दक्षिण एशियाई भू-राजनीति और सैन्य इतिहास में मई 2025 का महीना एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज हो चुका है, जिसने भारत-पाकिस्तान के रणनीतिक समीकरणों को हमेशा के लिए बदल दिया। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले में 26 मासूमों की जान जाने के बाद, भारतीय सशस्त्र बलों ने जो करारा और सटीक जवाब दिया, उसे दुनिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के नाम से जानती है।
हाल ही में जारी हुई डॉक्यूमेंट्री ‘डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ (Declassified: Operation Sindoor) के बाद एक बार फिर इस 88 घंटे चले सैन्य अभियान की परतें दुनिया के सामने उधड़कर आ गई हैं। रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय (GHQ) में बैठी आसिम मुनीर की सेना के होश इसलिए उड़े हुए हैं क्योंकि भारतीय रणनीति, अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक और तीनों सेनाओं (स्थल, नभ और जल) के सटीक तालमेल ने पाकिस्तान के पूरे सुरक्षा तंत्र और एयर डिफेंस सिस्टम की धज्जियां उड़ा दी थीं।
पहलगाम हमला और भारत का कड़ा फैसला
22 अप्रैल 2025 को जब पहलगाम में आतंकवादियों ने निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया, तो देश भर में आक्रोश की लहर दौड़ गई। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के हालिया बयानों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आतंकवादियों और उनके आकाओं को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाए, चाहे वे कहीं भी छिपे हों।
भारत ने यह तय किया कि यह केवल एक सीमित स्ट्राइक नहीं होगी, बल्कि पाकिस्तान के उस भ्रम को तोड़ने का अभियान होगा जिसमें वह परमाणु धमकी की आड़ में सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता आया था। इसी सोच के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का खाका तैयार किया गया।
88 घंटे का महा-अभियान: कैसे घुटनों पर आया पाकिस्तान?
6 और 7 मई 2025 की मध्यरात्रि को भारतीय वायु सेना, थल सेना और नौसेना के संयुक्त समन्वय के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को हरी झंडी दिखाई गई। अगले 88 घंटों तक चले इस अभूतपूर्व अभियान में भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और आतंकवादी नेटवर्क को लक्षित किया।
- पहला प्रहार – सर्जिकल और सटीक एयरस्ट्राइक (मई 7): भारतीय लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की सटीक मिसाइलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित मुरीदके, बहावलपुर, मुजफ्फराबाद और कोटली जैसे कुख्यात आतंकी लॉन्च पैड्स को जमींदोज कर दिया।
- पाकिस्तानी सेना का दुस्साहस और भारत का जवाबी वार (मई 8-9): शुरुआती झटके के बाद जब पाकिस्तानी वायु सेना और तोपखाने ने जवाब देने की कोशिश की, तो भारतीय सुरक्षा बलों ने और भी आक्रामक रुख अपनाया।
- सैन्य अड्डों पर सीधा निशाना (मई 9-10): भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले एयरबेसों—नूर खान (चकलाला), सरगोधा, मुरीद और रफीकी—के रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया। 1971 के युद्ध के बाद यह पहला मौका था जब भारतीय वायुशक्ति ने पाकिस्तान की मुख्य भूमि के सैन्य अड्डों पर इतनी भीषण तबाही मचाई।
पाकिस्तानी सेना (ISPR) की बौखलाहट की मुख्य वजहें
डॉक्यूमेंट्री के सार्वजनिक होते ही पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (ISPR) द्वारा आनन-फानन में दिए गए बयान उसकी घबराहट को साफ बयां करते हैं। रावलपिंडी के जनरलों के होश उड़ने के मुख्य रणनीतिक कारण निम्नलिखित हैं:
- परमाणु ब्लैकमेलिंग का खात्मा: पाकिस्तान दशकों से ‘न्यूक्लियर थ्रेशोल्ड’ का डर दिखाकर भारत को जवाब देने से रोकता रहा था। ऑपरेशन सिंदूर ने इस गुब्बारे की हवा निकाल दी और साबित किया कि भारत किसी भी दुस्साहस का माकूल जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।
- एयर डिफेंस सिस्टम की नाकामी: पाकिस्तान द्वारा खरीदे गए महंगे विदेशी एयर डिफेंस सिस्टम और रडार नेटवर्क भारतीय गाइडेड म्यूनिशन्स, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीकों के आगे पूरी तरह विफल साबित हुए।
- स्वदेशी तकनीक का दम: भारत के मेड-इन-इंडिया रक्षा प्लेटफॉर्मों, काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स और नेट-सेंट्रिक वारफेयर क्षमताओं ने जमीनी स्तर पर पाकिस्तान के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को पंगु बना दिया।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब होना: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने डिजिटल और सैटेलाइट सबूतों के साथ दुनिया को दिखाया कि कैसे पाकिस्तान की सेना आतंकवादियों को पनाह और सुरक्षा ढांचा प्रदान करती है।
वैश्विक बिरादरी पर प्रभाव और भारत का संदेश
ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य सफलता नहीं, बल्कि भारत की नई रणनीतिक नीति (Strategic Doctrine) का उद्घोष था। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के शब्दों में: “दुनिया के लिए संदेश बिल्कुल साफ है—भारत की उदारता या सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझने की भूल न करें। भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कोई भी जोखिम उठा सकता है और कड़ा प्रहार कर सकता है।“
10 मई 2025 की शाम को जब पाकिस्तान की ओर से सैन्य गतिविधियों को रोकने का आग्रह किया गया, तब जाकर 88 घंटे की यह सीधी सैन्य भिड़ंत रुकी। हालांकि, भारतीय रक्षा नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई रुकी नहीं है और भविष्य में किसी भी आतंकी दुस्साहस का परिणाम पाकिस्तान के लिए इससे भी अधिक घातक होगा।
निष्कर्ष: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के 88 घंटों की गाथा ने यह साबित कर दिया है कि नया भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि दुश्मन के घर में घुसकर उसके नापाक इरादों को ध्वस्त करने का माद्दा भी रखता है। यही कारण है कि आज जब इस ऑपरेशन का सच दुनिया के सामने आ रहा है, तो पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के पास अपनी आवाम को देने के लिए कोई जवाब नहीं बचा है।
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