उत्तराखंड: जोशीमठ में भीषण हेलीकॉप्टर हादसा; पायलट समेत सभी 6 सवारों की दर्दनाक मौत, मलबे में तब्दील हुआ चॉपर

पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के चमोली जिले से एक बेहद दर्दनाक और दर्दनाक खबर सामने आई है। प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनाथ धाम से यात्रियों को लेकर आ रहा एक निजी विमानन कंपनी का हेलीकॉप्टर जोशीमठ तहसील के पास भयानक हादसे का शिकार हो गया। इस भीषण दुर्घटना में हेलीकॉप्टर में सवार पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

हादसा जोशीमठ के पास स्थित ‘हाथी पर्वत’ और चायी गांव के दुर्गम पहाड़ी इलाके में हुआ। टक्कर इतनी भीषण थी कि आसमान से गिरते ही हेलीकॉप्टर चकनाचूर हो गया और उसके हिस्से दूर-दूर तक खाई तथा पहाड़ियों पर बिखर गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, भारतीय सेना (Army), एसडीआरएफ (SDRF) और आईटीबीपी (ITBP) की टीमों ने बेहद विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मौके पर पहुंचकर राहत व बचाव अभियान शुरू किया।

बद्रीनाथ से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद टूटा संपर्क

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन (Trans Bharat Aviation) का यह सिविल हेलीकॉप्टर (कॉल साइन VT-HCX) बद्रीनाथ धाम स्थित हेलीपैड से दोपहर लगभग 1:12 बजे देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था। उड़ान भरने के महज दो मिनट के भीतर, दोपहर 1:14 बजे के आसपास, जब हेलीकॉप्टर जोशीमठ घाटी के ऊपर से गुजर रहा था, तभी अचानक एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और रेडियो टेलीफोनी से इसका संपर्क टूट गया।

उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के ट्रैकिंग सिस्टम से भी चॉपर की लोकेशन अचानक गायब हो गई। पास की सैन्य सिग्नल सेंटर की टीम ने हेलीकॉप्टर से धुआं निकलते और तेजी से नीचे की ओर गिरते देखा, जिसके तुरंत बाद अलर्ट जारी किया गया।

उड़ान का विवरण:
- कंपनी: ट्रांस भारत एविएशन (Trans Bharat Aviation)
- रूट: बद्रीनाथ धाम ➔ सहस्त्रधारा हेलीपैड (देहरादून)
- दुर्घटना स्थल: चायी गांव / हाथी पर्वत इलाका, जोशीमठ (चमोली)
- कुल सवार: 6 (1 पायलट + 5 यात्री)
- हताहत: सभी 6 व्यक्तियों की मृत्यु

मृतकों की पहचान: कर्नाटक के 5 श्रद्धालु और पायलट शामिल

हादसे की सूचना मिलने के बाद जब खोज एवं बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचा, तो पूरा मंजर दिल दहला देने वाला था। हेलीकॉप्टर के परखच्चे उड़े हुए थे और उसमें आग लग गई थी। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हादसे में किसी भी व्यक्ति के जीवित बचने की गुंजाइश नहीं रही।

हेलीकॉप्टर को अनुभवी कैप्टन हिमांशु सभरवाल उड़ा रहे थे। चॉपर में सवार पांचों यात्री कर्नाटक (मुख्य रूप से बेंगलुरु) के रहने वाले थे, जो बद्रीनाथ धाम में दर्शन और पूजा-अर्चना करने के बाद लौट रहे थे।

क्रमनामविवरण / निवास
1कैप्टन हिमांशु सभरवालमुख्य पायलट
2प्रतापयात्री (कर्नाटक/बेंगलुरु)
3अरुणयात्री (कर्नाटक/बेंगलुरु)
4शंकर गौड़ायात्री (कर्नाटक/बेंगलुरु)
5सुधीर के.यात्री (कर्नाटक/बेंगलुरु)
6एच. एस. नटराजायात्री (कर्नाटक/बेंगलुरु)

मृतकों के परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दे दी गई है और शवों को पोस्टमॉर्टम व आगे की कागजी प्रक्रियाओं के लिए जिला अस्पताल भेजने की तैयारी की जा रही है।

खराब मौसम और कम दृश्यता बनी बचाव अभियान में बाधा

घटनास्थल अत्यंत दुर्गम और ऊंचाई वाला क्षेत्र है। हादसे के समय इलाके में अचानक घना कोहरा छा गया था, साथ ही तेज हवाओं और रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण दृश्यता (visibility) नाममात्र की रह गई थी। घने बादलों के कारण रेस्क्यू टीमों को मलबे तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

चमोली पुलिस, एसडीआरएफ, सेना और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से पैदल मार्गों के जरिए राहत दल दुर्घटनास्थल तक पहुंचे और सभी छह शवों को बाहर निकाला।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया शोक, दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि जोशीमठ के पास हेलीकॉप्टर क्रैश की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

उच्चस्तरीय कार्रवाई और निर्णय:

  • बेड़े पर रोक: उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने एहतियाती कदम उठाते हुए संबंधित कंपनी ‘ट्रांस भारत एविएशन’ के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को तत्काल प्रभाव से ग्राउंडेड (उड़ान पर रोक) कर दिया है।
  • AAIB और DGCA जांच: हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम रवाना हो चुकी है और मामले की विस्तृत तकनीकी जांच ‘एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो’ (AAIB) को सौंप दी गई है।

हिमालयी क्षेत्रों में हवाई सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

चारधाम यात्रा और उत्तराखंड के उच्च हिमाचली क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाएं यात्रियों के लिए सुगम माध्यम मानी जाती हैं, लेकिन इस प्रकार की दुर्घटनाओं ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ान की सुरक्षा और मौसम निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहाड़ों में अचानक बदलने वाला मौसम, तेज हवाएं और घने बादल अक्सर पायलटों के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं।

जांच एजेंसियां अब हेलीकॉप्टर के ब्लैक बॉक्स और एटीसी के रिकॉर्डिंग डेटा के आधार पर यह जांच करेंगी कि दुर्घटना का मुख्य कारण कोई तकनीकी खराबी (technical snag) था या फिर खराब मौसम और विजिबिलिटी की कमी। देश भर से बद्रीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं और मृतकों के गृह राज्य कर्नाटक में इस दुखद हादसे के बाद शोक की लहर दौड़ गई है।

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  • Rahul Kaushik

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