एशियाई खेल 2026 में भारतीय महिला स्कीट टीम की ऐतिहासिक सफलता के बाद स्टार निशानेबाज महेश्वरी चौहान ने अपनी खट्टी-मीठी भावनाओं और टीम के सफर को साझा किया है। जापान के आईची-नगोया में आयोजित 20वें एशियाई खेलों में महेश्वरी चौहान, रायज़ा ढिल्लों और परीनाज़ धालीवाल की तिकड़ी ने महिला स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। एशियाई खेलों के इतिहास में महिला स्कीट स्पर्धा में भारत का यह पहला पदक है।
इस ऐतिहासिक जीत के बाद महेश्वरी चौहान ने रेंज की कठिन परिस्थितियों, टीम वर्क, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के सहयोग और भविष्य की उम्मीदों पर विस्तार से चर्चा की।
एशियाई खेल 2026: महिला स्कीट टीम स्पर्धा के मुख्य आंकड़े
| श्रेणी | विवरण / अंक |
|---|---|
| प्रतियोगिता | एशियाई खेल 2026 (आईची-नगोया, जापान) |
| स्पर्धा | महिला स्कीट टीम इवेंट |
| भारतीय टीम | महेश्वरी चौहान, रायज़ा ढिल्लों, परीनाज़ धालीवाल |
| भारत का कुल स्कोर | 331 अंक (कांस्य पदक) |
| व्यक्तिगत योगदान | रायज़ा ढिल्लों (111/125), परीनाज़ धालीवाल (111/125), महेश्वरी चौहान (109/125) |
| स्वर्ण पदक विजेता | चीन (346 अंक) |
| रजत पदक विजेता | कजाकिस्तान (336 अंक) |
“टीम वर्क से मिला पदक, लेकिन हम रंग से पूरी तरह संतुष्ट नहीं”: महेश्वरी
मुकाबले के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए महेश्वरी चौहान ने कहा कि पोडियम पर खड़े होना हमेशा गर्व की बात होती है, लेकिन टीम स्वर्ण या रजत पदक की उम्मीद कर रही थी।
“मैं खुद को बहुत भाग्यशाली और खुश महसूस कर रही हूं कि हम पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा हैं। यह एक बेहतरीन टीम प्रयास था जिसकी बदौलत हम पोडियम तक पहुंच सके। हालांकि यह हमारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं था और शूटिंग रेंज की परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन मुझे खुशी है कि हमने कड़ा मुकाबला किया। हम पदक के रंग से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन देश के लिए पदक लेकर लौटने की खुशी जरूर है।” — महेश्वरी चौहान
भारतीय टीम ने कुल 331 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। रायज़ा और परीनाज़ ने 125 में से 111-111 अंक जुटाए, जबकि अनुभवी महेश्वरी ने 109 अंकों का योगदान देकर कांस्य पदक पक्का किया।
कठिन परिस्थितियां और शूटिंग रेंज की चुनौतियां
जापान के आईची प्रीफेक्चरल जनरल शूटिंग गैलरी में आयोजित यह स्पर्धा शूटरों के लिए आसान नहीं थी। हवा के रुख और रेंज के माहौल ने निशानेबाजों की परीक्षा ली। महेश्वरी ने स्वीकार किया कि दबाव के क्षणों में टीम ने एकजुटता दिखाई।
महेश्वरी ने कहा कि शॉटगन शूटिंग में मामूली चूक भी बड़े अंतर पैदा कर देती है। भले ही व्यक्तिगत स्पर्धाओं में कुछ निशानेबाज फाइनल के दबाव को पदक में न बदल पाए हों, लेकिन टीम स्पर्धा में प्रत्येक शॉट ने भारत के पदक के अंतर को बनाए रखने में मदद की।
भारतीय शूटिंग दल की क्षमता पर जताया भरोसा
निशानेबाजी में भारत के प्रदर्शन पर बात करते हुए महेश्वरी ने कहा कि भारतीय निशानेबाजी दल महाद्वीप के सबसे मजबूत दलों में से एक है।
- अनुभव और युवा ऊर्जा का मेल: टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ उभरती हुई प्रतिभाएं मौजूद हैं जो अंतरराष्ट्रीय दबाव को झेलने में सक्षम हैं। Indiatimes
- खेल का हिस्सा हैं हार-जीत: महेश्वरी के अनुसार, खेल में जीत और हार चलती रहती है, लेकिन भारतीय शूटरों का स्तर ऐसा है कि उनसे हर प्रतियोगिता में पदक की उम्मीद करना जायज है। Indiatimes
- आगामी स्पर्धाओं से उम्मीदें: उन्होंने उम्मीद जताई कि पिस्टल और राइफल स्पर्धाओं के साथ-साथ मिक्स टीम इवेंट्स में भी भारतीय एथलीट और पदक जोड़ेंगे। Indiatimes
SAI और बुनियादी ढांचे का अहम योगदान
शॉटगन शूटिंग बेहद महंगा और तकनीकी खेल माना जाता है। महेश्वरी ने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और खेल मंत्रालय द्वारा दिए जा रहे वित्तीय व तकनीकी सहयोग की जमकर सराहना की।
- महंगे उपकरणों और एम्युनिशन की उपलब्धता: शॉटगन शूटिंग में गन, क्ले टारगेट और गोलियों का खर्च काफी अधिक होता है। सरकारी मदद के बिना इसे जारी रखना कठिन है।
- विदेशी कोच और ट्रेनिंग कैंप: विश्वस्तरीय विदेशी प्रशिक्षकों और खेल वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन से भारतीय एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। Indiatimes
- मजबूत नींव: महेश्वरी ने स्पष्ट किया कि आज जो परिणाम दिख रहे हैं, वे पिछले कुछ वर्षों में तैयार की गई मजबूत नींव का ही नतीजा हैं।
भारतीय शॉटगन शूटिंग का उज्ज्वल भविष्य
यह ऐतिहासिक कांस्य पदक भारत में महिला स्कीट शूटिंग के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है। पहले जहां भारत का दबदबा मुख्य रूप से राइफल और पिस्टल स्पर्धाओं तक सीमित रहता था, वहीं अब शॉटगन (स्कीट और ट्रैप) में भी भारतीय एथलीट एशियाई और विश्व स्तर पर पोडियम फिनिश हासिल कर रहे हैं।
महेश्वरी चौहान का मानना है कि इस जीत से देश की युवा महिला शूटरों को प्रेरणा मिलेगी और आने वाले समय में ओलंपिक तथा विश्व चैंपियनशिप जैसे मंचों पर भारत के पदकों की संख्या में भारी इजाफा होगा।
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