देव शर्मा को ‘रामायण’ और ‘आदिपुरुष’ से क्यों किया गया बाहर?

भारतीय मनोरंजन उद्योग और खासकर पौराणिक फिल्मों के गलियारों में कास्टिंग की प्रक्रिया हमेशा से उत्सुकता का विषय रही है। किसी भी बड़े बजट की फिल्म में कलाकारों का चुनाव केवल उनके अभिनय कौशल पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उनका शारीरिक लुक, स्क्रीन प्रेजेंस और साथी कलाकारों के साथ उनका संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। हाल ही में फिल्म ‘यारियां’ फेम अभिनेता देव शर्मा ने अपने करियर से जुड़े कुछ बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। देव शर्मा का दावा है कि उन्हें भारतीय सिनेमा की दो सबसे चर्चित और महाकाय बजट वाली पौराणिक फिल्मों—’आदिपुरुष’ और नितेश तिवारी की आगामी ‘रामायण’—का हिस्सा बनने का मौका मिला था, लेकिन अपनी अद्वितीय शारीरिक कद-काठी के कारण वह इन दोनों ही बड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर हो गए।

प्रभास जितना विशाल ढांचा और ‘आदिपुरुष’ का ऑडिशन

ओम राउत के निर्देशन में बनी फिल्म ‘आदिपुरुष’ अपने निर्माण के समय से ही सुर्खियों में रही है। इस फिल्म में दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास ने भगवान राम (राघव) की भूमिका निभाई थी। देव शर्मा के अनुसार, ‘आदिपुरुष’ के निर्माण के दौरान उन्हें एक महत्वपूर्ण भूमिका के लिए संपर्क किया गया था। वह इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित थे और उन्होंने इसके लिए ऑडिशन भी दिया था।

कास्टिंग टीम और निर्देशक ने उनके अभिनय की सराहना की, लेकिन जब बात शारीरिक अनुपात की आई, तो एक अलग ही चुनौती सामने खड़ी हो गई। देव शर्मा की शारीरिक बनावट और कद-काठी (फिजिक) प्रभास की तरह ही बेहद विशाल और भारी-भरकम है। फिल्म के दृश्य निर्माण (विजुअल कंपोजिशन) के नियमों के अनुसार, जब पर्दे पर मुख्य नायक उपस्थित होता है, तो उसका स्क्रीन प्रेजेंस सबसे अलग और प्रभावशाली दिखना चाहिए। यदि मुख्य अभिनेता के बगल में खड़ा कलाकार भी उसी के समान विशालकाय और समान ऊंचाई का होगा, तो मुख्य चरित्र का प्रभाव कम होने का जोखिम रहता है। देव शर्मा का कहना है कि इसी कारण से, प्रभास जैसी विशाल कद-काठी होने के बावजूद या यूं कहें कि उसी के कारण, उन्हें इस फिल्म में शामिल नहीं किया जा सका।

रणबीर कपूर से ज्यादा लंबाई बनी ‘रामायण’ में रुकावट

‘आदिपुरुष’ के बाद, देव शर्मा को निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित और भव्य फिल्म ‘रामायण’ के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण किरदार के लिए विचारित किया गया था। इस फिल्म में बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर मुख्य भूमिका (भगवान राम) निभा रहे हैं। इस विशाल बजट वाली फिल्म के लिए भी देव शर्मा की स्क्रीन टेस्टिंग और शुरुआती बातचीत हुई थी।

हालांकि, यहां भी उनकी शारीरिक ऊंचाई उनके लिए एक अप्रत्याशित बाधा बन गई। देव शर्मा की लंबाई रणबीर कपूर से अधिक है। किसी भी दृश्य के फ्रेमिंग में, विशेष रूप से जब बात पौराणिक पात्रों की हो, मुख्य नायक को अन्य पात्रों की तुलना में अधिक भव्य और प्रभावशाली दिखाना एक स्थापित सिनेमाई परंपरा रही है। यदि कोई अन्य पात्र मुख्य नायक से कद में काफी बड़ा या लंबा दिखाई देता है, तो इससे पर्दे का दृश्य संतुलन बिगड़ सकता है। कास्टिंग टीम का मानना था कि देव शर्मा की अधिक लंबाई के कारण फ्रेम में रणबीर कपूर के साथ उनका दृश्य संतुलन (विजुअल बैलेंस) सही नहीं बैठ रहा था। यही कारण रहा कि एक बेहतरीन अवसर हाथ में होने के बावजूद उन्हें इस प्रोजेक्ट से भी पीछे हटना पड़ा।

सिनेमा में शारीरिक बनावट का गणित और अभिनेताओं की चुनौती

देव शर्मा के इन खुलासों ने फिल्म उद्योग में कास्टिंग की जटिलताओं पर एक नई चर्चा शुरू कर दी है। अक्सर यह माना जाता है कि एक अच्छी बॉडी, बेहतरीन कद-काठी और आकर्षक व्यक्तित्व किसी भी अभिनेता के लिए सफलता की कुंजी होते हैं। लेकिन देव शर्मा का अनुभव यह दर्शाता है कि कभी-कभी यही सकारात्मक पहलू किसी विशिष्ट भूमिका के लिए नकारात्मक भी साबित हो सकते हैं।

सिनेमाई भाषा में इसे ‘फ्रेम कंपोजिशन’ या ‘विजुअल हायरार्की’ कहा जाता है। जब कोई निर्देशक किसी महाकाव्य पर आधारित फिल्म बनाता है, तो वह हर एक फ्रेम को बहुत बारीकी से डिजाइन करता है। मुख्य पात्र का प्रभाव पर्दे पर सबसे ऊपर होना चाहिए। यदि सहयोगी कलाकार या अन्य पात्र मुख्य अभिनेता से अधिक लंबे या अधिक चौड़े दिखाई देते हैं, तो दर्शक का ध्यान भटक सकता है। यही वजह है कि हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक, कई बार बेहतरीन कलाकारों को केवल उनकी अत्यधिक ऊंचाई या अलग शारीरिक बनावट के कारण अस्वीकार कर दिया जाता है।

देव शर्मा का दृष्टिकोण और भावी योजनाएं

इन बड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर होने के बावजूद देव शर्मा निराश नहीं हैं। उनका मानना है कि एक अभिनेता के रूप में रिजेक्शन (अस्वीकृति) उनके काम का एक हिस्सा है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक अनुभव के रूप में लिया है कि उन्हें इतने बड़े प्रोजेक्ट्स और दिग्गजों के साथ विचार किए जाने योग्य समझा गया।

देव शर्मा का कहना है कि उनकी कद-काठी और अभिनय क्षमता उनके लिए भविष्य में नई और अनूठी संभावनाओं के द्वार खोलेगी। वह ऐसे किरदारों की तलाश में हैं जो उनकी इस अनोखी शारीरिक उपस्थिति का सही इस्तेमाल कर सकें, जैसे कि एक्शन, बायोपिक या मुख्य धारा की थ्रिलर फिल्में। उनका मानना है कि सही समय पर सही भूमिका उनके पास जरूर आएगी, जहां उनकी यह विशाल कद-काठी उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर पर्दे पर उभरेगी।

देव शर्मा का यह अनुभव यह साबित करता है कि अभिनय की दुनिया केवल प्रतिभा तक सीमित नहीं है; इसमें तकनीक, कैमरे का दृष्टिकोण और साथी कलाकारों के साथ सामंजस्य जैसी कई सूक्ष्म चीजें शामिल होती हैं। ‘आदिपुरुष’ और ‘रामायण’ जैसे बड़े मंचों से चूकने के बावजूद, देव शर्मा का सकारात्मक दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि वह आने वाले समय में अपने इस अनोखे व्यक्तित्व के दम पर भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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  • Rashika Sharma

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