जनसमाज संवाददाता,नई दिल्ली : बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत अक्सर अपने बेबाक और बेधड़क बयानों के कारण सुर्खियों में रहती हैं। सिनेमा के पर्दे से लेकर राजनीति के गलियारों तक, उनका हर बयान किसी न किसी बड़े विवाद को जन्म दे देता है। हाल ही में कंगना रनौत ने देश की युवा पीढ़ी यानी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) को लेकर एक बेहद विवादित टिप्पणी कर दी थी, जिसमें उन्होंने इस नई पीढ़ी के लिए “गटर जेनरेशन” (Gutter Generation) शब्द का इस्तेमाल किया था।
कंगना के इस बयान के आते ही सोशल मीडिया से लेकर देश के राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर बवाल मच गया। युवाओं, सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी दलों ने उन्हें आड़े हाथों लिया और जमकर आलोचना की। जब विवाद बेहद बढ़ गया और चौतरफा घिरती दिखीं, तो आखिरकार कंगना रनौत को इस पर अपनी सार्वजनिक सफाई पेश करनी पड़ी। उन्होंने न केवल अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया, बल्कि इस पूरे मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और नेतृत्व से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
क्या था पूरा विवाद? क्यों कहा ‘गटर जेनरेशन’?
विवाद की शुरुआत एक साक्षात्कार के दौरान हुई, जब कंगना रनौत आज के डिजिटल युग, सोशल मीडिया संस्कृति और युवा पीढ़ी के जीवन जीने के तरीकों पर चर्चा कर रही थीं। उन्होंने कहा था कि आज का युवा शॉर्ट्स, रील्स, त्वरित संतुष्टि (Instant Gratification) और सोशल मीडिया के आभासी जाल में उलझकर रह गया है।
अपनी बात को आक्रामक अंदाज में रखते हुए कंगना ने कहा था कि यदि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति, मेहनत और जमीनी हकीकत से दूर होकर केवल इंटरनेट की रील्स और फूहड़ सामग्री में अपना समय बर्बाद करेगी, तो यह देश का भविष्य कैसे बनाएगी? इसी संदर्भ में उन्होंने ‘गटर जेनरेशन’ जैसे कठोर शब्द का प्रयोग कर दिया था।
कंगना का यह बयान सामने आते ही इंटरनेट पर वायरल हो गया। जेन ज़ी (1990 के दशक के उत्तरार्ध से 2010 के दशक की शुरुआत के बीच जन्मे युवा) ने इसे बेहद अपमानजनक करार दिया। लोगों का कहना था कि देश के विकास, स्टार्टअप कल्चर, टेक्नोलॉजी, खेल और शिक्षा के क्षेत्र में आज की युवा पीढ़ी नए आयाम स्थापित कर रही है। ऐसे में पूरे युवा वर्ग को केवल सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए ‘गटर’ कह देना एक जन प्रतिनिधि (सांसद) को शोभा नहीं देता।
विवाद बढ़ने पर कंगना रनौत की आई सफाई
चौतरफा घिरने के बाद और सोशल मीडिया पर बढ़ते ट्रोल्स को देखते हुए कंगना रनौत ने अपने रुख में थोड़ा बदलाव किया और अपने बयान पर विस्तृत सफाई जारी की। कंगना ने स्पष्ट किया कि उनके बयान के पीछे का उद्देश्य पूरी युवा पीढ़ी को नीचा दिखाना या उनका अपमान करना नहीं था, बल्कि वह उन युवाओं के प्रति अपनी चिंता व्यक्त कर रही थीं जो पश्चिमी प्रभाव और डिजिटल भटकाव के कारण अपनी क्षमता खो रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि उनके बयान को संदर्भ से बाहर निकालकर पेश किया गया और राजनीतिक लाभ उठाने के लिए तिल का ताड़ बनाया गया। वह युवाओं का दिल दुखाना नहीं चाहती थीं, बल्कि उन्हें एक चेतावनी और सीख देना चाहती थीं कि वे अपना कीमती समय सोशल मीडिया के निरर्थक रुझानों में नष्ट न करें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कंगना रनौत ने क्या कहा?
अपनी सफाई के दौरान कंगना रनौत ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और युवाओं को लेकर उनके दृष्टिकोण की जमकर तारीफ की। कंगना ने पीएम मोदी को युवाओं के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बताया।
कंगना ने पीएम मोदी का जिक्र करते हुए कहा:
- युवा शक्ति पर पीएम मोदी का अटूट विश्वास: “आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हमेशा यह मानते हैं कि 21वीं सदी भारत की है और इसका श्रेय हमारी ‘युवा शक्ति’ (Youth Power) को जाता है। पीएम मोदी ने हमेशा युवाओं को ‘विकसित भारत 2047’ का मुख्य स्तंभ माना है।”
- स्टार्टअप और नए अवसरों की क्रांति: “पीएम मोदी की नीतियों ने देश के करोड़ों युवाओं को जॉब सीकर (नौकरी मांगने वाले) के बजाय जॉब क्रिएटर (नौकरी देने वाले) बनाया है। स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया, और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने युवाओं को अपनी प्रतिभा साबित करने का एक बेहतरीन मंच दिया है।”
- दिशा और मार्गदर्शन की जरूरत: “प्रधानमंत्री मोदी जी लगातार युवाओं को परीक्षा पे चर्चा, खेलकूद, फिटनेस और इनोवेशन के माध्यम से सही दिशा में प्रेरित करते हैं। पीएम मोदी का विजन स्पष्ट है कि अगर युवा शक्ति अनुशासित होगी और राष्ट्र निर्माण में लगेगी, तो भारत को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने से कोई नहीं रोक सकता।”
कंगना ने यह भी कहा कि पीएम मोदी का युवाओं के प्रति जो विजन है, उसी विजन को आगे बढ़ाना उनका भी कर्तव्य है। इसलिए जब वह युवाओं को किसी गलत राह पर भटकते देखती हैं, तो एक अभिभावक और सांसद के रूप में अपनी कड़वी बात रखने से पीछे नहीं हटतीं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और जनता की राय
कंगना के बयान और उनकी सफाई के बाद भी यह मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। विपक्षी दलों ने कंगना पर हमला बोलना जारी रखा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव जीतकर संसद पहुंचने के बाद भी कंगना अपने विवादित बयान देने की आदत से बाज नहीं आ रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि युवाओं को अपमानित करने के बाद पीएम मोदी का नाम लेकर अपने बयान को सही ठहराना कंगना की पुरानी रणनीति है।
दूसरी ओर, कंगना के समर्थकों का तर्क है कि कंगना की भाषा भले ही कठोर रही हो, लेकिन उनका इरादा गलत नहीं था। आज के समय में सोशल मीडिया की लत और अश्लील व निरर्थक कंटेंट जिस तरह युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, उस पर खुलकर चर्चा होना बेहद जरूरी है।
कंगना रनौत का ‘गटर जेनरेशन’ वाला बयान और उसके बाद की गई सफाई यह दर्शाती है कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों का चयन कितना महत्वपूर्ण होता है। एक तरफ जहां भारत की ‘जेन ज़ी’ तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप्स के दम पर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल युग के खतरे और भटकाव भी एक कड़वी सच्चाई हैं। कंगना रनौत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए युवाओं को अनुशासन, मेहनत और राष्ट्र निर्माण के रास्ते पर चलने की सलाह दी है, हालांकि उनकी शब्दावली को लेकर बहस अभी भी जारी है।
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