नई दिल्ली: देश की बहुप्रतीक्षित 16वीं जनगणना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) कार्यालय द्वारा एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। की रिपोर्ट के अनुसार, जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी ‘जनसंख्या गणना’ (Population Enumeration) की प्रक्रिया 17 अगस्त से शुरू होने जा रही है।
इस बार की जनगणना कई ऐतिहासिक बदलावों की गवाह बनने वाली है। वर्ष 1931 के बाद यह पहला मौका होगा जब राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। इसके साथ ही, देश में पहली बार नागरिकों से उनके माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दर्ज कराई जाएंगी।
मुख्य बिंदु: एक नज़र में
| विषय | विवरण |
| चरण की शुरुआत | 17 अगस्त (स्व-गणना खिड़की) |
| प्रथम चरण क्षेत्र | लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले/दुर्गम इलाके |
| घर-घर गिनती (बर्फबारी क्षेत्र) | 1 सितंबर से 30 सितंबर |
| नवीनतम प्रश्न | जाति, माता-पिता की जन्मतिथि, जन्मस्थान, पासपोर्ट नंबर और आधार (ऐच्छिक) |
| सत्यापन दस्तावेज़ | जाति या जन्मतिथि के लिए किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं |
17 अगस्त से स्व-गणना (Self-Enumeration) और शेड्यूल
गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, जनगणना का यह चरण सबसे पहले उत्तरी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों—लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी तथा विषम मौसम वाले दुर्गम क्षेत्रों में शुरू किया जाएगा।
इन क्षेत्रों के नागरिकों के लिए 17 अगस्त से 30 अगस्त तक स्व-गणना (Self-Enumeration) का डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना विवरण भर सकेंगे। इसके पश्चात, 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर आंकड़ों का भौतिक एवं डिजिटल सत्यापन करेंगे। शेष मैदानी राज्यों के लिए जनसंख्या गणना की मुख्य प्रक्रिया निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित की जाएगी।
1931 के बाद पहली बार जातिगत गणना: जानिए प्रक्रिया
स्वतंत्र भारत में यह पहली बार होगा जब सामान्य जनगणना के दौरान हर नागरिक की जाति का ब्योरा एकत्र किया जाएगा। की खबर के अनुसार, जाति दर्ज करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी रखा गया है:
- घोषणा आधारित प्रविष्टि: जाति की जानकारी केवल उत्तरदाता (Respondent) द्वारा दिए गए स्व-घोषणात्मक विवरण के आधार पर दर्ज होगी।
- ड्रॉप-डाउन और टेक्स्ट फील्ड: अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए संबंधित राज्य की अधिकृत सूची के अनुसार एक डिजिटल ‘ड्रॉप-डाउन’ मेन्यू दिखाई देगा। गैर-SC/ST श्रेणी के लोगों के लिए जाति का नाम टाइप करने का विकल्प रहेगा।
- प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं: जाति सिद्ध करने के लिए किसी भी प्रकार के दस्तावेज या जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate) को दिखाना अनिवार्य नहीं होगा।
- एआई और आधुनिक टूल्स का उपयोग: वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) में लगभग 45,000 से अधिक जातियों के नाम दर्ज हो गए थे, जिससे आंकड़ों का वर्गीकरण कठिन हो गया था। इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक डेटा एनालिटिक्स टूल्स की मदद से वर्तनी (Spelling) की भिन्नताओं को सही ढंग से वर्गीकृत किया जाएगा।
माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान पूछने की वजह
जनगणना 2027 के दूसरे चरण के प्रश्नावली फार्म में एक बड़ा नवाचार माता-पिता के जन्म का विवरण जोड़ना है।
- नागरिकता मानकों का आकलन: अधिकारियों के अनुसार, माता-पिता की जन्मतिथि और उनके जन्मस्थान (राज्य/देश) संबंधी आंकड़ों का प्राथमिक उद्देश्य यह जानना है कि देश में कितने लोग संवैधानिक नागरिकता के मापदंडों को पूरा करते हैं।
- सबूत की अनिवार्यता नहीं: यदि किसी व्यक्ति को अपने माता-पिता की सटीक जन्मतिथि ज्ञात नहीं है, तो केवल अनुमानित वर्ष दर्ज कराया जा सकेगा। ऐसी स्थिति में डिजिटल सिस्टम स्वतः ही उस वर्ष की 1 जनवरी को डिफ़ॉल्ट तिथि मान लेगा।
- NPR से अलग प्रक्रिया: राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अब जनगणना 2027 से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। यह डेटा केवल सांख्यिकीय अध्ययन के लिए एकत्र किया जा रहा है।
डिजिटल तकनीक, आधार और पासपोर्ट की स्वैच्छिक एंट्री
भारत की यह 16वीं जनगणना देश की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी।
- पासपोर्ट और आधार नंबर: यदि उत्तरदाता के पास वैध पासपोर्ट उपलब्ध है, तो उसका विवरण फॉर्म में दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, आधार नंबर देना पूर्णतः ऐच्छिक (Voluntary) रखा गया है।
- मोबाइल ऐप का प्रयोग: प्रगणक अपने मोबाइल फोन/टैबलेट में समर्पित एप्लिकेशन (CMMS – Census Management and Monitoring System) के जरिए डेटा प्रविष्ट करेंगे, जिससे आंकड़ों का संकलन वास्तविक समय (Real-Time) पर हो सकेगा।
डेटा गोपनीयता और कानूनी सुरक्षा
नागरिकों में व्यक्तिगत जानकारियों को लेकर किसी भी संशय को दूर करते हुए गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के आंकड़े कानूनी रूप से पूरी तरह सुरक्षित हैं।
जनगणना अधिनियम, 1948 (Census Act, 1948):
कानून के तहत जनगणना में एकत्र किया गया व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहता है। इस डेटा का उपयोग किसी व्यक्ति के खिलाफ अदालत में साक्ष्य के रूप में, कानूनी कार्रवाई के लिए, सरकारी सुविधाओं को छीनने के लिए या किसी सार्वजनिक खुलासे (Public Disclosure) में नहीं किया जा सकता। इसका इस्तेमाल केवल देश के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास और नीति-निर्माण में सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही होता है।
निष्कर्ष
17 अगस्त से शुरू हो रहा जनगणना 2027 का दूसरा चरण भारत के प्रशासनिक और जनसांख्यिकीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म, जातिगत डेटा संग्रह और जनसांख्यिकीय कारकों का समावेश सरकार को अधिक लक्षित, पारदर्शी और प्रभावी कल्याणकारी नीतियां बनाने में मदद करेगा।
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