हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में एक बार फिर तेज रफ्तार और दुर्गम रास्तों का कहर देखने को मिला है। चंबा जिले में एक अनियंत्रित यात्री बस के गहरी खाई की ओर पलट जाने से बड़ा सड़क हादसा हो गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस बल ने तत्काल राहत व बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को पास के क्षेत्रीय अस्पताल और चंबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ यात्रियों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
तीखे मोड़ पर बेकाबू हुई बस
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्रियों से खचाखच भरी यह बस अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। जैसे ही बस पहाड़ के एक संकरे और तीखे मोड़ के पास पहुंची, चालक अचानक वाहन पर से अपना नियंत्रण खो बैठा। सड़क से फिसलकर बस खाई की ढलान पर कई बार पलटते हुए जा अटकी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस के परख्च्चे उड़ गए और अंदर बैठे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
हादसे की आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके की ओर दौड़े। उन्होंने बिना समय गंवाए बस की खिड़कियों और टूटे हुए हिस्सों से यात्रियों को बाहर निकालना शुरू किया।
राहत एवं बचाव कार्य में प्रशासन की मुस्तैदी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एम्बुलेंस और राहत दल मौके पर पहुंच गए। संकरे रास्ते और ढलान होने के कारण शुरुआत में बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन स्थानीय लोगों और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से सभी घायलों को जल्द से जल्द बाहर निकाल लिया गया।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिवारों और गंभीर रूप से घायलों के लिए तुरंत अंतरिम वित्तीय सहायता राशि की घोषणा की गई है।
हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और तकनीकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्राथमिक दृष्टि में हादसे का कारण तेज रफ्तार या यांत्रिक खराबी माना जा रहा है, हालांकि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा का सवाल
हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में अक्सर होने वाले इस तरह के हादसे सड़क सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। संकरे मार्ग, तीखे मोड़, क्रैश बैरियर की कमी और ओवरलोडिंग जैसे कारण इन दुर्घटनाओं के मुख्य कारक बनते हैं। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा दीवारें (Parapeet) बनाई जाएं और यात्री वाहनों की गति सीमा और फिटनेस की नियमित जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
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