जम्मू-कश्मीर की वादी में आतंकवाद का इतिहास कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती तब खड़ी होती है जब पारंपरिक छवि से अलग पढ़े-लिखे, तकनीक-प्रेमी और आधुनिक भाषा बोलने वाले युवा आतंकवाद का रास्ता चुनते हैं। इन्हीं चेहरों में से एक चर्चित नाम था—मोहम्मद लतीफ भट। महज 22 साल की उम्र में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का खूंखार कमांडर बना लतीफ भट अपनी फर्राटेदार अंग्रेजी और आधुनिक कार्यप्रणाली के लिए जाना जाता था। उस पर सुरक्षा बलों ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
आइए विस्तार से समझते हैं कि मोहम्मद लतीफ भट कौन था, वह लश्कर का कमांडर कैसे बना और क्यों सुरक्षा एजेंसियों ने उसे ‘A++’ श्रेणी का मोस्ट वांटेड आतंकी घोषित किया था।
कौन था मोहम्मद लतीफ भट?
मोहम्मद लतीफ भट दक्षिण कश्मीर के पुलवामा/शोपियां इलाके का रहने वाला था। एक साधारण परिवार में जन्मे लतीफ ने अपनी शुरुआती शिक्षा स्थानीय स्तर पर हासिल की। बचपन से ही वह पढ़ाई में काफी होशियार था और विशेष रूप से अंग्रेजी भाषा पर उसकी जबरदस्त पकड़ थी। जहाँ आमतौर पर आतंकियों की छवि एक रूढ़िवादी और कम पढ़े-लिखे कैडर के रूप में देखी जाती थी, वहीं लतीफ भट इस छवि से बिल्कुल उलट था।
अपनी अंग्रेजी बोलने की क्षमता, आधुनिक पहनावे और गैजेट्स की समझ के कारण उसने स्थानीय युवाओं के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई। लेकिन इसी बौद्धिक क्षमता का इस्तेमाल उसने देश के खिलाफ साजिश रचने और युवाओं को भटकाने के लिए किया।
लश्कर-ए-तैयबा में प्रवेश और तेजी से बढ़ता कद
लतीफ भट का झुकाव किशोरावस्था के दौरान ही अलगाववादी विचारधारा की ओर होने लगा था। इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए वह सीमा पार (पाकिस्तान) बैठे लश्कर-ए-तैयबा के आकाओं के संपर्क में आया।
- भर्ती और प्रशिक्षण: स्थानीय स्तर पर ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम शुरू करने के बाद, वह जल्द ही लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय कैडर में शामिल हो गया। उसने नियंत्रण रेखा (LoC) के पार या घाटी के गुप्त ठिकानों में आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण लिया।
- कमांडर के पद तक पहुँचना: अपनी चतुर रणनीति, संवाद क्षमता और डिजिटल गैजेट्स की समझ के कारण वह बहुत कम समय में लश्कर के शीर्ष नेतृत्व की आंखों का तारा बन गया। महज 21-22 साल की उम्र में उसे दक्षिण कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के क्षेत्रीय कमांडर की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
फर्राटेदार अंग्रेजी: सुरक्षा बलों के लिए क्यों बना बड़ा खतरा?
लतीफ भट की फर्राटेदार अंग्रेजी केवल उसकी व्यक्तिगत विशेषता नहीं थी, बल्कि यह लश्कर-ए-तैयबा के लिए एक रणनीतिक हथियार बन चुकी थी। सुरक्षा एजेंसियों के विश्लेषण के मुताबिक, लतीफ की भाषा शैली के कारण वह कई मोर्चों पर खतरनाक साबित हो रहा था:
- पढ़े-लिखे युवाओं का ब्रेनवॉश: वह कॉलेज और यूनिवर्सिटी जाने वाले युवाओं को आसानी से अपने जाल में फंसा लेता था। वह तर्क-वितर्क और अंग्रेजी साहित्य का हवाला देकर आतंकवाद को “वैचारिक लड़ाई” के रूप में पेश करता था।
- ऑनलाइन प्रोपेगैंडा और एनक्रिप्टेड मैसेजिंग: लतीफ एनक्रिप्टेड ऐप्स (जैसे टेलीग्राम, सिग्नल) के जरिए सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलरों से सीधे अंग्रेजी में चैट और कॉल पर बात करता था, जिससे खुफिया एजेंसियों को उसके संदेशों को तुरंत डिकोड करने में मशक्कत करनी पड़ती थी।
- सोशल मीडिया अभियान: उसने डिजिटल मीडिया का इस्तेमाल कर सुरक्षा बलों के खिलाफ भ्रामक प्रचार फैलाया और पोस्टर/वीडियो जारी किए, जिससे घाटी के भटके हुए युवाओं को हथियार उठाने के लिए उकसाया जा सके।
आतंकी गतिविधियां और नेटवर्क निर्माण
लतीफ भट मुख्य रूप से दक्षिण कश्मीर (पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग) में सक्रिय था। उसने लश्कर-ए-तैयबा के लिए एक मजबूत स्थानीय ओवर-ग्राउंड नेटवर्क तैयार किया था।
- गश्त दल और सुरक्षा बलों पर हमले: उसने सुरक्षा बलों के काफिले पर घात लगाकर हमले करने और ग्रेनेड फेंकने की कई घटनाओं की साजिश रची।
- गैर-स्थानीय मजदूरों और नागरिकों को निशाना बनाना: लतीफ और उसकी टुकड़ी पर आरोप था कि वे घाटी में डर का माहौल बनाने के लिए गैर-स्थानीय मजदूरों, पंचायत प्रतिनिधियों और निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाते थे।
- नए आतंकियों की भर्ती: उसने कम से कम दो दर्जन से अधिक स्थानीय युवाओं को लश्कर में शामिल करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
15 लाख रुपये का इनाम और ‘A++’ कैटेगरी का टैग
लतीफ भट की बढ़ती गतिविधियों और युवाओं के बीच उसके प्रभाव को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने उसे संयुक्त रूप से मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया।
| विवरण | जानकारी |
| नाम | मोहम्मद लतीफ भट |
| संगठन | लश्कर-ए-तैयबा (LeT) |
| पद | दक्षिण कश्मीर कमांडर |
| उम्र (चरम सक्रियता के समय) | 22 वर्ष |
| इनामी राशि | ₹15 लाख |
| श्रेणी | A++ (मोस्ट वांटेड) |
| मुख्य कार्यक्षेत्र | दक्षिण कश्मीर (पुलवामा/शोपियां) |
सुरक्षा बलों द्वारा उस पर 15 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित किया गया। ‘A++’ श्रेणी में रखे जाने का मतलब था कि वह घाटी में सक्रिय टॉप-5 सबसे खतरनाक आतंकवादियों में से एक था, जिसकी गिरफ्तारी या न्यूट्रलाइजेशन सुरक्षा बलों की सर्वोच्च प्राथमिकता थी।
सुरक्षा बलों का ऑपरेशन और खात्मा
लतीफ भट लगातार ठिकाने बदलता रहता था और स्थानीय गुप्त ठिकानों (हार्टलैंड्स) में पनाह लेता था। हालांकि, सुरक्षा बलों के खुफिया तंत्र और ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ (HumInt) ने उस पर चौबीसों घंटे निगरानी बनाए रखी।
विशिष्ट खुफिया इनपुट मिलने के बाद, सेना की राष्ट्रीय राइफल्स (RR), जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) और CRPF ने एक संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) शुरू किया। आतंकियों को भागने का मौका न देते हुए सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को सील कर दिया। खुद को घिरा देखकर लतीफ भट और उसके साथियों ने भारी गोलीबारी शुरू कर दी।
सटीक और नियंत्रित जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने लतीफ भट को मार गिराया। उसकी मौत को दक्षिण कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना गया।
पढ़े-लिखे युवाओं का आतंकवाद की ओर मोड़: एक चिंताजनक पहलू
मोहम्मद लतीफ भट का मामला घाटी में आतंकवाद के उस बदलते पैटर्न को रेखांकित करता है जहाँ शिक्षा, अंग्रेजी भाषा का ज्ञान या तकनीक की समझ किसी व्यक्ति को कट्टरपंथ से नहीं बचा पाई।
पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन हमेशा से ऐसे पढ़े-लिखे युवाओं को अपने “पोस्टर बॉय” के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने एजेंडे को वैध ठहरा सकें। हालांकि, भारतीय सुरक्षा बलों और प्रशासन ने आतंकवाद विरोधी अभियानों के साथ-साथ ‘काउंसलिंग’ और ‘सुरक्षा घेरा’ अभियानों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं।
लतीफ भट जैसे कम उम्र के आतंकियों का अंत यह साफ संदेश देता है कि बंदूक उठाने वाले का अंजाम केवल तबाही है, चाहे वह कितना भी पढ़ा-लिखा या चालाक क्यों न हो। घाटी में शांति और विकास की बहाली के लिए सुरक्षा बलों का संकल्प अटूट है।
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