नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 24 सितंबर 2026 को आयोजित अपनी बोर्ड बैठक में देश के शेयर बाजार और पूंजी बाजार के ढांचे में क्रांतिकारी सुधारों को मंजूरी दी है। सेबी ने ‘पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशंस 2026’ लागू करते हुए पुराने 2020 के नियमों में व्यापक बदलाव किया है। इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत अब पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के जरिए निवेश करने वाले हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और खुदरा निवेशकों के लिए प्राइमरी मार्केट (IPO), विदेशी शेयर बाजारों, अनलिस्टेड डेट पेपर्स, REITs और म्युचुअल फंड्स में निवेश के दरवाजे पूरी तरह से खोल दिए गए हैं।
सेबी के इस फैसले से न केवल निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को विविधता (Diversification) देने का सुनहरा मौका मिलेगा, बल्कि पोर्टफोलियो मैनेजर्स को भी ज्यादा लचीलेपन के साथ रणनीतियां बनाने की आजादी मिलेगी।
नियमपुस्तिका को 53% छोटा कर सेबी ने दिया सुगमता का संदेश
सेबी ने नियामक अनुपालन (Compliance Burden) को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है। पुराने विनियमों में मौजूद जटिलताओं को हटाते हुए नियमपुस्तिका (Rulebook) के आकार को 70 पन्नों से घटाकर सीधे 33 पन्नों पर ला दिया गया है—यानी कुल 53% की कटौती की गई है। इसके साथ ही शब्दों और अनावश्यक शर्तों को हटाकर नियमों को सरल बनाया गया है। छोटी PMS कंपनियों के लिए डीलिंग रूम और कड़े परिचालन नियमों में भी छूट प्रदान की गई है।
अब IPO और प्राइमरी डेट मार्केट में भी PMS का सीधा प्रवेश
पुराने नियमों के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स को प्राइमरी मार्केट और नए पब्लिक इश्यूज में सीमित अधिकार थे। नए ‘SEBI Regulations 2026’ के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स को अब कंपनियों के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) और डेट मार्केट के प्राइमरी इश्यूज़ (Primary Debt Issuances) में सीधे ग्राहक के पैसे लगाने की इजाजत मिल गई है।
इससे PMS निवेशक लिस्टिंग गैन (Listing Gains) और नई उभरती कंपनियों के शुरुआती चरण के विकास का सीधा लाभ उठा सकेंगे।
विदेशी बाजारों में निवेश: ग्लोबल पोर्टफोलियो बनाने का अवसर
भारतीय निवेशकों की लंबे समय से मांग थी कि उनके पोर्टफोलियो को ग्लोबल एसेट क्लास में लगाने का सुलभ जरिया मिले। सेबी ने इस मांग पर मुहर लगाते हुए PMS मैनेजर्स को विदेशी प्रतिभूतियों (Foreign Securities) में निवेश करने का अधिकार दिया है:
- विदेशी एक्सचेंजों पर लिस्टेड इक्विटी शेयर्स और कॉर्पोरेट बॉन्ड्स।
- ओवरसीज म्यूचुअल फंड्स, ग्लोबल ETFs और इंडेक्स फंड्स।
- अंतरराष्ट्रीय REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) और विदेशी सरकारी प्रतिभूतियां (Foreign Government Debt)।
यह निवेश फेमा (FEMA) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के दिशानिर्देशों के तहत संचालित होगा।
₹25 लाख का नया म्यूच्यूअल फंड PMS रूट (PRIM)
सेबी ने मध्यम-वर्गीय और नए HNI निवेशकों को आकर्षित करने के लिए PRIM (Portfolio Managers Route for Investing in Mutual Fund Units) नाम से एक नया और अलग रूट शुरू किया है।
- न्यूनतम टिकट साइज: ₹25 लाख (सामान्य PMS के ₹50 लाख सीमा की तुलना में काफी कम)।
- निवेश दायरा: पोर्टफोलियो मैनेजर्स ग्राहकों का पैसा म्यूच्यूअल फंड्स की डायरेक्ट स्कीम्स, ETFs, इंडेक्स फंड्स और SIFs (Specialised Investment Funds) में अलॉट कर सकेंगे।
- लागत नियंत्रण: फिक्स्ड मैनेजमेंट फीस को ग्राहक के कुल AUM के 1% पर सीमित (Cap) किया गया है, जबकि परफॉर्मेंस-बेस्ड फीस का विकल्प भी रहेगा।
अनलिस्टेड डेट और डेरिवेटिव्स में जोखिम-नियंत्रित ढील
- अनलिस्टेड कॉर्पोरेट डेट (Unlisted Debt): डिस्क्रेप्शनरी PMS अब ग्राहक की लिखित सहमति के बाद उनके AUM का 10% तक हिस्सा इन्वेस्टमेंट ग्रेड (Investment-Grade) नॉन-कन्वर्टिबल अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में निवेश कर सकते हैं।
- डेरिवेटिव्स फ्लेक्सिबिलिटी (Derivatives Trading): एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स (F&O) में हेजिंग और पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग के लिए पोर्टफोलियो मैनेजर्स को ग्राहक के AUM का 1.25 गुना (1.25x) तक एक्सपोजर लेने की ढील दी गई है।
REITs, InvITs और विदेशी पूंजी के दरवाजे
पूंजी बाजार में लिक्विडिटी और रियल एस्टेट व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए सेबी ने REITs (Real Estate Investment Trusts) और InvITs (Infrastructure Investment Trusts) को विदेशी बाजारों से डिपॉजिटरी रिसिप्ट्स (Depository Receipts) के जरिए पूंजी जुटाने की अनुमति भी दी है। इससे ये फंड्स अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से बड़ी पूंजी जुटा सकेंगे।
मुख्य बदलावों का तुलनात्मक विवरण
| सुविधा / नियम | पुराना ढांचा (2020 Rules) | नया ढांचा (SEBI PMS Rules 2026) |
| नियमपुस्तिका का आकार | 70 पन्ने | 33 पन्ने (53% की कटौती) |
| IPO व प्राइमरी इश्यू | सीमित और अप्रत्यक्ष | सीधा प्रवेश और भागीदारी की अनुमति |
| विदेशी प्रतिभूतियां | सीमित रास्ते | विदेशी इक्विटी, बॉन्ड्स, ETFs और REITs में सीधा निवेश |
| म्यूच्यूअल फंड PMS (PRIM) | लागू नहीं | ₹25 लाख के न्यूनतम टिकट साइज के साथ अलग रूट |
| अनलिस्टेड डेट सीमा | कड़े प्रतिबंध | 10% तक AUM की अनुमति (सहमति अनिवार्य) |
| डेरिवेटिव्स एक्सपोजर | 1.0x AUM सीमा | 1.25x AUM तक लचीलापन |
निवेशकों पर क्या होगा इसका असर?
सेबी के ये व्यापक सुधार भारतीय शेयर बाजार को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी और परिपक्व बनाएंगे। अब निवेशकों का पैसा केवल घरेलू इक्विटी शेयरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बॉन्ड्स, विदेशी परिसंपत्तियों, IPOs और डायरेक्ट फंड्स में बंटा (Diversified) रहेगा। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव (Volatility) के दौरान निवेशकों के जोखिम को कम करने और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न हासिल करने में मदद मिलेगी।
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