‘तमिलनाडु से भी बन सकता है PM’: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का बड़ा बयान, राजनीतिक गलियारों में हलचल

भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के एक हालिया बयान ने देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। तमिलनाडु के अपने आधिकारिक दौरे के दौरान मदुरै में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में तमिलनाडु से भी कोई व्यक्ति भारत का प्रधानमंत्री बन सकता है। भारतीय लोकतंत्र की समावेशी ताकत और विविधता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति के इस वक्तव्य ने राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के बयान का मुख्य अंश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों के प्रतिनिधित्व की मिसाल पेश की। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि यह हर नागरिक को सर्वोच्च पद तक पहुँचने का समान अवसर प्रदान करता है।

“हमारे पास कर्नाटक से प्रधानमंत्री रहे हैं। वर्तमान में हमारे पास गुजरात से प्रधानमंत्री हैं। इसी तरह, एक दिन ऐसा भी आएगा जब तमिलनाडु से भी कोई व्यक्ति देश के प्रधानमंत्री पद को सुशोभित करेगा। दुनिया की कोई भी ताकत भारत को वैश्विक महाशक्ति बनने से नहीं रोक सकती।” — सी.पी. राधाकृष्णन, उपराष्ट्रपति

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में नेतृत्व क्षमता किसी भौगोलिक सीमा या राज्य तक सीमित नहीं होती। जब देश के अलग-अलग राज्यों के नेता देश का नेतृत्व कर चुके हैं, तो आने वाले समय में तमिलनाडु से भी कोई योग्य नेता इस मुकाम तक जरूर पहुँचेगा।

मदुरै दौरे और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी

यह वक्तव्य उपराष्ट्रपति ने मदुरै दौरे के दौरान दिया। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के साथ प्रसिद्ध मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की और देश तथा राज्यवासियों की समृद्धि, सुख व शांति के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही, उन्होंने पासुमपोंग मुथुरामलिंग थेवर की जयंती और गुरु पूजा कार्यक्रम में हिस्सा लेकर श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

मंदिर परिसर से बाहर आते समय जब संवाददाताओं ने उनसे देश के भावी राजनीतिक परिदृश्य और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर सवाल पूछा, तब उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की शक्ति का उल्लेख करते हुए यह टिप्पणी की।

तमिलनाडु का राजनीतिक इतिहास और सर्वोच्च पदों पर योगदान

अगर भारत के राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास पर नजर डाली जाए, तो तमिलनाडु का योगदान हमेशा से अभूतपूर्व रहा है। भले ही आज तक तमिलनाडु से कोई व्यक्ति भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन नहीं हुआ है, लेकिन राज्य ने देश को कई महान विचार-विमर्शकर्ता और संवैधानिक प्रमुख दिए हैं:

  • राष्ट्रपति: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. आर. वेंकटरमण और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तित्वों ने राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया है।
  • उपराष्ट्रपति: राज्य से अब तक तीन उपराष्ट्रपति बने हैं, जिनमें वर्तमान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन स्वयं शामिल हैं।
  • केन्द्रीय नेतृत्व: स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी), के. कामराज, सी. सुब्रमण्यम और आर. वेंकटरमण जैसे दिग्गजों ने राष्ट्रीय राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई है।

ऐतिहासिक रूप से 1960 के दशक में ‘किंगमेकर’ कहे जाने वाले के. कामराज के पास खुद प्रधानमंत्री बनने के मौके थे, लेकिन उन्होंने हमेशा संगठन और अन्य नेताओं को प्राथमिकता दी। ऐसे में उपराष्ट्रपति के इस बयान ने तमिलनाडु के ऐतिहासिक राजनीतिक प्रभाव की यादें ताजा कर दी हैं।

राजनीतिक विश्लेषण और बयान के मायने

उपराष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत और केंद्र के रिश्तों को लेकर अक्सर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चलती रहती हैं। हाल ही में तमिलनाडु में क्षेत्रीय दलों और युवा नेताओं के बढ़ते प्रभाव के बीच इस तरह की टिप्पणी के कई राजनीतिक और रणनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं:

  1. दक्षिण भारत की राष्ट्रीय भूमिका: राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाता है कि देश के सबसे शीर्ष पदों के दरवाजे भारत के हर हिस्से, विशेषकर दक्षिण भारत के नेताओं के लिए समान रूप से खुले हैं।
  2. समावेशी लोकतंत्र की मजबूती: यह वक्तव्य इस बात को रेखांकित करता है कि भारत का लोकतंत्र विविधता में एकता का प्रतीक है और हर राज्य के नेतृत्व में देश को आगे ले जाने की क्षमता है।
  3. वैश्विक महाशक्ति बनने का संकल्प: उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में देश विश्व की प्रमुख महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारतीय संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जताया गया गहरा विश्वास है। भविष्य में चाहे किसी भी राज्य से प्रधानमंत्री बने, लेकिन तमिलनाडु जैसे समृद्ध सांस्कृतिक व राजनीतिक इतिहास वाले राज्य के प्रति जताई गई यह उम्मीद देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत बनाती है।

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  • Rahul Kaushik

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