तिरुवनंतपुरम: केरल के बहुचर्चित पत्रकार के.एम. बशीर सड़क दुर्घटना मामले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्रीराम वेंकटरमन के खिलाफ प्रत्यक्षदर्शी ऑटो चालक की गवाही ने मामले को एक नया और निर्णायक मोड़ दे दिया है। 3 अगस्त 2019 की उस दुर्भाग्यपूर्ण रात को तिरुवनंतपुरम के म्यूजियम रोड पर हुए दर्दनाक हादसे को लेकर प्रत्यक्षदर्शी ऑटो चालक ने अदालत के समक्ष महत्वपूर्ण बयान दर्ज कराए हैं, जो आरोपी अधिकारी के दावों को सिरे से खारिज करते हैं।
घटना का विवरण और प्रत्यक्षदर्शी की गवाही
वर्ष 2019 में सिराज समाचार पत्र के तिरुवनंतपुरम ब्यूरो प्रमुख के.एम. बशीर की एक भीषण सड़क हादसे में जान चली गई थी। पुलिस जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक अनियंत्रित तेज रफ्तार कार ने बशीर की मोटरसाइकिल को पीछे से जोरदार टक्कर मारी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटनास्थल पर मौजूद ऑटो चालक ने अदालत में गवाही देते हुए स्पष्ट किया कि दुर्घटना के समय तेज रफ्तार लग्जरी वाहन को खुद आईएएस अधिकारी श्रीराम वेंकटरमन ही चला रहे थे। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि बशीर की बाइक कई फीट दूर जा गिरी। इसके अलावा, गवाह ने यह भी उल्लेख किया कि दुर्घटना के तुरंत बाद चालक की सीट से बाहर निकले व्यक्ति की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वह अत्यधिक नशे में था।
आरोपों को बदलने के प्रयास और सह-यात्री का बयान
हादसे के शुरुआती दौर में मामले को भटकाने की कोशिश की गई थी। दुर्घटना के वक्त गाड़ी में मौजूद महिला मित्र वफा फिरोज़ ने पहले यह बयान दिया था कि कार वह चला रही थीं, परंतु स्थानीय चश्मदीदों और ऑटो चालकों के बयानों ने इस दावे को झूठा साबित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों की सतर्कता और बयानों के आधार पर ही पुलिस को आईएएस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज करना पड़ा।
| मुख्य पहलू | विवरण |
| पीड़ित | के.एम. बशीर (ब्यूरो चीफ, ‘सिराज’ दैनिक) |
| मुख्य आरोपी | श्रीराम वेंकटरमन (आईएएस अधिकारी) |
| प्रमुख धाराएं | धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या), 201 (साक्ष्य मिटाना), 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) |
| मुख्य प्रत्यक्षदर्शी | स्थानीय ऑटो चालक (जिसने घटनास्थल पर दुर्घटना और चालक की पहचान की) |
कानूनी कार्यवाही और अदालत का रुख
अदालत में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त जिला सत्र न्यायालय ने आरोपी आईएएस अधिकारी पर गैर-इरादतन हत्या (IPC धारा 304), सबूत मिटाने की कोशिश (IPC धारा 201), और खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने (लापरवाही ड्राइविंग एवं मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184) के तहत आरोप तय किए हैं।
बचाव पक्ष की ओर से कई बार यह तर्क देने का प्रयास किया गया कि यह केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना थी, परंतु पुलिस द्वारा प्रस्तुत फॉरेंसिक रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शी ऑटो चालक के सशक्त बयान ने अभियोजन पक्ष के मामले को काफी मजबूती प्रदान की है।
जन आक्रोश और न्यायिक जवाबदेही
इस मामले ने पूरे केरल में प्रशासनिक मशीनरी और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। पत्रकार संगठनों और आम जनता ने निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किए।
एक आम ऑटो चालक द्वारा बिना किसी दबाव के एक शक्तिशाली आईएएस अधिकारी के खिलाफ अदालत में मजबूती से गवाही देना भारतीय न्याय प्रणाली में आम नागरिक के साहस और सच्चाई के प्रति निष्ठा का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
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