बॉलीवुड में जब भी किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की बात होती है, तो दर्शकों की उम्मीदें एक अलग ही स्तर पर होती हैं। फिल्ममेकर्स के पास एक ऐसा मौका होता है जहाँ वे अपनी रचनात्मकता और कसा हुआ स्क्रीनप्ले (Screenplay) दिखाकर दर्शकों को सीटों से बांध कर रख सकते हैं। सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की हालिया रिलीज फिल्म ‘तू है मेरी किरण’ (Tu Hai Meri Kiran) से भी कुछ ऐसी ही उम्मीदें थीं। फिल्म का मूल विचार (Core Idea) बेहद दिलचस्प और रोमांचक है, जो सिनेमाघरों तक खींचने के लिए काफी है। हालांकि, फिल्म सिनेमाघरों या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जब उतरती है, तो खराब और बिखरी हुई राइटिंग के चलते वह अपना पूरा प्रभाव छोड़ने में नाकामयाब साबित होती है। आइए जानते हैं कि इस फिल्म में क्या अच्छा है और कहां यह पूरी तरह से चूक गई।
कहानी का दिलचस्प आधार (Premise)
‘तू है मेरी किरण’ की सबसे बड़ी यूएसपी इसका प्लॉट है। कहानी की शुरुआत एक ऐसे अनोखे सस्पेंस के साथ होती है जो दर्शकों के भीतर जिज्ञासा पैदा करता है। फिल्म का कॉन्सेप्ट पारंपरिक लव स्टोरी या सामान्य थ्रिलर से हटकर है। इसमें रोमांस और रहस्य का एक ऐसा ताना-बाना बुनने की कोशिश की गई है, जो आधुनिक दौर के रिश्तों और उनके मनोवैज्ञानिक पहलुओं को छूता है। जब फिल्म की शुरुआत होती है, तो ऐसा लगता है कि यह कुछ नया और लीक से हटकर देखने को मिलने वाला अनुभव होगा। निर्देशक और लेखक ने एक बहुत ही मजबूत और फ्रेश आइडिया को चुना था, जिस पर एक बेहतरीन सिनेमाई इमारत खड़ी की जा सकती थी।
कमजोर राइटिंग और ढीला स्क्रीनप्ले (Weak Writing & Screenplay)
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कमजोर पटकथा (Weak Screenplay) और सुस्त रफ्तार राइटिंग है। एक बेहतरीन आइडिया होने के बावजूद, राइटर उस विचार को परवान चढ़ाने में बुरी तरह असफल रहे।
- भ्रमित करने वाली पटकथा: फिल्म के कई सीन्स ऐसे हैं जहाँ कहानी का प्लॉट अचानक से दिशाहीन हो जाता है। किरदारों के मोटिव (Motivations) स्पष्ट नहीं हैं, जिससे दर्शक खुद को कहानी से जुड़ा हुआ महसूस नहीं कर पाते।
- थ्रिलर का अभाव: एक थ्रिलर फिल्म की जान उसका सस्पेंस होता है, जो हर पल बढ़ता जाना चाहिए। लेकिन ‘तू है मेरी किरण’ में रहस्य खुलने से पहले ही कई जगह ढीले संवाद और खिंचे हुए सीक्वेंस बोर करने लगते हैं। स्क्रीनप्ले में वो कसावट गायब है जो दर्शक की धड़कनों को तेज कर सके।
- कमजोर संवाद (Dialogues): फिल्म के डायलॉग्स में गहराई की कमी साफ खलती है। गंभीर पलों में भी संवाद इतने साधारण और सपाट हैं कि वे दृश्यों के प्रभाव को बढ़ाने के बजाय और कम कर देते हैं।
अभिनय (Performances): कलाकारों ने बचाने की पूरी कोशिश की
भले ही फिल्म की राइटिंग ने निराश किया हो, लेकिन कलाकारों ने अपने अभिनय से इसे किसी तरह थामने का पूरा प्रयास किया है:
- सोनाक्षी सिन्हा (Sonakshi Sinha): सोनाक्षी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे किसी भी चुनौतीपूर्ण किरदार को अपने कंधों पर उठाने का माद्दा रखती हैं। उन्होंने अपने हिस्से के इमोशंस और इंटेंसिटी को पूरी ईमानदारी से पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। उनके एक्सप्रेशन्स कुछेक जगहों पर फिल्म की ढीली रफ्तार को संभालते नजर आते हैं।
- जहीर इकबाल (Zaheer Iqbal): जहीर इकबाल का काम ठीक-ठाक रहा है। उन्होंने सोनाक्षी के साथ अपनी केमिस्ट्री को पर्दे पर दिखाने का प्रयास किया है, लेकिन खराब लिखे गए किरदारों की वजह से उनकी क्षमता भी पूरी तरह खुलकर सामने नहीं आ पाती है।
निर्देशन, संगीत और तकनीकी पक्ष (Direction & Technical Aspects)
निर्देशन के मोर्चे पर भी फिल्म थोड़ी कच्ची नजर आती है। निर्देशक ने एक अच्छे विषय को हाथ में जरूर लिया, लेकिन उसे पर्दे पर उतारते वक्त विजन स्पष्ट नहीं दिखा। कहानी कब थ्रिलर से ड्रामा और फिर कहां भटक जाती है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
- सिनेमैटोग्राफी (Cinematography): फिल्म के विजुअल्स और सिनेमैटोग्राफी ठीक-ठाक हैं। कुछ सीन्स में थ्रिलर वाला मूड क्रिएट करने की कोशिश की गई है, जो कैमरे के काम के जरिए थोड़ा बहुत नजर भी आता है।
- संगीत (Music): फिल्म के गाने कहानी की रफ्तार को और धीमा कर देते हैं। थ्रिलर फिल्मों में गानों का जरूरत से ज्यादा होना अक्सर रोमांच के रास्ते में बाधा बनता है, और यहाँ भी यही गलती दोहराई गई है। बैकग्राउंड स्कोर (BGM) को थोड़ा और धारदार बनाया जा सकता था, जो इस शैली की फिल्मों के लिए बेहद जरूरी होता है।
देखें या न देखें?
संक्षेप में कहें तो ‘तू है मेरी किरण’ एक ऐसा शानदार आइडिया था जो खराब राइटिंग की भेंट चढ़ गया। यदि इसकी पटकथा पर थोड़ा और काम किया जाता, सीन्स को ज्यादा कसा हुआ रखा जाता और सस्पेंस को अंत तक बचाकर रखा जाता, तो यह साल की बेहतरीन थ्रिलर फिल्मों में शुमार हो सकती थी।
फिलहाल, फिल्म अपनी कमजोरियों की वजह से औसत से भी नीचे रह जाती है। अगर आप सोनाक्षी सिन्हा के बहुत बड़े फैन हैं और किसी वीकेंड पर कुछ अलग या नया तलाश रहे हैं, तो आप इसे एक मौका दे सकते हैं। अन्यथा, एक कसी हुई और रोमांचक थ्रिलर की तलाश करने वाले दर्शकों को इससे निराशा ही हाथ लगेगी।
1 thought on “तू है मेरी किरण मूवी Review: शानदार आइडिया, लेकिन कमजोर पटकथा ने डुबोई सोनाक्षी-जहीर की सस्पेंस थ्रिलर नैया”