साइक्लोन अर्नब का रूट और लखनऊ-गोरखपुर कनेक्शन

बंगाल की खाड़ी से उठा भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) ने तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाने के बाद अपनी दिशा बदल ली है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, यह चक्रवात आंध्र प्रदेश के तट (बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यनम के पास) पर लैंडफॉल (Landfall) की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। लैंडफॉल के बाद इस सिस्टम के कमजोर पड़ने और उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। आइए विस्तार से जानते हैं कि लैंडफॉल के बाद यह तूफान किधर रुख कर रहा है और उत्तर प्रदेश के लखनऊ और गोरखपुर से इसका क्या कनेक्शन है।

लैंडफॉल के बाद किधर आगे बढ़ रहा है साइक्लोन अर्नब?

जब कोई चक्रवाती तूफान समुद्र से जमीन पर टकराता है (लैंडफॉल), तो उसे समुद्र से मिलने वाली नमी और ऊर्जा कट जाती है, जिससे वह धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। हालांकि, कमजोर होने के बावजूद इसका असर बहुत व्यापक होता है।

साइक्लोन अर्नब लैंडफॉल के बाद उत्तर-पश्चिम (North-West) दिशा की ओर बढ़ रहा है। आंध्र प्रदेश से यह सिस्टम आगे बढ़कर तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मध्य भारत के हिस्सों को पार करते हुए उत्तर भारत की तरफ रुख कर रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस चक्रवात के अवशेष (Remnants) और इसके प्रभाव से बनने वाला नमी युक्त बादलों का दायरा उत्तर प्रदेश तक पहुंचेगा। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का सिलसिला जारी है।

क्या है लखनऊ और गोरखपुर कनेक्शन?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह नगर गोरखपुर का इस वेदर सिस्टम से सीधा और गहरा कनेक्शन सामने आया है। इस भयंकर चक्रवात के प्रभाव का असर यूपी के कई जिलों पर दिखने वाला है, जिसमें लखनऊ और गोरखपुर क्षेत्र विशेष रूप से शामिल हैं:

  1. तूफान के अवशेषों का उत्तर प्रदेश पहुंचना: आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के रास्ते होते हुए जब यह मौसमी सिस्टम उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करेगा, तब तक यह एक गहरे निम्न दबाव (Deep Depression) या कम दबाव के क्षेत्र में बदल चुका होगा। इसके बावजूद इसमें पर्याप्त नमी होगी, जो यूपी के आसमान में घने बादल और मूसलाधार बारिश का कारण बनेगी।
  2. लखनऊ और आसपास के जिलों पर असर: राजधानी लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, कानपुर और अयोध्या जैसे इलाकों में इस चक्रवात के प्रभाव से तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश होने की पूरी संभावना है। हवा की रफ्तार सामान्य से अधिक रह सकती है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी और ठंडक बढ़ेगी।
  3. गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्थिति: गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर और देवरिया सहित पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस मौसमी उथल-पुथल का असर साफ नजर आएगा। चूंकि यह सिस्टम पूरब और उत्तर-पूर्व की तरफ बढ़ेगा, इसलिए गोरखपुर और नेपाल की तराई से लगे इलाकों में झमाझम बारिश के साथ वज्रपात (बिजली गिरने) और तेज हवाएं चलने का खतरा बढ़ गया है।
  4. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) से टकराव: मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब दक्षिण से आ रहा इस चक्रवात का नमी वाला हिस्सा उत्तर प्रदेश और नेपाल के ऊपर पहुंचेगा, तो उत्तर भारत में सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ से इसकी टक्कर हो सकती है। इस डबल सिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश और पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में पानी बढ़ने से मैदानी इलाकों की नदियों पर भी असर पड़ सकता है।

किसानों और आम जनजीवन पर प्रभाव

इस चक्रवात के उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गोरखपुर और अन्य जनपदों तक प्रभाव डालने के कारण धान की पकी हुई फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। जिन किसानों की फसलें कटाई के लिए तैयार हैं या खेतों में खड़ी हैं, उनके लिए यह चिंता का विषय बन गया है। प्रशासन ने भी एहतियात के तौर पर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

संक्षेप में कहें तो, आंध्र प्रदेश के तट पर तबाही मचाने के बाद साइक्लोन अर्नब भले ही कमजोर पड़ गया हो, लेकिन इसका बचा हुआ तंत्र उत्तर भारत की ओर बढ़ते हुए लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक झमाझम बारिश और मौसम में अचानक बड़े बदलाव का मुख्य कारण बन रहा है।

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  • Rahul Kaushik

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