बिहार के भागलपुर से दर्दनाक खबर: अजगैवीनाथ धाम में गंगा के बाढ़ के पानी में नहाने गईं 6 मासूम बच्चियों की डूबने से मौत

बिहार के भागलपुर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सुल्तानगंज स्थित अजगैवीनाथ धाम से एक बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ गंगा नदी में आए बाढ़ के पानी में स्नान करने गईं छह मासूम बच्चियों की गहरे पानी में जाने के कारण डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम मौके पर पहुँची और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद सभी बच्चियों के शवों को पानी से बाहर निकाल लिया गया है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे भागलपुर जिले को झकझोर कर रख दिया है।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ मंदिर घाट के समीप घटी। पिछले कुछ दिनों से गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके कारण नदी का पानी मैदानी इलाकों, निचले घाटों और आसपास के गड्ढों में तेजी से भर गया है।

रविवार/सोमवार की सुबह गाँव की कई बच्चियाँ एक साथ घाट के किनारे फैले इसी बाढ़ के पानी में नहाने और खेलने के लिए गई थीं। शुरुआत में पानी कम गहरा लग रहा था, जिसके कारण बच्चियाँ बेफिक्र होकर नहाने लगीं। लेकिन नहाते-नहाते वे अनजाने में किनारे से थोड़ा आगे चली गईं, जहाँ पानी का बहाव तेज था और एक बड़ा व गहरा गड्ढा बना हुआ था। एक बच्ची का पैर फिसलने के कारण वह गहरे पानी में समाने लगी। उसे डूबता देख बाकी बच्चियों ने एक-दूसरे को बचाने की कोशिश की। लेकिन पानी का बहाव और गहराई इतनी अधिक थी कि एक-एक करके सभी छह बच्चियाँ उसमें समाती चली गईं और किसी को भी सँभलने का मौका नहीं मिला।

चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीण, पर तब तक हो चुकी थी देर

घाट के आसपास मौजूद कुछ चरवाहों और स्थानीय लोगों ने जब बच्चियों को पानी में हाथ-पाँव मारते और डूबते देखा, तो उन्होंने तुरंत शोर मचाया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों और घरों से बड़ी संख्या में ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुँचे।

कुछ साहसी स्थानीय युवकों ने तुरंत पानी में छलांग लगाकर बच्चियों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी का तेज बहाव और गहराई के कारण उन्हें ढूँढने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। काफी प्रयास के बाद ग्रामीणों ने जब तक बच्चियों को पानी से बाहर निकाला, तब तक उनकी साँसें थम चुकी थीं। छहों मासूमों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। एक साथ छह बच्चों की मौत की खबर फैलते ही घाट पर हड़कंप मच गया और देखते ही देखते सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।

मृतक बच्चियों की पहचान और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

घटना के बाद गाँव में पूरी तरह से सन्नाटा और मातम पसर गया है। मृतका बच्चियों की उम्र लगभग 8 से 14 वर्ष के बीच बताई जा रही है। ये सभी आपस में सहेलियाँ थीं और स्थानीय गाँव की ही रहने वाली थीं।

जैसे ही हादसे की खबर बच्चियों के घर पहुँची, परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रोते-बिलखते माता-पिता और परिजन नंगे पैर घाट की ओर दौड़े। अपनी जिगर के टुकड़ों के बेजान शरीरों को देखकर माताओं का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं पूरे गाँव में चूल्हा तक नहीं जला। हर किसी की आँखों में आँसू थे और माहौल पूरी तरह से गमगीन हो गया।

सूचना मिलते ही पहुँचा प्रशासन, SDRF ने संभाला मोर्चा

स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना तुरंत पुलिस और अंचलाधिकारी (CO) को दी। सूचना मिलते ही सुल्तानगंज थाना पुलिस, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और एसडीआरएफ की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुँची।

प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया और तुरंत कागजी कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने सभी छह शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल (JLNMCH) भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।

स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और इस कठिन समय में हरसंभव सरकारी मदद पहुँचाने का आश्वासन दिया।

सरकारी मुआवजे का ऐलान और प्रशासनिक आश्वासन

घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग तुरंत हरकत में आ गया है। अंचलाधिकारी ने बताया कि आपदा प्रबंधन के नियमों के तहत पीड़ित परिवारों को अनुग्रह राशि (मुआवजा) प्रदान की जाएगी।

सरकारी प्रावधानों के अनुसार, प्राकृतिक आपदा या डूबने से हुई मौत के मामले में प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का नियम है। अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही अनुग्रह राशि का चेक पीड़ित परिवारों को सौंप दिया जाएगा।

बाढ़ के मौसम में प्रशासन की अपील और चेतावनियाँ

इस दर्दनाक हादसे के बाद भागलपुर जिला प्रशासन ने एक बार फिर आम जनता और खासकर अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की है।

  1. गंगा के जलस्तर पर नज़र: मानसून के मौसम में गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में अनियंत्रित बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में नदियों, झीलों और बाढ़ के पानी के पास जाना जानलेवा साबित हो सकता है।
  2. बच्चों पर रखें विशेष नजर: प्रशासन ने सभी अभिभावकों से सख्त अपील की है कि वे अपने छोटे बच्चों को किसी भी हाल में बाढ़ के पानी, गड्डों या नदी घाटों के पास अकेले न जाने दें।
  3. असुरक्षित घाटों का न करें प्रयोग: अजगैवीनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में कई जगह गहराई का सही अंदाजा नहीं मिल पाता। इसलिए केवल चिन्हित और सुरक्षित घाटों पर ही जाने की सलाह दी गई है।

गाँव में पसरा मातम, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस भयानक त्रासदी के बाद सुल्तानगंज और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई है। जहाँ एक तरफ परिजन अपने बच्चों के खोने के गम में डूबे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति थोड़ा आक्रोश भी देखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब बाढ़ का पानी मैदानी इलाकों में फैल रहा है, तो खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए थे। यदि समय रहते खतरनाक गड्ढों को चिन्हित कर वहाँ जाने से रोका गया होता, तो शायद इन छह मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।

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  • Rahul Kaushik

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