मेरठ होमगार्ड भर्ती में तीसरी मौत: वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग हारे शामली के सचिन

जनसमाज संवाददाता, मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में आयोजित होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया से एक बेहद दुखद और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने वाली खबर सामने आई है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान शारीरिक दक्षता परीक्षा (दौड़) में हिस्सा लेने आए शामली जिले के निवासी युवा अभ्यर्थी सचिन ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। शारीरिक परीक्षण की भीषण दौड़ के दौरान अचानक सचिन की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अत्यंत गंभीर हालत में मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले कई दिनों से वे वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस दुखद घटना के सामने आने के बाद न केवल मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाली विभिन्न भर्ती रैलियों की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

शामली के रहने वाले थे सचिन, सरकारी नौकरी का सपना लेकर आए थे मेरठ

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक अभ्यर्थी सचिन उत्तर प्रदेश के शामली जिले के एक साधारण परिवार के रहने वाले थे। अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने और देश व समाज की सेवा करने के जज्बे के साथ उन्होंने होमगार्ड भर्ती के लिए आवेदन किया था। मेरठ के पुलिस लाइन/खेल स्टेडियम में आयोजित होमगार्ड भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के तहत दौड़ में भाग लेने के लिए वे पूरी तैयारी और उम्मीदों के साथ पहुंचे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, निर्धारित समय पर जब दौड़ शुरू कराई गई, तब सचिन भी अन्य अभ्यर्थियों के साथ पूरी ताकत से मैदान में उतरे थे। हालांकि, दौड़ के अंतिम चरणों में अचानक उनकी सांस फूलने लगी, चक्कर आने लगे और वे बेहोश होकर ट्रैक पर गिर पड़े। मैदान में तैनात मेडिकल टीम और प्रशासनिक कर्मियों ने तुरंत उन्हें प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन जब स्थिति अनियंत्रित और नाजुक दिखाई दी, तो उन्हें तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में शुरुआती जांच के दौरान ही डॉक्टरों ने पाया कि सचिन के शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर अत्यधिक शारीरिक तनाव और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) या हीट स्ट्रोक का असर पड़ा था। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू (ICU) में शिफ्ट कर वेंटिलेटर पर रखा था। लगभग कई दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद भी सचिन के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ और अंततः उन्होंने अंतिम सांस ली।

भर्ती रैली में मौतों का सिलसिला: तीसरी घटना से मचा हड़कंप

मेरठ में चल रही इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी अभ्यर्थी की मौत का यह पहला मामला नहीं है। सचिन की मौत के साथ ही इस होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया में जान गंवाने वाले युवाओं की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। एक ही भर्ती रैली के दौरान लगातार तीन अभ्यर्थियों की मौत की खबर ने प्रशासन, पुलिस विभाग और गृह विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

इससे पूर्व भी दो अन्य अभ्यर्थी इसी शारीरिक परीक्षा के दौरान अत्यधिक थकान, दम घुटने या अचानक आए कार्डियक अरेस्ट/हीट स्ट्रोक की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। लगातार हो रही इन दुखद घटनाओं के कारण भर्ती में भाग लेने आ रहे अन्य अभ्यर्थियों के बीच भी भय और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है। एक के बाद एक हुई तीन मौतों ने इस बात की ओर कड़ा इशारा किया है कि क्या भर्ती प्रक्रिया के दौरान मैदान पर बुनियादी सुविधाओं, मौसम की स्थिति और अभ्यर्थियों की मेडिकल स्क्रीनिंग को लेकर कोई बड़ी चूक हुई है?

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल

सचिन की मौत की सूचना मिलते ही शामली से पहुंचे उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में जैसे ही सचिन के निधन की खबर पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का कहना है कि सचिन बिल्कुल स्वस्थ और तंदरुस्त थे तथा पिछले काफी समय से नियमित रूप से दौड़ का अभ्यास कर रहे थे। परिवार के लोगों ने आरोप लगाया है कि भर्ती स्थल पर अभ्यर्थियों के लिए पर्याप्त पानी, छाया और तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का अभाव था।

स्थानीय लोगों और मृतक के परिजनों का सवाल है कि:

  1. गर्मी और उमस का प्रबंधन: क्या भीषण गर्मी या प्रतिकूल मौसम के बावजूद अभ्यर्थियों से अत्यधिक शारीरिक श्रम कराया जा रहा था?
  2. चिकित्सा जांच की कमी: क्या दौड़ शुरू होने से पहले अभ्यर्थियों का कोई बुनियादी स्वास्थ्य परीक्षण (जैसे ब्लड प्रेशर, पल्स रेट आदि) नहीं किया गया था?
  3. आपातकालीन प्रतिक्रिया: मैदान पर मौजूद मेडिकल एम्बुलेंस और पैरामेडिकल स्टाफ की तैयारी किस स्तर की थी?

परिजनों ने शासन और प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, साथ ही पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे और आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।

प्रशासन और पुलिस विभाग की प्रतिक्रिया

इस दुखद घटना के बाद पुलिस व होमगार्ड विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया और अस्पताल पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों ने परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रशासन की तरफ से हर संभव मदद मुहैया कराई जा रही है।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि दौड़ के दौरान सभी आवश्यक मेडिकल टीमें और एम्बुलेंस भर्ती स्थल पर तैनात थीं। अधिकारियों का यह भी तर्क है कि अभ्यर्थियों को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही दौड़ में भाग लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि, भर्ती के दौरान हुई लगातार तीन मौतों के बाद अब वरिष्ठ अधिकारियों ने शारीरिक परीक्षा के समय, व्यवस्थाओं और मेडिकल प्रोटोकॉल की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

भर्ती रैलियों में युवाओं की सुरक्षा पर उठते बड़े सवाल

सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओं का आकर्षण और बेरोजगारी का दबाव अक्सर अभ्यर्थियों को अपनी शारीरिक सीमाओं से परे जाने के लिए मजबूर कर देता है। कई बार पर्याप्त पोषण, सही गाइडेंस या पानी की कमी के बावजूद युवा कड़ी धूप में अपनी पूरी जान झोंक देते हैं, जिससे उनके शरीर में आरएमडी (Rhabdomyolysis), हीट स्ट्रोक या सडन कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति बन जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की त्रासदी से बचने के लिए भर्ती बोर्ड को निम्नलिखित कदम उठाने अनिवार्य होने चाहिए:

  • मौसम का ध्यान रखना: कड़े शारीरिक परीक्षणों को सुबह-तड़के (भोर में) या तापमान कम होने पर ही आयोजित किया जाए।
  • हाइड्रेशन स्टेशन: दौड़ के पूरे ट्रैक पर हर कुछ दूरी पर पर्याप्त पानी और ओआरएस (ORS) की व्यवस्था हो।
  • पूर्व-स्वास्थ्य जांच: दौड़ में भाग लेने से ठीक पहले अभ्यर्थियों के बुनियादी वाइटल्स (Vital Signs) की जांच की व्यवस्था की जाए।
  • जागरूकता अभियान: अभ्यर्थियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि शरीर में अत्यधिक असुविधा होने पर वे जबरन दौड़ पूरी करने के बजाय तुरंत रुक जाएं।

शामली के सचिन की असमय मौत ने उनके परिवार के सपनों को हमेशा के लिए तोड़ दिया है। मेरठ की इस होमगार्ड भर्ती में हुई यह तीसरी मौत शासन और भर्ती बोर्ड के लिए एक सख्त चेतावनी है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ युवाओं की जिंदगी और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

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  • Rahul Kaushik

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