जामिया यूनिवर्सिटी में भारी बवाल, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद हिरासत में

नई दिल्ली:राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी इन दिनों भारी उथल-पुथल और तनाव के दौर से गुजर रही है। विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संघ (Student Union) की बहाली और अन्य मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। इसी कड़ी में, शुक्रवार देर शाम कांग्रेस पार्टी के लोकसभा सांसद इमरान मसूद छात्रों का समर्थन करने और उनकी सुध लेने के लिए जामिया परिसर पहुंचे। हालांकि, पुलिस और सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सांसद इमरान मसूद को परिसर के बाहर से हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद से दिल्ली की सियासत में और अधिक गर्माहट आ गई है, तथा विश्वविद्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।

क्या है पूरा मामला और छात्रों का प्रदर्शन?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनावों की बहाली की मांग को लेकर छात्र लंबे समय से मुखर हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में पिछले लगभग दो दशकों (लगभग 20 वर्षों) से छात्र संघ के चुनाव नहीं कराए गए हैं, जिससे छात्रों को अपनी लोकतांत्रिक आवाज़ उठाने का उचित मंच नहीं मिल पा रहा है। छात्रों की मुख्य मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द से जल्द चुनाव कराने के लिए एक आधिकारिक कमेटी का गठन करे, चुनावों की तारीखों का ऐलान करे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बिना किसी और देरी के पुनः शुरू करे।

इस आंदोलन के तहत कई छात्र और छात्राएं भूख हड़ताल पर भी बैठे हुए हैं, जिससे स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। प्रशासन और छात्रों के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया जब 17 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों को गेट नंबर-7 के पास स्थित गालिब लॉन से हटाने का प्रयास किया गया। इस दौरान कई छात्र संगठनों ने खुलकर इस आंदोलन का समर्थन किया है।

इमरान मसूद का बयान: “मैं अपने बच्चों के लिए जान दे सकता हूँ”

छात्रों के बीच पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मीडिया और छात्रों से बात करते हुए बेहद भावुक अंदाज में कहा, “मैं अपने बच्चों के लिए अपनी जान भी दे सकता हूँ। ये मेरे बच्चे हैं और मेरे देश का भविष्य हैं। इनके अधिकारों को कुचलने की लगातार कोशिश की जा रही है।”

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर क्या वजह है कि छात्रों को कैंपस से निकाला जा रहा है और स्टूडेंट यूनियन को बहाल क्यों नहीं किया जा रहा है? प्रशासन इस लोकतांत्रिक मांग से क्यों डर रहा है?

विवादित नारों और पोस्टरों पर सफाई

हाल ही में जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर कुछ विवादित और आपत्तिजनक नारे तथा पोस्टर देखे जाने की बात सामने आई थी, जिनमें ‘फ्री कश्मीर’ और अन्य बातें लिखी गई थीं। इस मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) समेत कई अन्य संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था और निष्पक्ष जांच व एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने स्पष्ट किया कि वे या जामिया का कोई भी वास्तविक छात्र ऐसे किसी भी नारे या पोस्टर का समर्थन नहीं करता है जो देश की एकता के खिलाफ हो। उन्होंने कहा, “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। कुछ बाहरी या शरारती तत्व इस तरह के पोस्टर लगाकर चल रहे शांतिपूर्ण और जायज छात्र आंदोलन को भटकाने और कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। हम इस तरह की हरकतों की कड़ी निंदा करते हैं।”

समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी पहुंचे

जामिया के इस प्रदर्शन में केवल कांग्रेस सांसद ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी छात्रों का समर्थन करने पहुंचे थे। सपा सांसद ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की की। नदवी ने कहा कि जामिया का पूर्व छात्र होने के नाते यह उनका नैतिक कर्तव्य है कि वे संकट के समय में छात्रों के हक और उनके न्याय के लिए आवाज उठाएं। हालांकि, कुछ देर की खींचतान के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। वहीं, पुलिस सूत्रों के अनुसार कांग्रेस सांसद इमरान मसूद सहित कुल 10 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर लिखे गए विवादित नारों के सामने आने के बाद प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए केमिकल और अन्य उपायों से उन नारों को मिटवा दिया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि जिन इलाकों में ये नारे लिखे गए थे, वहां लगे कुछ सीसीटीवी कैमरों की तारों को जानबूझकर काटा या क्षतिग्रस्त किया गया था। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस पूरी करतूत के पीछे जो भी लोग शामिल होंगे, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरी घटना के बाद से जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मुख्य गेट और आसपास के परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों और सेंटर्स में प्रवेश करने से पहले छात्रों तथा आगंतुकों की सघन तलाशी और जांच की जा रही है। बिना पूरी पूछताछ और संतोषजनक पहचान के किसी भी बाहरी व्यक्ति को परिसर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

आगे की सुगबुगाहट

भले ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ के नए संविधान का एक ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक आंतरिक कमेटी का गठन किया हो, परंतु प्रदर्शनकारी छात्र इस बात पर अड़े हुए हैं कि जब तक लिखित रूप में चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हो जाता, तब तक उनका यह आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। दूसरी ओर, इस मामले में राजनीतिक दलों के नेताओं की एंट्री होने से यह मुद्दा अब केवल विश्वविद्यालय की आंतरिक व्यवस्था तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय राजधानी के बड़े राजनीतिक पटल पर चर्चा का विषय बन गया है।

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  • Rahul Kaushik

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