प्रसिद्ध यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी को लेकर हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और कानूनी हलचलों के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर गरमाए माहौल के बीच संजय सिंह का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “एक चोर ने दूसरे चोर को बचाने का काम किया है।” उन्होंने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि देश में आवाज उठाने वाले पत्रकारों, विचारकों और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है।
‘विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास’
संजय सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि वर्तमान सरकार अपने खिलाफ उठने वाली हर निष्पक्ष और लोकतांत्रिक आवाज से डरी हुई है। उन्होंने कहा कि ध्रुव राठी जैसे स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर, जो तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर जनता के सामने अपनी बात रखते हैं, उन्हें बार-बार डराने-धमकाने और कानूनी पचड़ों में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। संजय सिंह के अनुसार, जब भी कोई व्यक्ति सरकार की नीतियों या उनकी विफलताओं उजागर करता है, तो उसके खिलाफ तुरंत किसी न किसी जांच एजेंसी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया जाता है।
संजय सिंह ने कहा, “यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। देश का संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। लेकिन आज स्थिति यह बन चुकी है कि यदि आप सरकार के सच को उजागर करेंगे, तो आप पर कार्रवाई होगी। और जो वास्तव में घोटाले और चोरी में शामिल हैं, उन्हें सुरक्षित रास्ता दे दिया जाता है। यह कुछ और नहीं बल्कि ‘एक चोर द्वारा दूसरे चोर को बचाने’ की राजनीति का जीता-जागता उदाहरण है।”
जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का लगाया आरोप
आम आदमी पार्टी के नेता ने प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन एजेंसियों का उपयोग देश के विकास या अपराध रोकने के लिए नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है।
संजय सिंह ने कहा कि जब कोई विपक्षी नेता या स्वतंत्र पत्रकार सरकार के खिलाफ सबूत पेश करता है, तो उस पर ध्यान देने के बजाय सबूत पेश करने वाले के खिलाफ ही जांच शुरू कर दी जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सत्ताधारी दल के पास एक ‘वाशिंग मशीन’ है, जिसमें शामिल होते ही सभी दाग धुल जाते हैं, जबकि जो लोग सच बोलने की हिम्मत दिखाते हैं, उन्हें जांच के दायरे में लाकर प्रताड़ित किया जाता है।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती निगरानी
संजय सिंह ने अपने संबोधन में डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया क्रिएटर्स के अधिकारों की वकालत भी की। उन्होंने कहा कि आज मुख्यधारा (मेनस्ट्रीम) मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सरकार के दबाव में काम कर रहा है, ऐसे में ध्रुव राठी जैसे स्वतंत्र क्रिएटर्स ही जनता तक निष्पक्ष और निष्पक्ष जानकारी पहुँचा रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्वतंत्र आवाजों को इसी तरह दबाया जाता रहा, तो देश में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा। संजय सिंह ने देश के युवाओं और आम नागरिकों से अपील की कि वे अभिव्यक्ति की आजादी पर हो रहे इन हमलों के खिलाफ एकजुट हों और अपनी आवाज बुलंद करें।
क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ा विवाद?
गौरतलब है कि ध्रुव राठी अपने यू-ट्यूब चैनल और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विस्तार से विश्लेषण करते रहे हैं। हाल के दिनों में उनके कुछ वीडियोज और बयानों को लेकर कानूनी शिकायतें और विवाद सामने आए थे। जहाँ एक तरफ सरकार समर्थक वर्ग उन पर पक्षपाती और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और उनका समर्थक वर्ग इसे ‘सत्ता द्वारा आवाज दबाने’ की कोशिश करार दे रहा है।
संजय सिंह के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से भी इस बयान पर पलटवार की संभावना जताई जा रही है। बीजेपी नेताओं का हमेशा से यह रुख रहा है कि कानून के समक्ष सभी समान हैं और यदि किसी व्यक्ति या एजेंसी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चल रही है, तो उसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
ध्रुव राठी के मुद्दे पर संजय सिंह का यह बयान देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मीडिया की निष्पक्षता और जांच एजेंसियों के इस्तेमाल पर जारी बहस को एक बार फिर से केंद्र में ले आया है। आगामी चुनावों और राजनीतिक माहौल को देखते हुए यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है।
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