नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर आरक्षण नीति के विरोध में आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान जमकर हंगामा हुआ। आरक्षण के मौजूदा नियमों में बदलाव और योग्यता को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने धारा 144 लागू होने और अनुमति की सीमा समाप्त होने का हवाला देते हुए हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शन का मुख्य कारण और मांगें
प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क था कि सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के बजाय केवल आर्थिक आधार और योग्यता (मेरिट) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण कई योग्य युवाओं को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ता है। प्रदर्शन में विभिन्न युवा संगठनों और छात्र गुटों के प्रतिनिधि शामिल थे, जो हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी कर रहे थे।

पुलिस की कार्रवाई और हिरासत
दोपहर के समय जब प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया, तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की:
- बैरिकेडिंग और सुरक्षा: जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।
- हिरासत: पुलिस के निर्देशों का पालन न करने और प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने की कोशिश करने पर कई मुख्य संयोजकों और प्रदर्शनकारियों को बस में बैठाकर नजदीकी पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।
- यातायात पर असर: इस विरोध प्रदर्शन और पुलिस की नाकाबंदी के कारण लुटियंस दिल्ली और कनेक्टिंग रास्तों पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा, जिससे आम यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
प्रशासन का पक्ष
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को एक निश्चित समय और सीमा के भीतर ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए धारा 144 का उल्लंघन करने वालों को हिरासत में लेना आवश्यक हो गया था। पुलिस ने स्पष्ट किया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और हिरासत में लिए गए लोगों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद छोड़ दिया जाएगा।
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