परिणीति चोपड़ा के 38वें जन्मदिन पर विशेष: कॉर्पोरेट डेस्क से बॉलीवुड के शिखर तक का शानदार सफर

भारतीय सिनेमा की प्रतिभावान अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा आज अपना 38वां जन्मदिन मना रही हैं। अपनी नैसर्गिक अदाकारी, बेबाक स्क्रीन प्रेजेंस और हर किरदार में ढल जाने की अद्भुत क्षमता के बल पर परिणीति ने बॉलीवुड में अपनी एक अलग और खास पहचान बनाई है। एक गैर-फिल्मी पृष्ठभूमि से आकर, मैनचेस्टर बिजनेस स्कूल से पढ़ाई पूरी कर और यशराज फिल्म्स के मार्केटिंग विभाग से अपने करियर की शुरुआत करके मुख्य अभिनेत्री की कतार में शामिल होना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है।

आइए, परिणीति चोपड़ा के जन्मदिन के इस खास मौके पर नजर डालते हैं उनके बहुआयामी अभिनय सफर, उनके यादगार किरदारों और सिनेमाई दुनिया में उनके अविस्मरणीय योगदान पर।

कॉर्पोरेट वर्ल्ड से बॉलीवुड का अप्रत्याशित सफर

परिणीति चोपड़ा का शुरुआती सपना फिल्मों में अभिनय करना नहीं था। अंबाला (हरियाणा) में पली-बढ़ी परिणीति एक मेधावी छात्रा थीं और उनका लक्ष्य इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में करियर बनाना था। उन्होंने यूके के प्रतिष्ठित मैनचेस्टर बिजनेस स्कूल से बिजनेस, फाइनेंस और इकोनॉमिक्स में ट्रिपल ऑनर्स की डिग्री हासिल की।

हालाँकि, वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान जब उन्हें भारत लौटना पड़ा, तो उन्होंने मुंबई में यशराज फिल्म्स (YRF) के मार्केटिंग और पब्लिक रिलेशन विभाग में बतौर कंसलटेंट काम करना शुरू किया। पीआर डेस्क पर काम करते हुए जब उनकी मुलाकात फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों से हुई, तो उनके भीतर छिपा अभिनय का हुनर धीरे-धीरे निखर कर सामने आने लगा। कास्टिंग डायरेक्टर शैनू शर्मा ने परिणीति के भीतर छिपी क्षमता को पहचाना और उन्हें ऑडिशन देने के लिए प्रेरित किया।

धमाकेदार शुरुआत: ‘लेडीज वर्सेस रिकी बहल’ और ‘इशकज़ादे’

वर्ष 2011 में फिल्म ‘लेडीज वर्सेस रिकी बहल’ (Ladies vs Ricky Bahl) से परिणीति ने एक सहायक अभिनेत्री के रूप में अपना डेब्यू किया। फिल्म में ‘डिंपल चड्ढा’ के किरदार में उनकी ऊर्जा, दिल्ली की टिपिकल बोली और बिंदास अंदाज़ ने सभी का ध्यान खींचा। इस पहली ही फिल्म के लिए उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ महिला डेब्यू’ का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला।

इसके तुरंत बाद, वर्ष 2012 में आई फिल्म ‘इशकज़ादे’ (Ishaqzaade) में उन्हें पहली बार मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाने का मौका मिला। ‘ज़ोया क़ुरैशी’ के दमदार और उग्र किरदार में परिणीति ने जिस गहराई और आक्रामकता के साथ अभिनय किया, उसने दर्शकों और समीक्षकों दोनों को आश्चर्यचकित कर दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (स्पेशल मेंशन)’ से सम्मानित किया गया। ‘इशकज़ादे’ ने यह साबित कर दिया कि परिणीति केवल हल्की-फुल्की कॉमेडी ही नहीं, बल्कि गहन और संजीदा अभिनय करने में भी पूरी तरह सक्षम हैं।

लीक से हटकर किरदारों का चुनाव: कॉमेडी और ड्रामा का संगम

अपने करियर के शुरुआती दौर में ही परिणीति ने पारंपरिक हीरोइन की परिभाषा को तोड़ते हुए ऐसे किरदारों का चुनाव किया, जो अपने आप में अनूठे और यथार्थवादी थे:

  • शुद्ध देसी रोमांस (2013): आधुनिक रिश्तों, लिव-इन रिलेशनशिप और प्रतिबद्धता के डर जैसे संवेदनशील विषय पर बनी इस फिल्म में परिणीति ने ‘गायत्री’ का बेबाक किरदार निभाया।
  • हंसी तो फंसी (2014): सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ आई इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म में उन्होंने ‘मीता सोलंकी’ नामक एक विलक्षण और सनकी वैज्ञानिक की भूमिका निभाई। उनकी इस परफॉरमेंस को आज भी उनके सबसे बेहतरीन और चुनौतीपूर्ण अभिनयों में से एक माना जाता है।
  • दावत-ए-इश्क (2014): सामाजिक मुद्दों को छूती इस फिल्म में उन्होंने हैदराबादी लड़की की भूमिका निभाकर अपनी भाषाई पकड़ और बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।

करियर की चुनौतियां और धमाकेदार वापसी

हर कलाकार के करियर में एक दौर ऐसा आता है जहाँ उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। कुछ व्यावसायिक असफलताओं और एक छोटे से ब्रेक के बाद परिणीति ने न केवल अपनी फिटनेस पर अभूतपूर्व काम किया, बल्कि अपने अभिनय की दिशा में भी बड़ा बदलाव लाया।

  • केसरी (2019): अक्षय कुमार के साथ इस ऐतिहासिक युद्ध-ड्रामा फिल्म में छोटी लेकिन बेहद प्रभावशाली भूमिका में उन्होंने दर्शकों के दिलों को छुआ।
  • द गर्ल ऑन द ट्रेन (2021): हॉलीवुड की मशहूर थ्रिलर फिल्म के हिंदी रीमेक में परिणीति ने एक एम्नेशिया से पीड़ित महिला ‘मीरा कपूर’ की जटिल, डार्क और भावनात्मक रूप से तनावपूर्ण भूमिका निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का एक नया पहलू पेश किया।
  • सपना (संदीप और पिंकी फरार – 2021): दिबाकर बनर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में ‘सपना’ के किरदार में परिणीति का अभिनय अत्यंत सूक्ष्म और प्रभावशाली रहा, जिसे आलोचकों द्वारा जमकर सराहा गया।
  • साइना (2021): भारत की महान बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल की बायोपिक के लिए परिणीति ने महीनों तक कड़ी एथलेटिक ट्रेनिंग ली और पर्दे पर साइना के जीवन के संघर्ष और विजय को जीवंत कर दिया।

‘अमर सिंह चमकीला’ और नए शिखर की प्राप्ति

वर्ष 2024 में आई इम्तियाज अली की म्यूजिकल-बायोपिक ‘अमर सिंह चमकीला’ परिणीति के करियर के सबसे सुनहरे पन्नों में से एक बन गई। पंजाब के प्रसिद्ध गायक अमर सिंह चमकीला की पत्नी और गायिका ‘अमरजोत कौर’ के किरदार में परिणीति ने जिस सादगी और गहराई के साथ काम किया, उसने सभी का दिल जीत लिया।

इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि परिणीति ने अपने सभी गाने खुद लाइव गाए। दिलजीत दोसांझ के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री और उनकी मधुर आवाज़ ने इस फिल्म को एक कालजयी रचना बना दिया। इस फिल्म ने यह साबित कर दिया कि परिणीति एक परिपक्व कलाकार के रूप में खुद को पूरी तरह से निखार चुकी हैं।

अभिनय से परे: गायन और सामाजिक पहचान

परिणीति केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित एक कुशल गायिका भी हैं। उन्होंने अपनी फिल्मों जैसे ‘मेरी प्यारी बिंदु’ का गाना “माना के हम यार नहीं” और ‘केसरी’ का गाना “तेरी मिट्टी” अपनी सुरीली आवाज में गाकर संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया है।

इसके अलावा, वह सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय मुखर होकर रखती हैं और बालिकाओं की शिक्षा व सशक्तिकरण जैसे अभियानों से सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं।

परिणीति चोपड़ा का सिनेमाई सफर इस बात का प्रमाण है कि लगन, ईमानदारी और निरंतर सीखने की चाहत से किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कभी भी खुद को किसी एक स्टीरियोटाइप या पारंपरिक सांचे में ढलने नहीं दिया। चाहे वो एक चुलबुली लड़की का किरदार हो, एक गहन भावनात्मक रोल हो, एथलीट की बायोपिक हो या फिर एक शास्त्रीय गायिका की भूमिका—परिणीति ने हर बार अपनी अदाकारी से दर्शकों को प्रभावित किया है।

अपने 38वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, परिणीति चोपड़ा भारतीय सिनेमा में और भी नए और चुनौतीपूर्ण आयाम स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सिनेमा प्रेमी और उनके प्रशंसक आने वाले वर्षों में उनकी और भी नई और मनोरंजक फिल्मों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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  • Rashika Sharma

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