ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर पसंदीदा फिल्में, वेब सीरीज़ या फिर लाइव क्रिकेट मैच देखते समय बीच में आने वाले अनचाहे विज्ञापन (Ads) किसी भी दर्शक का मज़ा किरकिरा कर देते हैं। प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लेने के बावजूद या फ्री कंटेंट देखते समय बार-बार 15 से 30 सेकंड के विज्ञापन आना यूज़र्स के धैर्य की परीक्षा लेता है। लेकिन हाल के दिनों में सोशल मीडिया और इंटरनेट फोरम्स पर एक नई ट्रिक तेज़ी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि JioStar (पूर्व में JioCinema और Disney+ Hotstar) प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग के दौरान विज्ञापनों को बिना पूरा देखे बायपास यानी ‘स्किप’ करने का एक अनूठा तरीका यूज़र्स ने खोज निकाला है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘टाइम बार’ या ‘सीक बार’ (Seek Bar) का देसी तोड़ बता रहे हैं और यह ट्रिक इंटरनेट पर काफी चर्चा में है।
क्या है वायरल ‘टाइम बार’ ट्रिक और कैसे काम करने का दावा किया जा रहा है?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और रेडिट पर कई यूज़र्स ने वीडियो और स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए यह दावा किया है कि यदि आप जियोस्टार ऐप या वेब ब्राउज़र पर कोई भी शो, फिल्म या मैच देख रहे हैं और अचानक कोई विज्ञापन शुरू हो जाता है, तो आपको पूरा विज्ञापन देखने की आवश्यकता नहीं है।
दावे के मुताबिक, जैसे ही 15 या 30 सेकंड का नॉन-स्किपेबल ऐड शुरू होता है, यूज़र को प्लेयर में नीचे दिख रही वीडियो टाइमलाइन यानी ‘सीक बार’ (Seek Bar / Time Bar) को अपने अंगूठे या माउस कर्सर से पकड़कर तेजी से आगे की ओर (Forward) खींच देना होता है। आम तौर पर विज्ञापनों के दौरान टाइम बार लॉक हो जाता है या उसे आगे बढ़ाने का विकल्प बंद रहता है। हालांकि, यूज़र्स का कहना है कि अगर टाइम बार के बिंदु को पकड़कर थोड़ा जोर देकर (अचानक और तेज़ी से) आगे की तरफ ड्रैग (Drag) किया जाए, तो प्लेयर सिस्टम में एक छोटा सा ग्लिच (Glitch) या बग उत्पन्न होता है। इसके परिणामस्वरूप विज्ञापन तुरंत बंद हो जाता है और मुख्य वीडियो वहीं से प्ले होने लगता है जहां से वह रुका था।
इस ट्रिक को लोग ‘हैक’ या ‘शॉर्टकट’ का नाम दे रहे हैं और बिना एड-फ्री प्लान खरीदे विज्ञापनों से मुक्ति पाने का आसान जरिया बता रहे हैं। कई टेक-लवर्स और युवाओं के बीच यह तरीका बहुत तेजी से शेयर किया जा रहा है।
यह ट्रिक वास्तव में काम करती है या सिर्फ एक टेक्निकल ग्लिच है?
तकनीकी विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी ओटीटी ऐप में इस तरह की घटना ऐप के वीडियो प्लेयर फ्रेमवर्क या उसके ऐड-सर्वर सिंक में मौजूद किसी अस्थाई बग (Technical Bug/Glitch) के कारण होती है। जब कोई यूज़र वीडियो प्लेयर के सीक बार को बार-बार या तेज़ी से मैन्युअल रूप से फॉरवर्ड करता है, तो प्लेयर का सॉफ्टवेयर ऐड-इंटरप्शन कमांड और यूजर के प्लेबैक कमांड के बीच तालमेल नहीं बिठा पाता। ऐसे में कुछ सेकेंड्स के लिए ऐड-प्लेयर क्रैश हो जाता है या ऐड को ‘कम्प्लीटेड’ मानकर मुख्य स्ट्रीम पर वापस लौट आता है।
हालांकि, यह समझना बेहद जरूरी है कि इस तरह के तरीके स्थायी समाधान नहीं होते हैं। ओटीटी कंपनियां और उनके सॉफ्टवेयर डेवलपर्स लगातार अपनी ऐप्स का प्रदर्शन और यूजर इंटरफेस (UI) अपडेट करते रहते हैं। जैसे ही डेवलपर्स के संज्ञान में इस तरह की कोई सिस्टम खामी या ग्लिच आती है, वे सुरक्षा और विज्ञापन राजस्व को ध्यान में रखते हुए एक नया अपडेट जारी कर इसे तुरंत फिक्स (Fix) यानी बंद कर देते हैं।
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए विज्ञापन क्यों हैं जरूरी?
डिजिटल स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री में विज्ञापन केवल कंपनियों की कमाई का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये यूज़र्स को कम कीमत या मुफ्त में कंटेंट उपलब्ध कराने का मुख्य आधार हैं।
- फ्री और एड-सपोर्टेड मॉडल: जियोस्टार जैसे बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म्स अपने करोड़ों दर्शकों को बहुत सा कंटेंट (जैसे फ्री मैच या कुछ टीवी शो) बिना किसी शुल्क के दिखाते हैं। इसका पूरा खर्च विज्ञापनों से मिलने वाले राजस्व से ही निकलता है।
- सस्ता सब्सक्रिप्शन: एड-सपोर्टेड (Ad-supported) प्लान्स की कीमत काफी कम रखी जाती है ताकि आम यूजर भी आसानी से फिल्में और सीरीज देख सकें।
- कंटेंट निर्माण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च: हाई-क्वालिटी कंटेंट तैयार करने, खेल स्पर्धाओं के डिजिटल राइट्स खरीदने और करोड़ों यूज़र्स को बिना लैग के लाइव स्ट्रीमिंग देने के लिए भारी सर्वर कॉस्ट आती है, जिसकी भरपाई विज्ञापनों के बिना संभव नहीं है।
यदि यूज़र्स एड-ब्लॉकर्स या इस तरह के शॉर्टकट्स का इस्तेमाल करके विज्ञापनों को बायपास करने लगेंगे, तो इससे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के एडवेर्टाइजिंग रेवेन्यू (Advertising Revenue) पर सीधा असर पड़ता है।
बिना किसी हैक के आधिकारिक रूप से एड-फ्री कंटेंट कैसे देखें?
यदि आप विज्ञापनों के बार-बार आने से परेशान हैं और बिना किसी तकनीकी परेशानी के निर्बाध रूप से अपनी पसंदीदा फिल्में और शो देखना चाहते हैं, तो इसके लिए आधिकारिक और सुरक्षित रास्ते अपनाना ही सबसे बेहतर विकल्प होता है:
- प्रीमियम नो-ऐड्स (No-Ads) प्लान चुनें: अधिकांश ओटीटी प्लेटफॉर्म्स अपने यूज़र्स को ‘प्रीमियम नो-ऐड्स’ सब्सक्रिप्शन ऑफर करते हैं। हालांकि लाइव स्पोर्ट्स (जैसे क्रिकेट मैच) में स्पॉन्सरशिप के कारण कुछ सीमित विज्ञापन आ सकते हैं, लेकिन ऑन-डिमांड फिल्मों और वेब सीरीज में आपको एक भी विज्ञापन देखने को नहीं मिलता।
- टेलीकॉम और ब्रॉडबैंड रीचार्ज बंडल्स: भारत में कई प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां अपने मंथली या इयरली रिचार्ज प्लान्स के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का प्रीमियम सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री या बेहद कम दामों में देती हैं। इनका फायदा उठाकर आप बिना अतिरिक्त खर्च के एड-फ्री अनुभव का आनंद ले सकते हैं।
- थर्ड-पार्टी अनधिकृत टूल्स से बचें: कई बार विज्ञापनों से बचने के चक्कर में लोग मॉडिफाइड (Modded) ऐप्स, अज्ञात एड-ब्लॉकर्स या थर्ड-पार्टी एक्सटेंशन डाउनलोड कर लेते हैं। ऐसा करना आपके स्मार्टफोन या कंप्यूटर की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे आपका पर्सनल डेटा लीक होने या डिवाइस में मैलवेयर आने का खतरा बना रहता है।
सोशल मीडिया पर ‘टाइम बार को जोर से खींचकर ऐड हटाने’ का दावा भले ही यूज़र्स को काफी आकर्षित कर रहा हो और कुछ यूज़र्स के लिए यह तरीका अस्थायी रूप से काम भी कर रहा हो, लेकिन यह कोई आधिकारिक फ़ीचर नहीं बल्कि ऐप की एक तकनीकी खामी है। आने वाले ऐप अपडेट्स में इस बग को ठीक कर दिए जाने की पूरी संभावना है। इसलिए, बिना किसी रुकावट और सुरक्षित तरीके से अपने पसंदीदा मनोरंजन का मज़ा लेने के लिए आधिकारिक सब्सक्रिप्शन प्लान और वैध माध्यमों का इस्तेमाल करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
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