पंजाब में लगातार पैर पसारते नशे के जाल और नशे के सौदागरों के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं की हत्या तथा संदिग्ध मौतों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की और आम आदमी पार्टी (AAP) नीत भगवंत मान सरकार पर कड़ा प्रहार किया।
गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब में नशे के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ सख्त कदम उठाने में विफल रही है। उन्होंने मांग की है कि पंजाब में हाल ही में मारे गए और संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाले नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं से जुड़े सभी प्रमुख मामलों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा जाना चाहिए ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके।
पीड़ित परिवारों से मिले गृह मंत्री, साझा किया दर्द
अपने पंजाब दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मानसा, संगरूर और बटाला (गुरदासपुर) के उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए अपने प्रियजनों को खो दिया है। इन पीड़ितों के परिजनों से बातचीत के दौरान शाह काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि इन परिवारों से मिलकर उन्हें जीवन में सबसे गहरा दुख महसूस हुआ है।
गृह मंत्री ने कहा कि किसी माँ ने अपना बेटा खोया है, तो किसी पत्नी ने अपना सुहाग। उन्होंने पंजाब की AAP सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य प्रशासन के पास इन दुखी परिवारों को देने के लिए बहाने के अलावा कोई जवाब नहीं है। शाह ने स्पष्ट किया कि उनके दौरे का उद्देश्य केवल पीड़ित परिवारों को सांत्वना देना और उन्हें न्याय की उम्मीद दिलाना है।
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड और अन्य मामलों का मुद्दा
पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा (Parvinder Singh Jhota) की मानसा में हुई निर्मम हत्या ने पूरे राज्य में आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी। गृह मंत्री शाह के दौरे से ठीक पहले पंजाब सरकार ने झोटा हत्याकांड की जांच CBI को सौंपने का निर्णय लिया।
अमित शाह ने पंजाब सरकार के इस फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि यह कार्रवाई बेहद देर से ली गई है और केवल एक मामले तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की कि वे संगरूर के गुलजार सिंह और बटाला के बिक्रमजीत सिंह की मौत से जुड़े मामलों की जांच भी CBI को सौंपें।
- संगरूर मामला: संगरूर के दूरबा गाँव के निवासी गुलजार सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली गई थी। परिजनों का आरोप है कि इलाके में नशे की बिक्री को लेकर सवाल उठाने के बाद उन्हें मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।
- बटाला मामला: बटाला/गुरदासपुर में भी नशे का विरोध करने वाले व्यक्ति की जान जाने के मामले में निष्पक्ष जांच की सख्त जरूरत बताई गई है।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि पंजाब पुलिस की जांच पर न तो जनता को भरोसा है और न ही पीड़ितों के परिजनों को। इसलिए, सभी मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
राजनीतिक संरक्षण पर उठाए सवाल: “बिना शह के संभव नहीं”
पंजाब सरकार द्वारा केंद्र सरकार और गुजरात-महाराष्ट्र के बंदरगाहों पर नशीले पदार्थों की जब्ती को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गुजरात और महाराष्ट्र के पोर्ट्स से अब तक 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के ड्रग्स जब्त किए जा चुके हैं।
शाह ने सवाल उठाया, “क्या केंद्रीय एजेंसियों को ड्रग्स जब्त नहीं करने चाहिए? हम तो नशे की बड़ी खेप देश के भीतर आने से रोक रहे हैं। असल सवाल यह है कि पंजाब के छोटे-छोटे गांवों और गलियों में छोटी-छोटी पुड़ियों (sachets) में नशा कैसे पहुँच रहा है? क्या यह बिना किसी स्थानीय राजनीतिक संरक्षण के संभव है? बिल्कुल नहीं।”
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि जब तक ड्रग माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहेगा, तब तक राज्य में नशे के कारोबार पर नकेल कसना मुश्किल होगा।
31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को ड्रग-मुक्त बनाने का संकल्प
नशे के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे अभियान का उल्लेख करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब समेत पूरे भारत को 31 दिसंबर 2029 तक पूरी तरह नशा-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने विश्वास दिलाया कि CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियां जब इन मामलों की पूरी जांच करेंगी, तो संलिप्त पाए जाने वाले अपराधियों और उनके संरक्षकों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों। शाह ने देश में धारा 370 के खात्मे और नक्सलवाद पर पाई गई विजय का उदाहरण देते हुए कहा कि मोदी सरकार जिस लक्ष्य को तय करती है, उसे हर हाल में पूरा करती है और नशे के रावण का भी इसी तरह अंत किया जाएगा।
जनता के लिए विशेष हेल्पलाइन जारी
गृह मंत्री ने पंजाब के नागरिकों से अपील की कि वे नशे के नेटवर्क को ध्वस्त करने में सहयोग करें। उन्होंने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एक टोल-फ्री हेल्पलाइन जारी की है। यदि आम जनता नशे के कारोबार या तस्करों के बारे में इस हेल्पलाइन पर सूचना देती है, तो उस पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि राज्य सरकार ऐसी सूचनाओं पर कार्रवाई नहीं करती है, तो केंद्रीय एजेंसियां स्वयं कदम उठाएंगी और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी।
राजनीतिक बयानबाजी और बहस
गृह मंत्री के इस सख्त रुख के बाद पंजाब में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। जहाँ आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है, वहीं विपक्षी दल बीजेपी, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस भी राज्य सरकार से नशीले पदार्थों के नेटवर्क और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर जवाब मांग रहे हैं।
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
| मुख्य मांग | सभी नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं की संदिग्ध मौतों की जांच CBI को हस्तांतरित की जाए। |
| सीबीआई कार्रवाई | परविंदर सिंह झोटा मामले में CBI ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। |
| निशाना | AAP नीत पंजाब सरकार पर नशे के सौदागरों को शह देने का आरोप। |
| लक्ष्य तिथि | 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को पूरी तरह ‘ड्रग-फ्री’ बनाने का संकल्प। |
गृह मंत्री अमित शाह के इस दौरे और मांगों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में पंजाब में नशे का मुद्दा और केंद्रीय एजेंसियों की जांच राज्य की राजनीति का मुख्य केंद्र बनी रहेगी।
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