उत्तराखंड के चमोली में भारी बर्फबारी: सफेद चादर में लिपटा पवित्र श्री हेमकुंड साहिब

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते राज्य के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों और घाटी वाले क्षेत्रों में प्राकृतिक सुंदरता चरम पर पहुंच गई है। सीमांत जिले चमोली में कुदरत का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जहां सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब और प्रसिद्ध लोकपाल लक्ष्मण मंदिर परिसर पूरी तरह से बर्फ की मोटी सफेद चादर से ढक गए हैं। इस ताजा हिमपात के बाद पूरे जिले में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है, वहीं निचले इलाकों में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने मैदानी क्षेत्रों में भी ठिठुरन बढ़ा दी है।

श्री हेमकुंड साहिब में बर्फ की मोटी परत

समुद्र तल से लगभग 15,225 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री हेमकुंड साहिब में बीते कुछ दिनों से लगातार रुक-रुक कर हिमपात हो रहा है। धाम परिसर, मुख्य गुरुद्वारा साहिब, पवित्र सरोवर और आसपास की ऊंची चोटियां पूरी तरह से बर्फ से आच्छादित हो चुकी हैं। तस्वीरों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुद्वारा परिसर के आसपास कई इंच तक बर्फ की परत जम चुकी है।

अत्यधिक ठंड और बर्फबारी के कारण पूरा धाम एक अलौकिक और विहंगम दृश्य प्रस्तुत कर रहा है। पवित्र सरोवर का पानी भी जमने की कगार पर पहुंच गया है। वर्तमान में हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद हैं, जिसके चलते वहां सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन प्राकृतिक छटा अपने चरम पर है। धाम की सुरक्षा और रखरखाव में तैनात कुछ सुरक्षाकर्मियों व गुरुद्वारा ट्रस्ट के कर्मचारियों के अलावा वहां कोई मौजूद नहीं है।

नीती और माणा घाटी का तापमान शून्य से नीचे

केवल श्री हेमकुंड साहिब ही नहीं, बल्कि चमोली जिले के अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्र भी बर्फबारी से सराबोर हैं। भारत-चीन सीमा पर स्थित अंतिम गांव माणा, प्रसिद्ध स्कीइंग गंतव्य औली, बद्रीनाथ धाम, फूलों की घाटी (Valley of Flowers), और नीती घाटी के ऊपरी क्षेत्रों में भी बर्फबारी का दौर जारी है।

बर्फबारी के कारण इन इलाकों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। नीती और माणा घाटी में पारा शून्य से कई डिग्री नीचे चला गया है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत, झरने और छोटी नदियां जमने लगी हैं। स्थानीय निवासियों को पीने के पानी और दैनिक कार्यों के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए लोग अलाव और पारंपरिक गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं।

सफेद चादर में लिपटा पवित्र श्री हेमकुंड साहिब

निचले इलाकों में बारिश से बढ़ी ठिठुरन

पहाड़ों की चोटियों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर निचले इलाकों पर पड़ रहा है। जोशीमठ, गोपेश्वर, पीपलकोटी, कर्णप्रयाग और चमोली के अन्य मैदानी व घाटी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। बारिश और शीतलहर के मिश्रण ने पूरे क्षेत्र को भीषण ठंड की चपेट में ले लिया है। मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण आने वाले दिनों में तापमान में और अधिक गिरावट आने की संभावना है।

मौसम में आए इस अचानक बदलाव से जनजीवन प्रभावित हुआ है। बाजारों में आमतौर पर चहल-पहल कम देखी जा रही है और लोग शाम ढलते ही अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं।

पर्यटन व्यवसायियों के चेहरे खिले

एक तरफ जहां बर्फबारी और बारिश से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों की दिनचर्या कठिन हो गई है, वहीं दूसरी तरफ पर्यटन और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) कारोबार से जुड़े लोगों के चेहरे खिल उठे हैं।

प्रसिद्ध स्कीइंग रिसॉर्ट औली में बर्फबारी की खबर मिलते ही पर्यटकों का रुख उत्तराखंड की ओर बढ़ने लगा है। एडवेंचर स्पोर्ट्स और बर्फबारी का आनंद लेने के शौकीन पर्यटक बड़ी संख्या में जोशीमठ और औली का रुख कर रहे हैं। स्थानीय होटल स्वामियों, गाइडों और टैक्सी चालकों को उम्मीद है कि इस हिमपात से शीतकालीन पर्यटन सत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन सतर्क

लगातार हो रही बर्फबारी और बारिश की चेतावनी को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) पूरी तरह सतर्क मोड़ पर हैं। उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में आवाजाही करने वाले रास्तों पर बर्फ जमने से फिसलन बढ़ गई है, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है।

जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों से भी अपील की है कि वे मौसम का मिजाज देखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। संवेदनशील और अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त, लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को मुख्य सड़कों पर जमी बर्फ को हटाने के लिए जेसीबी और स्नो-कटर मशीनों के साथ तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जोशीमठ-बद्रीनाथ राजमार्ग और अन्य संपर्क मार्ग बाधित न हों।

किसानों और बागवानों के लिए संजीवनी

मौसम का यह मिजाज उत्तराखंड के किसानों और फल उत्पादकों के लिए राहत की खबर लेकर आया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर हुई यह बर्फबारी और बारिश सेब, आडू, प्लम और खुबानी जैसी नकदी फसलों के लिए संजीवनी का काम करेगी।

बर्फबारी से मिट्टी में नमी बनी रहती है, जो सेब के बागानों में ‘चिलिंग आवर्स’ (Chilling Hours) को पूरा करने के लिए बेहद आवश्यक होती है। यदि आने वाले दिनों में भी इसी तरह का मौसम बना रहता है, तो आगामी सीजन में सेब की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, रबी फसलों (जैसे गेहूं और जौ) के लिए भी यह बारिश काफी लाभदायक सिद्ध होगी।

आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में 3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर आने वाले 24 से 48 घंटों के दौरान और अधिक हिमपात होने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम से तेज बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है।

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  • Rahul Kaushik

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