बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक नितेश तिवारी की ‘रामायण’ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म की स्टार कास्ट को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह है। जहां एक तरफ रणबीर कपूर को भगवान राम के किरदार के लिए चुना गया है, वहीं दक्षिण भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभाती नजर आएंगी। कन्नड़ सुपरस्टार यश इस महाकाव्य में रावण का किरदार निभा रहे हैं।
हालांकि, फिल्म के ऐलान के बाद से ही स्टार कास्ट को लेकर सोशल मीडिया और सिनेमा जगत में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। हाल ही में, रामानंद सागर की ऐतिहासिक टीवी धारावाहिक ‘रामायण’ में माता सीता का अमर किरदार निभाने वाली दिग्गज अभिनेत्री दीपिका चिखलिया ने इस नई ‘रामायण’ और इसकी स्टार कास्ट पर अपनी बेबाक राय व्यक्त की है। साई पल्लवी के सीता के रूप में चयन और यश के रावण अवतार पर दीपिका चिखलिया का बयान इस समय खूब चर्चा में है।
‘घुंघराले बालों वाली सीता?’ – साई पल्लवी के लुक पर दीपिका का सवाल
फिल्म में साई पल्लवी को सीता के किरदार में कास्ट किए जाने को लेकर जब दीपिका चिखलिया से सवाल किया गया, तो उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया बहुत ही सहज लेकिन दो टूक अंदाज में दी। दीपिका चिखलिया ने माता सीता की पारंपरिक भारतीय छवि और पौराणिक ग्रंथों में बताए गए उनके स्वरूप पर जोर देते हुए अपनी बात रखी।
दीपिका ने कहा, “जब हम सीता जी की बात करते हैं, तो हमारे मन में भारतीय सौंदर्य की एक विशिष्ट और दिव्य छवि उभरती है। साई पल्लवी एक बेहद बेहतरीन और प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन जब सीता के किरदार की बात आती है, तो दर्शकों के मन में एक खास रूप रचा-बसा है। साई पल्लवी के बाल स्वाभाविक रूप से काफी घुंघराले (Curly) हैं। लोग आमतौर पर सीता मां को लंबे, सीधे और बहते हुए सौम्य केशों में देखने के आदी हैं।”
दीपिका चिखलिया का मानना है कि किसी भी पौराणिक किरदार को निभाते समय दर्शकों की आस्था और भावनात्मक जुड़ाव का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। माता सीता का चरित्र सौम्यता, सादगी और पवित्रता का प्रतीक है, और दर्शक उस छवि में किसी भी बड़े बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते।

‘रावण के रूप में यश लगेंगे दमदार’ – केजीएफ स्टार की तारीफ
जहां एक तरफ दीपिका चिखलिया साई पल्लवी के सीता वाले लुक को लेकर थोड़ी संशय में नजर आईं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ‘केजीएफ’ (KGF) फेम अभिनेता यश को रावण के किरदार के लिए चुने जाने पर खुलकर खुशी जताई। उन्होंने यश की स्क्रीन प्रेजेंस और उनके अभिनय कौशल की जमकर तारीफ की।
दीपिका ने कहा, “यश एक बेहतरीन अभिनेता हैं और उनकी पर्सनैलिटी बेहद प्रभावशाली है। रावण का चरित्र बहुत ही शक्तिशाली, विद्वान और अहंकार से भरा हुआ था। उस किरदार को पर्दे पर जीवंत करने के लिए एक मजबूत शारीरिक बनावट (Strong Screen Presence) और भारी-भरकम आवाज की जरूरत होती है। यश में वह सभी गुण मौजूद हैं जो रावण के किरदार को दमदार बना सकते हैं।”
- मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस: यश की पर्सनैलिटी रावण के राजसी और शक्तिशाली रूप पर पूरी तरह खरी उतरती है।
- संवाद अदायगी: केजीएफ में यश का अंदाज यह साबित कर चुका है कि वह भारी-भरकम और प्रभावशाली डायलॉग्स को बखूबी बोल सकते हैं।
- गंभीरता और गहराई: रावण केवल एक खलनायक नहीं बल्कि महाज्ञानी भी था, जिसे दर्शाने के लिए यश जैसे मंझे हुए कलाकार की आवश्यकता थी।
रणबीर कपूर के ‘राम’ अवतार पर भी रखी बात
फिल्म में बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में दिखेंगे। रणबीर कपूर की कास्टिंग पर बात करते हुए दीपिका चिखलिया ने कहा कि रणबीर एक बहुत ही समर्पित और प्रतिभाशाली अभिनेता हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी आधुनिक बॉलीवुड स्टार के लिए राम जैसा मर्यादा पुरुषोत्तम का किरदार निभाना एक बहुत बड़ी चुनौती होता है।
दीपिका के अनुसार, “रणबीर कपूर ने अब तक कई तरह के मॉडर्न और थ्रिलर रोल किए हैं। दर्शकों ने उन्हें ‘एनिमल’ और ‘रॉकस्टार’ जैसी फिल्मों में देखा है। ऐसे में दर्शकों के दिमाग से उनकी पुरानी छवि को हटाकर उन्हें ‘भगवान राम’ के रूप में स्थापित करना मेकर्स और रणबीर दोनों के लिए बड़ी परीक्षा होगी। इसके लिए उन्हें न केवल अपनी बॉडी लैंग्वेज बल्कि अपने आचार-विचार और जीवनशैली में भी सात्विकता लानी होगी।”
पौराणिक फिल्मों के साथ दर्शकों का भावनात्मक जुड़ाव
रामायण केवल एक कहानी या फिल्म नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। दीपिका चिखलिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल के वर्षों में कई पौराणिक फिल्मों को दर्शकों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा है।
- आस्था का सम्मान: पौराणिक पात्रों के साथ प्रयोग करते समय धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना अनिवार्य है।
- वेशभूषा और लुक: पात्रों के परिधान और हेयरस्टाइल पौराणिक ग्रंथों के अनुरूप होने चाहिए, ताकि वे प्रामाणिक लगें।
- अभिनय में सौम्यता: आधुनिक सिनेमा के ग्लैमर से हटकर पौराणिक कथाओं में ठहराव और सादगी की आवश्यकता होती है।
निष्कर्ष: क्या नितेश तिवारी की ‘रामायण’ रच पाएगी इतिहास?
दीपिका चिखलिया का यह दो टूक बयान बॉलीवुड के उन सभी निर्देशकों के लिए एक सलाह की तरह है जो बड़े पर्दे पर पौराणिक कहानियों को लाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, साई पल्लवी और रणबीर कपूर जैसे दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी यह साफ करती है कि मेकर्स इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि निर्देशक नितेश तिवारी और उनकी टीम साई पल्लवी के लुक और रणबीर कपूर के राम अवतार को पर्दे पर किस तरह पेश करती है। क्या यह नई ‘रामायण’ दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतर पाएगी और रामानंद सागर के उस ऐतिहासिक दौर की यादों को नए कलेवर में दोहरा पाएगी? इसका जवाब तो फिल्म के रिलीज होने के बाद ही मिलेगा, लेकिन फिलहाल दीपिका चिखलिया के इस बयान ने सोशल मीडिया पर चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है।