CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े पर बवाल: दिल्ली से मुंबई तक क्यों सड़कों पर उतरे लोग

भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले तीन दिनों के भीतर अभूतपूर्व राजनीतिक और सामाजिक हलचल देखने को मिली है। स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (SIR), वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) में कथित गड़बड़ियों और फॉर्म-6 में अनधिकृत बदलावों जैसे गंभीर आरोपों को लेकर छात्र संगठनों, विपक्षी दलों और पूर्व नौकरशाहों ने सड़कों से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक मोर्चा खोल दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य पहलुओं, पिछले 72 घंटों में हुए प्रदर्शनों, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और फर्जी पत्रों को लेकर चुनाव आयोग के रुख की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है।

1. दिल्ली में जंतर-मंतर पर भारी हंगामा और झड़पें

दिल्ली में पिछले तीन दिनों से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन काफी उग्र रहे हैं।

  • छात्र संगठनों और विपक्षी मोर्चों का धावा: AISA, SFI, NSUI, आम आदमी पार्टी और इंडिया (INDIA) गठबंधन से जुड़े युवा एवं छात्र संगठनों ने संसद मार्ग और जंतर-मंतर की ओर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग एकतरफा फैसले लेकर वोटर लिस्ट से करोड़ों वैध नागरिकों के नाम काट रहा है।
  • पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की: विरोध की तीखी लहर को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग की। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं।
  • हजारों हिरासत में: शुक्रवार से शुरू हुए इस आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 1,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। शनिवार को भी प्रदर्शन जारी रहने पर करीब 150 अन्य लोगों को पुलिस गाड़ियों में भरकर ले जाया गया। इसके बावजूद संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद से नहीं हटते, आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

2. मुंबई में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और सामाजिक संगठनों का आंदोलन

दिल्ली की तर्ज पर मुंबई में भी विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बिंदु शिवाजी पार्क और आजाद मैदान बने।

  • शिवाजी पार्क में गांधीवादी विरोध: मुंबई में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और अन्य नागरिक अधिकारों के संगठनों के बैनर तले सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनकर पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया।
  • 10 अक्टूबर तक अल्टीमेटम: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि यदि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर से मुंबई के साथ-साथ दिल्ली में एक विशाल राष्ट्रीय आंदोलन शुरू किया जाएगा।
  • स्थानीय पुलिस की पाबंदियां: मुंबई पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए कुछ स्थानों पर बिना अनुमति के प्रदर्शन करने से रोका और कई आयोजकों को नोटिस जारी किए।

3. पूर्व नौकरशाहों द्वारा ‘महाभियोग नोटिस’ और 6 प्रमुख आरोप

सड़क पर जारी प्रदर्शनों के बीच सिविल सोसाइटी और पूर्व अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। पूर्व आईएएस/आईपीएस अधिकारियों और एक्टिविस्टों के एक समूह ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ “महाभियोग (Impeachment) का ड्राफ्ट/चार्जशीट” जारी किया, जिसमें मुख्य रूप से 6 बिंदु शामिल हैं:

  1. आयोग के सामूहिक कामकाज को दरकिनार करना: अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को अनसुना कर एकतरफा फैसले लेना।
  2. फॉर्म-6 में अनधिकृत बदलाव: नए मतदाताओं के पंजीकरण फॉर्म में बिना वैधानिक प्रक्रिया के संशोधन करना।
  3. ECINET का अवैध उपयोग: बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के डेटा तंत्र का दुरुपयोग करना।
  4. SIR के नाम पर बड़े पैमाने पर मताधिकार छीनना: बिहार, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में लाखों पात्र नागरिकों को वोटर लिस्ट से बाहर करना।
  5. राजनीतिक निष्पक्षता पर सवाल: सार्वजनिक बयानों में निष्पक्षता का अभाव।
  6. वैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन: चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाना।

4. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और सुनवाई

मामला देश की सबसे बड़ी अदालत तक भी पहुंच गया है।

  • चीफ जस्टिस की पीठ में सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त के एकतरफा निर्णयों और कार्यशैली पर सवाल उठाए गए।
  • अदालत का रुख: सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि यदि चुनाव आयोग में वैधानिक प्रक्रियाओं और कानूनों का पालन नहीं किया गया है, तो अदालत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करना जानती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।

5. फर्जी इस्तीफे का लेटर वायरल और चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच सोशल मीडिया पर ज्ञानेश कुमार के नाम से एक त्यागपत्र (Resignation Letter) तेजी से वायरल हो गया। इसमें लिखा था कि उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

  • चुनाव आयोग का बयान: विवाद बढ़ता देख भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के प्रवक्ता ने तुरंत आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया।
  • AI जनरेटेड और फर्जी पत्र: आयोग ने स्पष्ट किया कि वायरल हो रहा त्यागपत्र पूरी तरह से फर्जी, मनगढ़ंत और एआई (Artificial Intelligence) जनरेटेड है।
  • आयोग की सफाई: चुनाव आयोग ने कहा कि SIR और अन्य निर्णय आयोग में तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं और आंतरिक वैचारिक मतभेदों को टकराव नहीं माना जाना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में पिछले तीन दिनों से बना राजनीतिक तापमान कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां विपक्षी दल और छात्र संगठन 10 अक्टूबर से आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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  • Rahul Kaushik

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