प्रियंका बनाम राहुल: रेहान वाड्रा विवाद और कांग्रेस के अंदरूनी घमासान पर भाजपा का तीखा हमला

बीकानेर हाउस में आयोजित कला प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज फाइनल’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक बवंडर का रूप ले चुका है। रायबरेली से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की तस्वीरों पर बीकानेर हाउस प्रबंधन द्वारा आपत्ति जताए जाने और कुछ तस्वीरों को हटाने के निर्देश के बाद से देश की राजनीति गरमा गई है।

जहां एक ओर प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा खुलकर अपने बेटे के समर्थन में सामने आए हैं और इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला तथा ‘सेंसरशिप’ करार दे रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस पूरे घटनाक्रम को एक नई राजनीतिक कोण से देखना शुरू कर दिया है। भाजपा का दावा है कि यह महज एक कला प्रदर्शनी का विवाद नहीं है, बल्कि गांधी-वाड्रा परिवार के भीतर सत्ता के वर्चस्व और भविष्य के नेतृत्व को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान का नतीजा है। भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब पूरा गांधी परिवार और कांग्रेस संगठन रेहान वाड्रा के समर्थन में उतर आया है, तब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पूरे मुद्दे पर मौन क्यों साधे हुए हैं?

बीकानेर हाउस विवाद: कैसे शुरू हुई सियासी जंग?

प्रदर्शनी में रेहान वाड्रा द्वारा दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें और तिरंगे की कुछ फोटोग्राफ्स प्रदर्शित की गई थीं। बीकानेर हाउस मैनेजमेंट सोसाइटी ने इन तस्वीरों को अपनी नीति के विपरीत बताते हुए कुछ कलाकृतियों को हटाने के निर्देश दिए।

रेहान वाड्रा ने इसे कलात्मक स्वतंत्रता का हनन बताते हुए सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। इसके तुरंत बाद, प्रियंका गांधी वाड्रा ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपने बेटे के समर्थन में एक संदेश साझा किया। प्रियंका ने लिखा कि जब सत्ता में बैठे लोग किसी अभिव्यक्ति से डरने लगते हैं, तो वे अपनी शक्ति खो बैठते हैं। रॉबर्ट वाड्रा और कांग्रेस के कई वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने भी इसे सरकार की तानाशाही और सेंसरशिप करार दिया।

भाजपा का पलटवार: “रेहान को री-लॉन्च करने की साजिश”

कांग्रेस के हमलों के जवाब में भाजपा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इस विवाद के पीछे एक गहरा राजनीतिक एजेंडा बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में अब “मम्मी प्रियंका का नया मिशन” शुरू हो चुका है।

भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में रेहान वाड्रा को भविष्य के नेता के रूप में पेश करने की तैयारी चल रही है। पार्टी का तर्क है कि राहुल गांधी के बार-बार के राजनीतिक असफलताओं के बाद, गांधी परिवार का एक धड़ा अब वाड्रा परिवार की नई पीढ़ी को राजनीति के मुख्य मंच पर लाने की जमीन तैयार कर रहा है। भाजपा का कहना है कि कला प्रदर्शनी के विवाद को जानबूझकर तूल दिया जा रहा है ताकि रेहान वाड्रा को एक ‘पीड़ित’ के रूप में राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में लाया जा सके और उनकी राजनीतिक लॉन्चिंग आसान हो सके।

राहुल गांधी का मौन: रणनीति या अंदरूनी दरार?

इस पूरे विवाद में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली बात राहुल गांधी की चुप्पी है। जब प्रियंका गांधी, रॉबर्ट वाड्रा और पूरी कांग्रेस पार्टी रेहान वाड्रा के समर्थन में बयानबाजी कर रही है, तब राहुल गांधी की ओर से कोई आधिकारिक बयान या सोशल मीडिया पोस्ट नहीं आया है।

भाजपा ने इसी बिंदु को पकड़कर कांग्रेस के भीतर ‘प्रियंका बनाम राहुल’ की थ्योरी को हवा दी है। राजनीतिक गलियारों में और भाजपा के बयानों में यह सवाल जोर-शोर से उठाया जा रहा है:

  • क्या यह गांधी परिवार के अंदर वर्चस्व की लड़ाई है? भाजपा का मानना है कि राहुल गांधी अपनी स्थापित लीडरशिप के सामने किसी भी नए पारिवारिक चेहरे (जैसे रेहान वाड्रा) के उभार से असहज महसूस कर रहे हैं।
  • सहानुभूति की राजनीति का खेल: भाजपा का यह भी कहना है कि राहुल गांधी जानते हैं कि यदि रेहान को राष्ट्रीय स्तर पर सहानुभूति मिलती है, तो कांग्रेस के कार्यकर्ता विकल्प की तलाश में प्रियंका-रेहान खेमे की ओर झुक सकते हैं।
  • चुप्पी के मायने: अगर राहुल गांधी इस मुद्दे पर रेहान के साथ नहीं खड़े होते हैं, तो यह परिवार के भीतर मतभेद का संकेत देता है; और यदि वे खड़े होते हैं, तो वे अपने प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे नए चेहरे को खुद बढ़ावा देंगे।

प्रियंका बनाम राहुल: कांग्रेस में नेतृत्व की पुरानी बहस

कांग्रेस पार्टी के इतिहास में यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के समर्थकों के बीच खींचतान की खबरें सामने आई हों। यद्यपि दोनों भाई-बहन सार्वजनिक मंचों पर हमेशा एकजुटता का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन पार्टी के आंतरिक सांगठनिक फैसलों, टिकट बंटवारे और रणनीतियों में दोनों के अलग-अलग खेमों की मौजूदगी की चर्चा अक्सर होती रही है।

भाजपा का आरोप है कि सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस में दो शक्ति केंद्र बन चुके हैं—एक राहुल गांधी के इर्द-गिर्द और दूसरा प्रियंका-रॉबर्ट वाड्रा के इर्द-गिर्द। रेहान वाड्रा के मुद्दे पर प्रियंका गांधी का त्वरित और भावुक समर्थन तथा राहुल गांधी की दूरी, इस विभाजन को और अधिक स्पष्ट करती नजर आ रही है।

निष्कर्ष: क्या यह सिर्फ शुरुआत है?

बीकानेर हाउस की एक फोटो प्रदर्शनी से शुरू हुआ यह विवाद अब कला के दायरे से निकलकर पूरी तरह से राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुका है। एक तरफ कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक बताकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे गांधी परिवार के अंदरूनी पावर-गेम और रेहान वाड्रा के राजनीतिक पदार्पण का नाटक बता रही है।

राहुल गांधी की चुप्पी ने इस विवाद में भाजपा को एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देकर अंदरूनी कलह की अटकलों पर विराम लगाते हैं, या फिर यह ‘प्रियंका बनाम राहुल’ का मुद्दा कांग्रेस के लिए नई राजनीतिक सिरदर्दी बन जाएगा।

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  • Rahul Kaushik

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    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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