मेरठ का चर्चित ‘सांप कांड’: जब अदालत ने सुनाया फांसी का फरमान तो फूट-फूटकर रो पड़ी हत्यारी पत्नी रविता

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसा सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत और रिश्तों की तमाम मर्यादाओं को तार-तार कर दिया। पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करते हुए एक पत्नी ने अपने ही सुहाग को मौत के घाट उतारने के लिए ऐसी खौफनाक साजिश रची, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। अदालत ने इस जघन्य कृत्य को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) श्रेणी का अपराध मानते हुए मुख्य आरोपी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा (फांसी) सुनाई है। जैसे ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट का यह फैसला दोनों तक पहुंचा, उन्हें अपने किए पर भयानक पछतावे के साथ-साथ फांसी के फंदे पर लटकने का खौफ सताने लगा और दोनों फूट-फूटकर रो पड़े।

क्या थी पूरी खौफनाक साजिश?

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के बहसूमा क्षेत्र का है, जहां 17 अप्रैल 2025 की रात को एक साजिश के तहत अमित कश्यप (रविता के पति) की हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष के अनुसार, रविता के अपने प्रेमी अमरदीप के साथ अवैध संबंध थे। अमित इन दोनों के बीच सबसे बड़ा कांटा बन रहा था, इसलिए रविता और अमरदीप ने उसे हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का खौफनाक प्लान बनाया।

साजिश के तहत पहले दोनों ने मिलकर अमित कश्यप की गला घोंटकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस हत्या को एक प्राकृतिक दुर्घटना या सर्पदंश (सांप के काटने से मौत) का रूप देने के लिए एक शातिर चाल चली गई। हत्या को अंजाम देने के बाद शव के पास एक सांप लाकर छोड़ दिया गया, ताकि परिवार और पुलिस को यह लगे कि अमित की मौत किसी जहरीले सांप के डसने से हुई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला राज

शुरुआत में इस घटना को एक सामान्य हादसा माना जा रहा था, लेकिन जब पुलिस ने गहराई से छानबीन शुरू की और शव का पोस्टमार्टम कराया गया, तो सारे काले राज से पर्दा उठ गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि अमित कश्यप की मौत सांप के काटने से नहीं, बल्कि गले घोंटे जाने (दम घुटने) के कारण हुई थी।

इसके अलावा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालने पर पुलिस के सामने एक और चौंकाने वाला सच आया। वारदात वाली रात रविता और उसके प्रेमी अमरदीप के बीच 50 से अधिक बार फोन पर बातचीत हुई थी। तकनीकी साक्ष्यों, गवाहों और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने इन दोनों की अय्याशी और जुर्म की कहानी का ऐसा जाल बुना, जिससे वे बच नहीं सके। अदालत में अभियोजन पक्ष ने मजबूती के साथ सबूत पेश किए, जिसके आधार पर 7 अक्टूबर को दोनों को दोषी करार दे दिया गया था।

अदालत की सख्त टिप्पणी और सजा का ऐलान

गुरुवार और शुक्रवार को इस मामले में सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच लंबी बहस चली। जिला शासकीय अधिवक्ता और पीड़ित पक्ष के वकीलों ने इसे समाज के लिए एक घातक संदेश देने वाला अपराध बताते हुए दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत से नरमी बरतने की गुहार लगाई।

एडीजे-12 की अदालत ने सुनवाई के दौरान भारतीय संस्कृति और पौराणिक संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि पत्नी को पति की अर्धांगिनी माना गया है। कोर्ट ने सत्यवान और सावित्री का उदाहरण देते हुए कहा कि एक पत्नी ने अपने पति के प्राण बचाने के लिए मृत्यु तक से संघर्ष किया था, जबकि इस मामले में एक पत्नी ने ही अपने सुहाग को मौत के मुंह में धकेल दिया। अदालत ने इस कृत्य को समाज के लिए बेहद खतरनाक और पतनशील मानते हुए रविता और अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई।

फैसले के बाद जेल में बदला माहौल, फूट-फूटकर रोए दोषी

जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रविता और अमरदीप को यह पता चला कि अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें इस बात का दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि कानून का फंदा उनके गले तक इतनी मजबूती से पहुंच जाएगा। सजा का यह कड़ा फैसला सुनते ही रविता जेल के भीतर फफक-फफक कर रोने लगी। बार-बार किए गए अपने गुनाह और भयानक भविष्य के खौफ ने दोनों को अंदर से तोड़कर रख दिया है। सुरक्षा कारणों और मानसिक तनाव को देखते हुए जेल प्रशासन द्वारा दोनों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) भी दिया जा रहा है।

दूसरी ओर, मृतक अमित कश्यप की बुजुर्ग मां मुनेश देवी और अन्य परिजनों ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है। मां का कहना है कि आज उनकी सूनी गोद और आंसुओं को कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से कुछ राहत मिली है, और एक मां को आखिरकार न्याय मिल गया है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग और आम नागरिकों ने भी इस कड़े फैसले का स्वागत किया है, ताकि इस तरह के घृणित अपराध करने वालों के मन में कानून का खौफ हमेशा बना रहे।

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  • Rahul Kaushik

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