पाकिस्तान के अशांत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांत बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों और पाकिस्तानी सेना के बीच संघर्ष एक बेहद गंभीर और आक्रामक मोड़ पर पहुंच गया है। बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे प्रमुख विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसने पिछले तीन महीनों के दौरान एक व्यापक और सुनियोजित सैन्य अभियान चलाते हुए पाकिस्तानी सेना की 14 से अधिक चौकियों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया है।
BLA के अनुसार, इन चौकियों पर नियंत्रण हासिल करने के बाद उन्हें पूरी तरह से तबाह कर दिया गया और वहां मौजूद अत्याधुनिक हथियारों, गोला-बारूद तथा सैन्य उपकरणों को जब्त कर लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान के सैन्य हलकों और केंद्र सरकार में हड़कंप मच गया है।
वीडियो फुटेज जारी कर बलूच संगठन ने मजबूत किया दावा
अपने दावों को साबित करने के लिए बलूच लिबरेशन आर्मी ने सोशल मीडिया और अपने आधिकारिक संचार माध्यमों पर कुछ वीडियो फुटेज और तस्वीरें भी जारी की हैं।
- वीडियो में दृश्य: फुटेज में BLA के हथियारबंद लड़ाके पाकिस्तानी सेना की सीमांत और पहाड़ी चौकियों पर कब्जा जमाते हुए नजर आ रहे हैं।
- तबाही के सबूत: कई चौकियों को पूरी तरह से जलाकर राख या विस्फोटकों से ध्वस्त करते देखा जा सकता है।
- हथियारों का जखीरा: बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा छोड़े गए स्वचालित हथियारों, संचार प्रणालियों (वायरलेस सेट) और गोला-बारूद को अपने कब्जे में लेते दिख रहे हैं।
संगठन का कहना है कि ये सभी अभियान बेहद गोपनीय और रणनीतिक तरीके से चलाए गए थे, जिससे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को संभलने या जवाबी कार्रवाई का मौका नहीं मिला। हालांकि, निष्पक्ष पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि इलाके में मीडिया पर लगे कड़े प्रतिबंधों के कारण इन वीडियो और दावों की तारीख व स्थान की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
किन इलाकों में हुई कार्रवाई और कितना हुआ नुकसान?
BLA द्वारा जारी बयान के अनुसार, ये हमले और कब्जे बलूचिस्तान के अलग-अलग दुर्गम तथा संवेदनशील इलाकों में किए गए। इनमें क्वेटा-तफ्तान व्यापार मार्ग से सटे इलाके, बोलान, मश्केल, लसबेला और केच जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं।
संगठन ने कहा है कि कब्जा की गई चौकियों का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना स्थानीय बलूच नागरिकों पर नजर रखने और विद्रोही गतिविधियों को दबाने के लिए कर रही थी। BLA के मुख्य प्रवक्ता जीयंद बलूच ने एक बयान में कहा कि बलूचिस्तान की धरती पर पाकिस्तानी सेना का कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह हमला उसी कब्जे के खिलाफ जारी सशस्त्र संघर्ष का हिस्सा है।
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकार की प्रतिक्रिया
इस बड़े दावे के सामने आने के बाद पाकिस्तानी सेना के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) या पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। हमेशा की तरह, पाकिस्तानी सेना अक्सर अपने सैन्य नुकसान और चौकियों पर कब्जे की खबरों को दबाने या कम करके दिखाने की कोशिश करती है।
हालांकि, सूत्रों के मुताबिक बलूचिस्तान के मुख्य राजमार्गों और सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी सेना ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। संदिग्ध इलाकों में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं और अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को मौके पर भेजा जा रहा है।
चीन के प्रोजेक्ट्स और आर्थिक हितों पर मंडराता खतरा
बलूच लिबरेशन आर्मी की बढ़ती आक्रामकता ने केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चीन की नींद भी उड़ा दी है।
- CPEC प्रोजेक्ट पर असर: बलूचिस्तान ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे’ (CPEC) का केंद्र बिंदु है, जिसके तहत ग्वादर बंदरगाह से लेकर सड़कों और खनिज परियोजनाओं में चीन ने अरबों डॉलर का निवेश किया है।
- खनन परियोजनाओं पर हमले: हाल ही में BLA ने मश्केल इलाके में लिथियम और अन्य खनिज खोज स्थलों पर हमले कर चीनी व पाकिस्तानी मशीनरी को आग के हवाले कर दिया था।
- आर्थिक नाकाबंदी की चेतावनी: BLA ने साफ कर दिया है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में शामिल किसी भी विदेशी कंपनी या देश को बख्शा नहीं जाएगा।
बलूचिस्तान संघर्ष का ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान स्थिति
बलूचिस्तान में स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग दशक पुरानी है। 1947 में पाकिस्तान के निर्माण के बाद से ही बलूच लोग केंद्र सरकार पर उनके प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस, सोना, तांबा और लिथियम) के आर्थिक शोषण और मानवाधिकार उल्लंघनों का आरोप लगाते रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में BLA के ‘मजीद ब्रिगेड’ और ‘फतेह स्क्वाड’ जैसे विशेष दस्तों ने अपने हमलों की तीव्रता और सटीकता बढ़ा दी है। 14 चौकियों पर कब्जे का यह नया दावा यह दर्शाता है कि पाकिस्तानी सेना का बलूचिस्तान के ग्रामीण व दुर्गम इलाकों पर से नियंत्रण ढीला पड़ता जा रहा है और विद्रोही अब केवल छापामार हमलों तक सीमित न रहकर सीधे सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बना रहे हैं।
14 चौकियों पर कब्जे और हथियार लूटने का BLA का यह दावा अगर पूरी तरह सही साबित होता है, तो यह पाकिस्तानी सेना के लिए एक ऐतिहासिक और शर्मनाक रणनीतिक हार मानी जाएगी। बलूचिस्तान में गहराता यह सशस्त्र संघर्ष न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की भू-राजनीति पर व्यापक असर डाल सकता है।
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