विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पर कमर्शियल उड़ानें बंद: कर्मचारियों का भविष्य संकट में

आंध्र प्रदेश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक, विशाखापट्टनम एयरपोर्ट (INS डेगा का सिविल एन्क्लेव) ने अनुसूचित वाणिज्यिक यात्री उड़ानों (Scheduled Commercial Flights) के परिचालन को पूरी तरह रोक दिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही तटीय आंध्र प्रदेश के नागरिक उड्डयन परिदृश्य में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। सभी एयरलाइनों की उड़ानों को विजयनगरम जिले में स्थित नए ‘अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे’ (भोगापुरम एयरपोर्ट) में स्थानांतरित कर दिया गया है।

लेकिन इस बड़े ढांचागत बदलाव और नए हवाई अड्डे के चालू होने की खुशी के बीच, पुराने विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पर काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों, ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ, अनुबंध कर्मियों और स्थानीय छोटे व्यवसायियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। वे अपने रोजगार और भविष्य की सुरक्षा को लेकर भारी असमंजस में हैं।

नए बदलाव की पृष्ठभूमि: विशाखापट्टनम से भोगापुरम का सफर

विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पिछले कई दशकों से नौसेना (INS डेगा) के नियंत्रण वाले रनवे और एयरस्पेस का उपयोग करके नागरिक उड़ानों का संचालन कर रहा था। जैसे-जैसे विशाखापट्टनम का औद्योगिक और आईटी ढांचा विकसित हुआ, यात्री उड़ानों की संख्या बढ़ती गई, जिससे नौसैनिक गतिविधियों और नागरिक उड़ानों के बीच स्लॉट और समय सीमा की बाध्यताएं उत्पन्न होने लगीं।

इसी उड्डयन दबाव को कम करने और आंध्र प्रदेश को एक वैश्विक लॉजिस्टिक्स और उड्डयन केंद्र बनाने के उद्देश्य से भोगापुरम में नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तैयार किया गया। सरकारी नियमों के अनुसार, नए हवाई अड्डे के चालू होते ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत पुराने सिविल एन्क्लेव पर व्यावसायिक उड़ानें बंद कर दी गईं। हालांकि, एयरपोर्ट का ‘VTZ’ कोड नए हवाई अड्डे को स्थानांतरित कर दिया गया है, लेकिन वास्तविक स्थान शहर से लगभग 45 से 50 किलोमीटर दूर चला गया है।

कर्मचारियों के सिर पर मंडराता बेरोजगारी का खतरा

विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पर कमर्शियल उड़ानों के बंद होने से सबसे बड़ा असर उन आउटसोर्स, अनुबंध आधारित (contractual) और ग्राउंड स्टाफ कर्मचारियों पर पड़ा है जो सालों से यहां सेवाएं दे रहे थे।

  • ग्राउंड हैंडलिंग और केटरिंग स्टाफ: ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियों, ट्रॉली मैनेजमेंट, सुरक्षा जांच सहायता, सफाई कर्मियों और केटरिंग यूनिट्स में काम करने वाले सैकड़ों दैनिक वेतनभोगी और अनुबंध कर्मियों की नौकरियां अब अधर में लटकी हुई हैं।
  • रिटेल, स्टॉल और कैफे कर्मचारी: टर्मिनलों के भीतर संचालित होने वाले रेस्तरां, उपहार दुकानों, टैक्सी काउंटरों और रिटेल आउटलेट्स में कार्यरत कर्मचारियों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
  • स्थानांतरण की व्यावहारिक समस्याएं: यद्यपि कुछ एयरलाइंस और केंद्रीय एजेंसियों (जैसे CISF या AAI के स्थायी कर्मचारी) अपने कर्मचारियों को नए भोगापुरम एयरपोर्ट पर ट्रांसफर कर रही हैं, लेकिन निजी कंपनियों और थर्ड-पार्र्टी एजेंसियों के लिए काम करने वाले स्थानीय कर्मचारियों को नया प्रस्ताव नहीं मिला है। इसके अलावा, नए हवाई अड्डे की विशाखापट्टनम शहर से 48-50 किमी की दूरी के कारण वहां रोज जाकर काम करना या वहां शिफ्ट होना कई कर्मचारियों के लिए आर्थिक रूप से कठिन सिद्ध हो रहा है।

कर्मचारी संघों और स्थानीय यूनियनों का कहना है कि सरकार और प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पर अपनी सेवाएं देने वाले शत-प्रतिशत कर्मचारियों का नए हवाई अड्डे या अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में पुनर्वास (Rehabilitation) किया जाता।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और टैक्सी चालकों पर असर

केवल एयरपोर्ट के भीतर काम करने वाले लोग ही नहीं, बल्कि बाहरी इकोसिस्टम भी इस बंद से प्रभावित हुआ है। विशाखापट्टनम एयरपोर्ट के बाहर संचालित होने वाली प्रीपेड टैक्सी सेवाओं, कैब चालकों, ऑटो रिक्शा चालकों और आसपास के छोटे होटलों व लॉज के कारोबार पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।

शहर के केंद्र में स्थित होने के कारण यात्री पुराने एयरपोर्ट से जल्दी और सस्ते में शहर आ-जा सकते थे। अब भोगापुरम स्थानांतरित होने से यात्रियों का यात्रा समय और किराया दोनों बढ़ेंगे, जिससे शहर के पारंपरिक टैक्सी ऑपरेटरों की दैनिक कमाई प्रभावित होने की आशंका है।

पुराने विशाखापट्टनम एयरपोर्ट का आगे क्या होगा?

विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पूरी तरह से ध्वस्त या बंद नहीं किया जा रहा है।

  • भारतीय नौसेना का पूर्ण नियंत्रण: अनुसूचित वाणिज्यिक उड़ानों के चले जाने के बाद, यह एयरबेस (INS डेगा) पूरी तरह से भारतीय नौसेना के पूर्वी नौसेना कमान (ENC) के अधिकार क्षेत्र और उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा। नौसेना यहां अपने रक्षा बेड़े, गश्ती विमानों और रणनीतिक गतिविधियों का विस्तार करेगी।
  • गैर-अनुसूचित उड़ानें (Non-Scheduled Flights): गैर-अनुसूचित नागरिक उड़ानें, जैसे कि वीआईपी (VIP) विमान, चार्टर्ड उड़ानें, और आपातकालीन चिकित्सा हेलीकॉप्टर सेवाएं पूर्ववत INS डेगा से संचालित होती रहेंगी।

भविष्य की चुनौतियां और सरकार से अपेक्षाएं

यह बदलाव आंध्र प्रदेश के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भले ही एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा हो, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण से यह उन सैकड़ों परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण समय है जो अपनी आजीविका के लिए विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पर निर्भर थे।

रोजगार सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नए हवाई अड्डे का संचालन करने वाले डेवलपर समूह से मांग की जा रही है कि वे:

  1. स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता दें: पुराने एयरपोर्ट के अनुभवी और प्रभावित संविदा कर्मचारियों को भोगापुरम में प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए।
  2. सस्ते परिवहन का प्रबंध करें: विशाखापट्टनम शहर से भोगापुरम तक कर्मचारियों के आने-जाने के लिए विशेष शटल बस या किफायती परिवहन की व्यवस्था की जाए।
  3. पुनर्कौशल और पुनर्वास (Reskilling & Rehabilitation): जिन कर्मचारियों का ट्रांसफर संभव नहीं है, उन्हें वैकल्पिक नौकरियों के लिए प्रशिक्षण और सहायता दी जाए।

निष्कर्ष

विकास की प्रक्रिया में जब पुरानी प्रणालियों को नई और बड़ी ढांचागत परियोजनाओं से बदला जाता है, तो इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणाम भी सामने आते हैं। विशाखापट्टनम में उड्डयन सेवाओं का भोगापुरम जाना आधुनिकता की दिशा में एक कदम है, लेकिन पुराने एयरपोर्ट के निष्ठावान कर्मचारियों के रोजगार और भविष्य के अधिकारों की रक्षा करना भी शासन और नागरिक समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रभावित कर्मचारियों का सही पुनर्वास नहीं किया गया, तो यह ढांचागत विकास कई परिवारों के लिए जीवनयापन की बड़ी अनिश्चितता छोड़ जाएगा।

यह भी पढ़ें: सागर: टैक्सी ड्राइवर के घर मिली 3 करोड़ की नकदी, जांच शुरू

Author

  • Rahul Kaushik

    Senior Editor

    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

    पत्रकारिता के क्षेत्र में राहुल कौशिक की लेखन शैली तथ्यात्मक, सहज और पाठकों को जानकारी के साथ जागरूक करने वाली मानी जाती है। वे विशेष रूप से युवा वर्ग, डिजिटल इंडिया, नई तकनीकों और सामाजिक मुद्दों से संबंधित विषयों पर सक्रिय रूप से कार्य करते हैं।

    राहुल कौशिक का उद्देश्य विश्वसनीय, उपयोगी और सकारात्मक पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक सही जानकारी पहुँचाना तथा समाज में जागरूकता को बढ़ावा देना है।

Leave a Comment