ या विमान के अपहरण की स्थिति में ही किया जाता है।
यह कोड मिलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के पैरों तले जमीन खिसक गई। एटीसी ने बिना एक सेकंड की देरी किए प्रोटोकॉल के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), और संबंधित हवाई अड्डे के सुरक्षा अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी। मिनटों के भीतर सुरक्षा एजेंसियों का एक हाई-लेवल इमरजेंसी रिस्पॉन्स ग्रुप एक्टिवेट हो गया। किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए NSG के कमांडो और सुरक्षा बलों की टीमें तुरंत अलर्ट मोड पर डाल दी गईं।
सुरक्षा एजेंसियों की सांसें अटकीं: इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू
जैसे ही हाईजैक का सिग्नल मिला, देश के उड्डयन सुरक्षा तंत्र ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी। सुरक्षा बलों के लिए यह केवल एक इमरजेंसी मैसेज नहीं था, बल्कि सैकड़ों यात्रियों की जान पर मंडराता हुआ खतरा था। एटीसी ने तुरंत विमान के पायलट से रेडियो फ्रीक्वेंसी पर संपर्क साधने की कोशिश की, ताकि स्थिति की गंभीरता और कॉकपिट के अंदर के हालात का सही अंदाजा लगाया जा सके।
इसी दौरान, विमान को नजदीकी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर डायवर्ट करने का निर्णय लिया गया। जिस एयरपोर्ट पर विमान की लैंडिंग कराई जानी थी, वहां पलक झपकते ही ‘आइसोलेशन बे’ (Isolation Bay) तैयार कर लिया गया। आइसोलेशन बे हवाई अड्डे का वह दूर-दराज का हिस्सा होता है, जो मुख्य टर्मिनल, अन्य विमानों और यात्रियों से काफी दूरी पर स्थित होता है। इसे इसलिए चुना जाता है ताकि अगर विमान में कोई बम या हथियारबंद अपहरणकर्ता मौजूद हो, तो बाकी एयरपोर्ट परिसर और आम लोगों को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके।
हवाई अड्डे पर एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (QRT) की कतारें लग गईं। रनवे के चारों ओर स्निपर और कमांडो तैनात कर दिए गए। माहौल ऐसा हो गया था मानो किसी भी क्षण कोई बड़ा ऑपरेशन शुरू करना पड़ सकता है।
आखिर कहां और कैसे हुई विमान की लैंडिंग?
एटीसी और सुरक्षा एजेंसियों के लगातार मार्गदर्शन के बीच पायलट ने बेहद सूझबूझ और धैर्य के साथ विमान को सुरक्षित रूप से उस निर्दिष्ट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर मोड़ा। ग्राउंड पर सभी की नजरें आसमान की ओर टिकी हुई थीं। कुछ ही देर में विमान ने आपातकालीन स्थिति में आइसोलेशन बे में सुरक्षित लैंडिंग की।
विमान के रनवे पर उतरते ही भारी हथियारों से लैस कमांडो और सुरक्षा बलों की टीमों ने बिना समय गंवाए विमान को चारों तरफ से घेर लिया। पूरा इलाका सील कर दिया गया और रनवे पर पूरी तरह से सन्नाटा छा गया। यात्रियों को अंदर ही अपनी-अपनी सीटों पर बैठे रहने के सख्त निर्देश दिए गए। सुरक्षा एजेंसियों का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि केबिन के अंदर यात्रियों को कोई नुकसान न पहुंचे और अगर कोई संदिग्ध या अपहरणकर्ता मौजूद है, तो उसे तुरंत बेअसर किया जा सके।
सर्च ऑपरेशन और चौंकाने वाला खुलासा
विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद सुरक्षा बल पूरी तैयारी के साथ विमान के भीतर दाखिल हुए। पूरे केबिन, कॉकपिट, यात्रियों के सामान और कार्गो होल्ड की गहन जांच (Comprehensive Security Check) शुरू की गई। हर एक यात्री और क्रू मेंबर की पहचान की पुष्टि की गई। लेकिन कुछ ही देर में जांच टीमों के सामने जो सच्चाई आई, उसने सभी को हैरान भी किया और एक बहुत बड़ी राहत भी दी।
जांच में सामने आया कि विमान के अंदर कोई भी हथियारबंद हमलावर या अपहरणकर्ता मौजूद नहीं था। किसी भी यात्री या क्रू मेंबर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। वास्तव में, हाईजैक की कोई कोशिश हुई ही नहीं थी।
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