गुजरात के अहमदाबाद स्थित निरमा यूनिवर्सिटी (Nirma University) के एक कार्यक्रम में बॉलीवुड का मशहूर डायलॉग प्रोफेसर पर भारी पड़ गया और माहौल अचानक गरमा गया। स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान दर्शक दीर्घा से एक छात्र द्वारा “ए जल्दी कर, पनवेल निकलना है” की टिप्पणी सुनते ही प्रोफेसर आपा खो बैठे। इसके बाद प्रोफेसर ने छात्र को मंच पर बुलाकर उसका कॉलर पकड़ लिया और उसे कड़े शब्दों में चेतावनी दे डाली। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
गुजरात की निरमा यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय टेक-फेस्ट ‘टेक्नोफोरा 2026’ के दौरान यह घटना घटी। कार्यक्रम में प्रसिद्ध स्टैंड-अप कॉमेडियन रजत सूद का शो चल रहा था। इस दौरान जब प्रोफेसर मंच पर संबोधन दे रहे थे या संवाद कर रहे थे, तभी दर्शक दीर्घा में बैठे एक छात्र ने लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्म ‘गोलमाल 3’ का चर्चित डायलॉग दोहराते हुए चिल्लाया— “जल्दी बोल, कल सुबह पनवेल निकलना है”।
छात्र की इस टिप्पणी से मंच पर मौजूद विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर भड़क गए। उन्होंने तुरंत छात्र को मंच पर आने का निर्देश दिया। जैसे ही छात्र मंच पर पहुंचा, गुस्से से लाल प्रोफेसर ने उसका कॉलर पकड़ लिया और पूरे हॉल के सामने उसे सख्त लहजे में हिदायत दी।
वायरल वीडियो में प्रोफेसर छात्र को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कह रहे हैं कि वह परिसर में अनुशासनहीनता और शिक्षकों का अनादर बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रोफेसर को यह कहते हुए सुना जा सकता है: “मैं किसी भी हद तक जा सकता हूं। जिस दिन तुमने निरमा यूनिवर्सिटी के किसी भी फैकल्टी मेंबर का अपमान करने की हिम्मत की, समझो तुम्हारा करियर खत्म।”
घटना के वक्त वहां मौजूद कई छात्रों ने मोबाइल कैमरे में यह पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड कर लिया, जो अब इंटरनेट पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद छात्र राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस के छात्र संगठन ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (NSUI) ने प्रोफेसर के व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है। NSUI ने मांग की है कि प्रोफेसर छात्र से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें और विश्वविद्यालय प्रशासन इस घटना की निष्पक्ष जांच कराए। छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर वे कैंपस में बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
वहीं, इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी दो फाड़ देखने को मिल रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि छात्र को किसी शिक्षक या कार्यक्रम के बीच इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। वहीं दूसरी तरफ, एक बड़े तबके का तर्क है कि प्रोफेसर जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह से छात्र का कॉलर पकड़ने या उसे सार्वजनिक रूप से डराने-धमकाने के बजाय प्रशासनिक तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए थी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक जांच प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
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