बॉलीवुड की ‘ड्रामा क्वीन’ और कंट्रोवर्सीज की रानी कही जाने वाली राखी सावंत हमेशा किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं। टीवी का कोई रियलिटी शो हो या मुंबई की सड़कों पर पैपराजी के सामने उनका ड्रामा, राखी की मौजूदगी कभी भी बिना किसी हंगामे के पूरी नहीं होती। हालांकि, कैमरे के सामने हमेशा हंसने-हंसाने और लोगों का मनोरंजन करने वाली राखी सावंत की निजी जिंदगी किसी बेहद दर्दनाक फिल्म की पटकथा से कम नहीं रही है। उनके संघर्ष, विवादों और करियर से परे अगर उनकी निजी जिंदगी पर नजर डालें, तो प्यार, शादी और धर्म परिवर्तन के मामले में उनका सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक हिंदू सनातन परिवार में जन्मी राखी सावंत ने अपनी जिंदगी के अलग-अलग पड़ावों में प्यार पाने और उसे बनाए रखने की खातिर पहले ईसाई धर्म (Christianity) को अपनाया और फिर बाद में इस्लाम कबूल कर ‘फातिमा’ बनीं। हालांकि, इतनी कुर्बानियां और बड़े फैसले लेने के बावजूद, नियति को कुछ और ही मंजूर था—प्यार के मामले में उन्हें दोनों ही बार सिर्फ और सिर्फ धोखा ही मिला।
साधारण हिंदू परिवार से ‘ड्रामा क्वीन’ बनने का सफर
राखी सावंत का असली नाम ‘नीरू भेड़ा’ है। उनका जन्म मुंबई के एक बेहद साधारण और पारंपरिक हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता मुंबई पुलिस में एक पुलिस कांस्टेबल थे और परिवार का माहौल काफी सख्त और रूढ़िवादी था। उस दौर में उनके परिवार में लड़कियों का डांस करना या फिल्मों में जाना सख्त मना था। राखी के मन में बचपन से ही ग्लैमर वर्ल्ड और बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने की तमन्ना थी, लेकिन परिवार के कड़े रुख की वजह से उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
कहा जाता है कि जब राखी ने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर डांस करना और ऑडिशन देना शुरू किया, तो उन्हें अपनों के ही तानों और विरोध का सामना करना पड़ा। लेकिन अपने सपनों को पूरा करने के जुनून में उन्होंने कम उम्र में ही अपना घर छोड़ दिया। इंडस्ट्री में टिके रहने और अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने अपना नाम नीरू भेड़ा से बदलकर ‘राखी सावंत’ रख लिया। बॉलीवुड में एंट्री करने के बाद उन्हें डांस नंबर्स और छोटे-मोटे किरदारों से पहचान मिलने लगी। इसके बाद ‘मीका सिंह किस विवाद’ से लेकर ‘बिग बॉस’ के घर तक, राखी सावंत ने खुद को इंडस्ट्री की ऐसी ‘आइटम गर्ल’ और ‘एंटरटेनर’ के रूप में स्थापित कर लिया, जिसे लोग चाहकर भी नजरअंदाज नहीं कर सकते थे।
प्यार की पहली तलाश और ईसाई धर्म अपनाना
करियर की ऊंचाइयों और लगातार बने रहने वाले विवादों के बीच राखी हमेशा एक सच्चे हमसफर और सुकून भरे परिवार की तलाश में थीं। इसी दौरान उनकी जिंदगी में ईसाइयत (Christianity) का प्रवेश हुआ। राखी ने कई साक्षात्कारों में यह खुलकर स्वीकार किया था कि जब उनकी जिंदगी में डिप्रेशन, अकेलापन और परेशानियां बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं, तब उन्हें ईसाई धर्म और यीशु मसीह (Jesus) की प्रार्थनाओं में मानसिक शांति मिली।
प्रार्थना सभाओं और चर्च जाने के बाद राखी ने ईसाई धर्म अपनाने का फैसला किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई बार भगवान यीशु के प्रति अपनी आस्था जाहिर की और खुद को एक सच्चा क्रिश्चियन बताया। इस दौरान राखी की जिंदगी में रितेश नाम के एक एनआरआई शख्स की एंट्री हुई। राखी ने रितेश से शादी करने का दावा किया और लंबे समय तक उनकी शादी सस्पेंस बनी रही। राखी का कहना था कि उन्होंने रितेश से हिंदू और क्रिश्चियन रीति-रिवाजों से शादी की है। ‘बिग बॉस 15’ में राखी ने दुनिया के सामने अपने पति रितेश को पहली बार पेश भी किया।
लेकिन यह खुशी बहुत कम समय के लिए ही टिक सकी। शो से बाहर आने के कुछ ही समय बाद राखी और रितेश के रिश्तों में कड़वाहट आ गई। बाद में मीडिया के सामने यह खुलासा हुआ कि रितेश पहले से ही शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। रितेश ने राखी से यह बात छिपाकर रखी थी। जिस इंसान के लिए राखी ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था, उसने उन्हें कानूनी और भावनात्मक रूप से धोखा दिया। राखी इस धोखे से पूरी तरह टूट गईं और रोते-बिलखते हुए उन्होंने रितेश से अपने रास्ते अलग कर लिए।
आदिल खान दुर्रानी से मुलाकात और इस्लाम कुबूल करना
रितेश के साथ हुए दर्दनाक अंत के बाद राखी सावंत एक बार फिर बिल्कुल अकेली पड़ गई थीं। इसी मुश्किल दौर में मैसूर के बिजनेसमैन आदिल खान दुर्रानी की उनकी जिंदगी में एंट्री हुई। आदिल ने राखी को संभाला, उनके साथ सांत्वना जताई और उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उनसे सच्चा प्यार करते हैं। राखी को लगा कि आखिरकार उन्हें वह इंसान मिल गया है, जो उनकी कद्र करता है और उन्हें एक सुरक्षित भविष्य दे सकता है।
आदिल से शादी करने और उनके परिवार में स्वीकार किए जाने के लिए राखी सावंत ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लिया। उन्होंने मई 2022 में अपना धर्म बदलकर इस्लाम कबूल कर लिया और अपना नया नाम ‘फातिमा’ रखा। राखी ने आदिल से इस्लामिक रीति-रिवाजों के मुताबिक निकाह किया और कोर्ट मैरिज भी की। कुछ महीनों तक राखी ने इस निकाह को दुनिया से छुपाए रखा, क्योंकि आदिल उनसे ऐसा करने को कह रहे थे। लेकिन जब जनवरी 2023 में राखी ने अपनी शादी और इस्लाम कबूल करने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए, तो पूरी इंडस्ट्री और उनके फैंस हैरान रह गए। राखी हिजाब और अबया पहने नजर आने लगीं और उन्होंने उमराह करने का फैसला भी किया।
‘फातिमा’ बनने के बाद भी मिला दिल तोड़ देने वाला धोखा
राखी को लगा था कि धर्म बदलकर ‘फातिमा’ बनने और आदिल को अपना सर्वस्व मानने के बाद उनकी जिंदगी में खुशियां लौट आएंगी, लेकिन उनकी किस्मत में एक बार फिर छल ही लिखा था। शादी के कुछ ही महीनों बाद दोनों के रिश्ते में दरारें आ गईं। राखी की मां का जब कैंसर और ब्रेन ट्यूमर के कारण निधन हुआ, उस कठिन समय में भी राखी ने आदिल पर कई गंभीर आरोप लगाए।
राखी सावंत ने मीडिया के सामने आकर फूट-फूटकर रोते हुए आदिल खान दुर्रानी पर गंभीर आरोप लगाए। राखी का कहना था कि आदिल का किसी दूसरी लड़की के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चल रहा है। उन्होंने आदिल पर मारपीट करने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, उनके करोड़ों रुपये और गहने हड़पने तथा धोखे से उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। राखी ने यह भी कहा कि आदिल ने उनका इस्तेमाल केवल पब्लिसिटी और बॉलीवुड में एंट्री पाने के लिए किया था। मामला इतना बढ़ गया कि राखी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने आदिल खान दुर्रानी को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें काफी समय जेल में बिताना पड़ा।
प्यार और विश्वास के भंवर में फंसी राखी सावंत
हिंदू परिवार में जन्म लेने से लेकर ईसाई धर्म में शांति ढूंढने और फिर प्यार की खातिर इस्लाम अपनाकर ‘फातिमा’ बनने तक—राखी सावंत का यह पूरा सफर भावनात्मक रूप से बेहद दर्दनाक रहा है। जिन दो पुरुषों (रितेश और आदिल) के लिए उन्होंने अपनी पहचान, अपने विश्वास और अपनी जिंदगी के सिद्धांतों तक को बदल दिया, उन दोनों ही रिश्तों का अंत कानूनी मुकदमों, पुलिस स्टेशनों और सार्वजनिक आरोपों-प्रत्यारोपों के साथ हुआ।
आज राखी सावंत अपनी जिंदगी में अकेले ही आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, वह मीडिया और कैमरे के सामने अब भी हंसती-हंसाती और अपने अनोखे अंदाज में नजर आती हैं, लेकिन उनके इस ड्रामे और चेहरे के पीछे का दर्द छुपा नहीं रहता। राखी सावंत की यह कहानी यह साबित करती है कि कई बार इंसान प्यार और अपनेपन की तलाश में हर सीमा लांघने को तैयार हो जाता है, लेकिन अगर नीयत सही न हो, तो धर्म परिवर्तन और बड़ी-बड़ी कुर्बानियां भी किसी रिश्ते को टूटने से नहीं बचा सकतीं।
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