भारतीय एथलेटिक्स के ‘गोल्डन बॉय’ और ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन से पूरी दुनिया में तिरंगे का परचम लहराया है। वैश्विक पहचान और अपार सफलता हासिल करने के बाद भी नीरज चोपड़ा अपनी जड़ों को नहीं भूले हैं। इसका सबसे बड़ा और खूबसूरत उदाहरण हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित उनका पैतृक गांव ‘खंडरा’ (Khandra) है, जहां उन्होंने अपना तीन मंजिला आलीशान बंगला बनवाया है।
करीब 30 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाला यह बंगला आधुनिक वास्तुकला, सादगी और हरियाणवी संस्कृति का एक अनोखा संगम है। इस घर की सबसे खास बात जो आज देश भर में चर्चा का विषय बनी हुई है, वह है इसके प्रांगण में खड़ी गाड़ियों का संग्रह—जहां करोड़ों रुपये की लग्जरी कारों के ठीक बगल में खेतों में चलने वाले ट्रैक्टर खड़े दिखाई देते हैं।
मुख्य प्रवेश द्वार: ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और पारिवारिक विरासत
नीरज चोपड़ा के घर का मुख्य द्वार ही वहां आने वाले मेहमानों को उनकी सोच और संस्कारों का अहसास करा देता है। सफेद और क्रीम रंगों के भव्य संयोजन से बने इस बंगले के मुख्य गेट पर एक तरफ सुनहरे अक्षरों में ‘Chopra’s’ लिखा है, वहीं उसके ठीक पास एक काली पट्टिका पर संस्कृत का प्रसिद्ध श्लोक “वसुधैव कुटुंबकम” (संपूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है) उकेरा गया है।
मेट्रो शहरों की भीड़भाड़ और बहुमंजिला अपार्टमेंट्स से दूर, नीरज ने अपने गृह राज्य हरियाणा के अपने ही गांव में इस तीन मंजिला हवेली का निर्माण कराया। लगभग 100 किलोमीटर दूर दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के पास स्थित खंडरा गांव में यह बंगला दूर से ही अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है।

गैराज में अनोखा दृश्य: 3 करोड़ की ऑडी के बगल में खड़ा ट्रैक्टर
नीरज चोपड़ा के इस बंगले की सबसे अनूठी तस्वीर उनके गैराज और पार्किंग एरिया से सामने आती है। जहां आमतौर पर करोड़ों के बंगले में केवल महंगी स्पोर्ट्स कारें ही देखने को मिलती हैं, वहीं नीरज के ड्राइववे में आधुनिक लग्जरी वाहनों के साथ किसान परिवार की पहचान ‘ट्रैक्टर’ भी शान से खड़े रहते हैं।
नीरज के पास इसके अलावा हार्ले-डेविडसन 1200 रोडस्टर बाइक और उनकी पहली मोटरसाइकिल बजाज पल्सर 220F भी है, जिसे उन्होंने पुरानी यादों के तौर पर संभालकर रखा है। जब कैमरों की नजर उनकी कारों पर पड़ती है, तो पास में खड़े ट्रैक्टर इस बात की याद दिलाते हैं कि दुनिया के शिखर पर पहुंचने के बाद भी यह परिवार अपनी खेती-किसानी की जड़ों से उतना ही मजबूती से जुड़ा हुआ है।
अंदरूनी सज्जा: सादगी, आधुनिकता और शांति का संगम
नीरज चोपड़ा के घर के इंटीरियर डिजाइन में किसी भी तरह की तड़क-भड़क की जगह ‘मिनिमलिज्म’ (न्यूनतम और शालीन डिजाइन) को प्राथमिकता दी गई है।
- रंगों का चुनाव: पूरे घर में क्रीम, बेज, हल्के भूरे (वार्म वुड) और सफेद रंगों का मुख्य रूप से इस्तेमाल किया गया है, जो घर को एक शांत और प्राकृतिक लुक देते हैं।
- लिविंग रूम: बैठक क्षेत्र में आधुनिक और आरामदायक सोफा सेट, न्यूट्रल पर्दे और लकड़ी के फिनिश वाले फर्नीचर लगे हैं। यहां अतिशयोक्तिपूर्ण सजावट के बजाय खुली जगह और रोशनी का विशेष ध्यान रखा गया है।
- ओपन बालकनी और लॉन: बंगले के तीनों तलों पर विस्तृत बालकनियां हैं, जहां से चारों ओर फैले हरे-भरे खेतों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। घर के बाहर एक बड़ा हरा-भरा लॉन और गार्डन एरिया है, जहां झूला और बैठने की व्यवस्था की गई है। यह स्थान पारिवारिक सम्मेलनों और गांव के लोगों के बैठने के काम आता है।
समर्पित ट्रॉफी रूम: सफलताओं का एक जीवंत इतिहास
इस तीन मंजिला हवेली का सबसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक हिस्सा है—‘ट्रॉफी रूम’। इस कमरे में नीरज चोपड़ा के करियर के वे सभी ऐतिहासिक पल दर्ज हैं, जिन्होंने भारतीय खेल इतिहास को एक नया मोड़ दिया।
- ओलंपिक पदक: टोक्यो 2020 का ऐतिहासिक स्वर्ण पदक और पेरिस 2024 का रजत पदक।
- विश्व चैंपियनशिप व अन्य पदक: वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और डायमंड लीग के ट्राफियां व मेडल।
- स्मृति चिन्ह और तस्वीरें: प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों द्वारा दिए गए सम्मान और नीरज के ऐतिहासिक थ्रो के समय खींची गई दुर्लभ तस्वीरें यहां फ्रेम करके सजाई गई हैं।
इसके अलावा घर के भीतर एक आधुनिक पर्सनल जिम भी तैयार किया गया है, जहां नीरज अभ्यास से ब्रेक के दौरान भी अपनी फिटनेस दिनचर्या को बनाए रखते हैं। खाली समय में मनोरंजन के लिए पूल टेबल और ध्यान (Meditation) के लिए एक शांत कोना भी बनाया गया है, जहां वे अपने पालतू कुत्ते ‘टोक्योज़’ (Tokyo) के साथ समय बिताते हैं।
संयुक्त परिवार की संस्कृति और गांव से प्रेम
ज्यादातर वैश्विक खेल हस्तियां अपनी सफलता के बाद मुंबई या दिल्ली जैसे महानगरों में पेंटहाउस या प्राइम लोकेशन पर शिफ्ट हो जाती हैं। लेकिन नीरज चोपड़ा ने अपनी जमापूंजी का एक बड़ा हिस्सा अपने पैतृक गांव खंडरा में लगाया।
नीरज आज भी अपने संयुक्त परिवार (चाचा-चाची, माता-पिता और भाई-बहनों) के साथ एक ही छत के नीचे रहते हैं। उनकी यह सोच भारत के ग्रामीण युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है कि अपनी परंपराओं, परिवार और माटी के प्रति निष्ठा बनाए रखते हुए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के सर्वोच्च शिखर को छुआ जा सकता है।
पानीपत स्थित यह 30 करोड़ रुपये का बंगला सिर्फ एक ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता तक की उस अविश्वसनीय यात्रा का प्रतीक है, जिसने खंडरा गांव के एक साधारण लड़के को देश का सबसे बड़ा ‘गोल्डन बॉय’ बना दिया।
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