‘हाथों में तलवारें, दुकानों में लूटपाट’… LPU की 3 छात्राओं के वायरल वीडियो का सच आया सामने, पुलिस जांच में हुआ बड़ा खुलासा

पंजाब की मशहूर लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह किसी शैक्षणिक उपलब्धि की नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैले कुछ वीडियो हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रहे इन दावों और वीडियो ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि पूरे पंजाब के पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा दिया था। वायरल पोस्ट्स में दावा किया जा रहा था कि यूनिवर्सिटी कैंपस और उसके आसपास के इलाके में कुछ छात्राएं हाथों में नंगी तलवारें लेकर घूम रही हैं, दुकानों में लूटपाट कर रही हैं और भारी हुड़दंग मचाया जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—विशेषकर इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सएप ग्रुप्स में इस खबर के फैलते ही अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। कुछ ही घंटों के भीतर इन पोस्ट्स पर हजारों की संख्या में व्यूज, शेयर्स और कमेंट्स आने लगे। हालांकि, पंजाब पुलिस द्वारा इस पूरे मामले की गहनता से की गई शुरुआती जांच के बाद जो सच्चाई निकलकर सामने आई है, उसने इस पूरे सस्पेंस और सनसनी का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने साफ शब्दों में कहा है कि वायरल दावे पूरी तरह से फर्जी, भ्रामक और जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।

वायरल वीडियो का पूरा सच और पुलिस की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जालंधर और फगवाड़ा पुलिस की टीमों ने तुरंत हरकत में आते हुए वायरल वीडियो की तकनीकी और जमीनी जांच शुरू की। पुलिस की साइबर सेल और स्थानीय सुरक्षा दस्तों ने यूनिवर्सिटी कैंपस, हॉस्टल्स और आसपास के बाजार (जैसे लॉ गेट एरिया) के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगाला।

जांच अधिकारियों के अनुसार, जिन वीडियो को लूटपाट और हिंसक झड़प के नाम पर फैलाया जा रहा है, वे दरअसल हाल ही में कैंपस में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम और छात्र नाटक (Street Play/Skit) के अभ्यास का हिस्सा थे। नाटक में अभिनय कर रही छात्राओं के हाथों में दिख रही तलवारें असली हथियार न होकर केवल ‘ड्रामा प्रॉप्स’ (नाटक में इस्तेमाल होने वाली नकली वस्तुएं) थीं।

स्थानीय दुकानों में लूटपाट के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए फगवाड़ा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि लॉ गेट और आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों में लूटपाट या तोड़फोड़ की कोई घटना दर्ज नहीं की गई है। दुकानदारों ने भी इस प्रकार की किसी भी अप्रिय घटना से साफ इनकार किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि दो गुटों के बीच किसी मामूली मौखिक बहस या रिहर्सल के दृश्य को कुछ उपद्रवी और असामाजिक तत्वों ने तोड़-मरोड़कर, सनसनीखेज कैप्शन और भ्रामक दावों के साथ इंटरनेट पर अपलोड कर दिया।

यूनिवर्सिटी प्रशासन का रुख

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मीडिया और पीआर विभाग ने भी इस पूरे प्रकरण पर आधिकारिक बयान जारी कर अफवाहों पर विराम लगाया है। यूनिवर्सिटी प्रवक्ता के अनुसार, कैंपस का माहौल पूरी तरह से शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सामान्य है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक बयान में कहा, “सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से पुराने और असंबद्ध वीडियो क्लिप्स का उपयोग करके गलत खबरें फैलाई जा रही हैं। हॉस्टल, कैंपस और आसपास की दुकानें पूरी तरह सुरक्षित हैं। छात्र-छात्राएं अपनी नियमित कक्षाओं और गतिविधियों में बिना किसी भय के भाग ले रहे हैं। हमारी सुरक्षा टीम चौबीसों घंटे पूरी सतर्कता के साथ तैनात है।”

इसके साथ ही, यूनिवर्सिटी ने अपने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी बिना पुष्टि वाली या भ्रामक खबर पर भरोसा न करें और न ही ऐसी पोस्ट्स को आगे शेयर करें।

साइबर सेल की पैनी नजर: अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

पंजाब पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। पुलिस उन सोशल मीडिया अकाउंट्स और पेजों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने सबसे पहले इन झूठे वीडियो और फर्जी कैप्शन को वायरल करना शुरू किया था।

पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा, “सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके सार्वजनिक शांति भंग करने, किसी प्रतिष्ठित संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने या आम जनता में दहशत पैदा करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। जो भी फर्जी खबरें या भड़काऊ वीडियो शेयर करेगा, उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66D के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

पुलिस ने आम जनता से भी यह आग्रह किया है कि अगर किसी के पास ऐसे भ्रामक मैसेज या वीडियो आते हैं, तो वे उन्हें आगे भेजने के बजाय तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पोर्टल पर रिपोर्ट करें।

डिजिटल युग में फर्जी खबरों (Fake News) का खतरा

यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे बिना किसी जांच-परख के सोशल मीडिया पर फैलाया गया कोई भी अधूरा वीडियो समाज में खौफ और भ्रम का माहौल पैदा कर सकता है। अक्सर देखा गया है कि कुछ व्यूज, लाइक्स और फॉलोअर्स पाने की होड़ में कंटेंट क्रिएटर्स और मीम पेजेस संवेदनशील मुद्दों को बिना पुष्टि के साझा कर देते हैं।

जब भी किसी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान या शहर से संबंधित कोई सनसनीखेज खबर सामने आए, तो उपयोगकर्ताओं को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:

  1. खबर की पुष्टि करें: जब तक किसी पुलिस अधिकारी, मुख्यधारा के प्रमाणित समाचार पत्र या आधिकारिक हैंडल से खबर की पुष्टि न हो, तब तक उस पर विश्वास न करें।
  2. फॉरवर्ड करने से बचें: किसी भी संदिग्ध वीडियो या संदेश को व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम पर शेयर न करें।
  3. साइबर सेल को सूचित करें: यदि आपको लगता है कि कोई वीडियो माहौल बिगाड़ने के इरादे से फैलाया जा रहा है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

LPU मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने न केवल स्थिति को संभाला, बल्कि इस फर्जी सनसनी का पर्दाफाश करके छात्रों और उनके चिंतित परिजनों को बड़ी राहत दी है। फिलहाल कैंपस में पूरी तरह से शांति बनी हुई है और पैनिक फैलाने वाले मुख्य आरोपियों की तलाश जारी है।

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  • Rahul Kaushik

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    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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