शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार कोहराम, निवेशकों की बड़ी पूंजी डूबी

भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर से वैसा ही मंजर देखने को मिला, जिसका खौफ अक्सर निवेशकों के जेहन में बना रहता है। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार को बाजार की शुरुआत के साथ ही कोहराम मच गया। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक (Indices) बुरी तरह से लड़खड़ा गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) शुरुआती कारोबार में ही 700 अंकों से अधिक का गोता लगा गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी (Nifty) भी 200 से अधिक अंकों की भारी गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करता नजर आया। इस अचानक आए भूचाल और उठापटक के कारण निवेशकों की गाढ़ी कमाई पलक झपकते ही स्वाहा हो गई और बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

सेंसेक्स और निफ्टी में धड़ाम से गिरावट

गुरुवार को बाजार की शुरुआत ही बेहद कमजोर और निराशाजनक रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अपने पिछले कारोबारी सत्र के बंद 73,709 अंकों के मुकाबले काफी नीचे खुला। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि देखते ही देखते सेंसेक्स ने 73,343 का स्तर छुआ और महज कुछ ही मिनटों के भीतर यह 700 से अधिक अंकों का गोता लगाकर 73,005 के बेहद निचले स्तर तक लुढ़क गया।

ठीक इसी प्रकार, एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी इंडेक्स भी बाजार के इस मंदी भरे रुख से अछूता नहीं रहा। निफ्टी ने अपने पिछले क्लोजिंग स्तर 22,811 के मुकाबले कमजोर शुरुआत करते हुए 22,687 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की। लेकिन बाजार खुलते ही बिकवाली की आंधी ने इसे और नीचे धकेल दिया, जिसके बाद निफ्टी फिसलकर 22,557 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों में आई इस तीव्र गिरावट ने निवेशकों की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है।

ताश के पत्तों की तरह बिखरे दिग्गज स्टॉक

शेयर बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच कई दिग्गज और ब्लू-चिप कंपनियों के शेयर बुरी तरह पस्त नजर आए। बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों की स्थिति बेहद दयनीय रही, जहां अधिकतर शेयर लाल निशान में गोता लगाते दिखे। सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले और ताश के पत्तों की तरह बिखरने वाले प्रमुख शेयरों में पावर ग्रिड (Power Grid), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) और टाटा स्टील (Tata Steel) के नाम प्रमुखता से शामिल रहे।

विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो पावर ग्रिड के शेयरों में लगभग 2.60% की भारी कमजोरी दर्ज की गई, जबकि बीईएल का शेयर करीब 2.25% लुढ़क गया। ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी के शेयर भी लगभग 2% की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे। इसके अलावा, देश की सबसे मजबूत मानी जाने वाली कंपनियों में शुमार टाटा स्टील में भी करीब 1.99% की जोरदार बिकवाली देखने को मिली। बैंकिंग और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर से जुड़े दिग्गज शेयर जैसे एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में 1.80% और एशियाई पेंट्स (Asian Paints) में 1.70% की गिरावट ने बाजार की इस मंदी पर पक्की मुहर लगा दी। निवेशकों के पोर्टफोलियो इन प्रमुख शेयरों की कमजोरी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

पिछले दिन भी देखने को मिला था उतार-चढ़ाव

शेयर बाजार में यह कोई छिटपुट या अचानक आई अकेली घटना नहीं है, बल्कि इससे ठीक एक दिन पहले यानी बुधवार का कारोबारी सत्र भी निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा और हैरान करने वाला साबित हुआ था। बुधवार को बाजार की शुरुआत बेहद धमाकेदार और सकारात्मक अंदाज में हुई थी। शुरुआती घंटों में ऐसा प्रतीत हो रहा था कि बाजार नई ऊंचाइयों को छुएगा, क्योंकि बीएसई सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा उछल गया था और निफ्टी में भी करीब 200 अंकों की शानदार तेजी दर्ज की जा रही थी।

हालांकि, बाजार के ऊपरी स्तरों पर पहुंचने के बाद निवेशकों और बड़े संस्थागत खिलाड़ियों द्वारा जबरदस्त मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी गई। इस अचानक हुई बिकवाली ने तेजी की रफ्तार पर ऐसा ब्रेक लगाया कि देखते ही देखते सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर (Day’s High) से करीब 1400 अंक नीचे फिसल गया। हालांकि सत्र के अंत तक बाजार में थोड़ी बहुत रिकवरी जरूर आई, लेकिन कारोबार बंद होने पर 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 143 अंकों की गिरावट के साथ 73,709 पर बंद हुआ, और निफ्टी भी 77 अंक फिसलकर 22,811 के स्तर पर सिमट गया। बुधवार की इस उठापटक ने ही गुरुवार को बाजार के और अधिक क्रैश होने की जमीन तैयार कर दी थी।

बाजार में गिरावट के पीछे के संभावित कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में इस तरह की बिकवाली और उठापटक के पीछे कई मिले-जुले वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। दुनिया भर के बाजारों में सुस्ती, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और भू-राजनीतिक तनावों के चलते निवेशकों का जोखिम उठाने का माद्दा (Risk Appetite) कम हुआ है। इसके अलावा, महंगाई के आंकड़े, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल भी भारतीय बाजार पर नकारात्मक असर डाल रहा है। बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि जब बाजार अपने ऊपरी स्तरों के करीब पहुंचता है, तो निवेशक किसी भी प्रकार के जोखिम से बचने के लिए अपने शेयरों को बेचकर मुनाफा सुरक्षित करना पसंद करते हैं, जिससे अचानक दबाव बढ़ जाता है।

निवेशकों के लिए जरूरी सलाह

इस तरह के भारी उतार-चढ़ाव और क्रैश के माहौल में वित्तीय विशेषज्ञों और मार्केट एनालिस्ट्स की साफ सलाह है कि खुदरा निवेशकों को किसी भी तरह की पैनिक सेलिंग (Panic Selling) यानी डरकर अपने शेयर बेचने से बचना चाहिए। बाजार में गिरावट के समय धैर्य रखना बेहद जरूरी होता है। यदि आप किसी लंबी अवधि के निवेश (Long-term Investment) की योजना बना रहे हैं, तो क्वालिटी शेयरों में गिरावट के दौरान खरीदारी के मौके तलाशे जा सकते हैं। हालांकि, किसी भी प्रकार के नए निवेश या शेयरों की खरीद-फरोख्त से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) या मार्केट एक्सपर्ट्स की राय अवश्य लें, क्योंकि शेयर बाजार का यह सफर जोखिमों के अधीन होता है।

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  • Rahul Kaushik

    Senior Editor

    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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