भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) रोजमर्रा की जिंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। सब्जी की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, डिजिटल पेमेंट ने नकद लेनदेन की जगह ले ली है। ऐसे में UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी पेमेंट चार्ज से जुड़ी खबरों ने आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक में संशय पैदा कर दिया था।
15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले प्रस्तावित बदलावों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के एमडी और सीईओ दिलीप असबे ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। मुंबई में आयोजित 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में बोलते हुए उन्होंने UPI चार्जेज पर ‘A to Z’ जानकारी साझा की।
1. क्या आम जनता (Consumers) को देना होगा UPI चार्ज?
दिलीप असबे ने साफ शब्दों में कहा कि आम ग्राहकों के लिए UPI पूरी तरह फ्री रहेगा।
- Person-to-Person (P2P) ट्रांसफर: जब आप अपने किसी दोस्त, रिश्तेदार या अन्य व्यक्ति को पैसे भेजते हैं, तो उस पर शून्य (0%) चार्ज लगेगा, चाहे राशि कितनी भी हो।
- मर्चेंट पेमेंट्स (P2M): दुकानदारों को किया जाने वाला भुगतान भी ग्राहकों के लिए निशुल्क है। यह MDR चार्ज मर्चेंट यानी व्यापारी के पक्ष का शुल्क है, जिसे सीधे ग्राहक पर नहीं थोपा जा सकता।
2. चार्ज का असली जोखिम कितना है? (10% का गणित)
NPCI सीईओ के अनुसार, MDR लागू होने के बाद ग्राहकों पर चार्ज पास ऑन होने (यानी दुकानदार द्वारा ग्राहक से अतिरिक्त पैसे वसूलने) का जोखिम कुल वैल्यू का मात्र 10% है।
UPI कुल मर्चेंट ट्रांजेक्शन वैल्यू (लगभग ₹6-7 लाख करोड़)
├── 75% मूल्य: ₹2,000 से कम के ट्रांजेक्शन ──> शून्य प्रभाव (No MDR)
└── 25% मूल्य: ₹2,000 से अधिक के ट्रांजेक्शन (MDR के दायरे में)
├── 80% संग्रह: ₹1,000 करोड़+ टर्नओवर वाले बड़े कॉर्पोरेट्स (जो पहले से क्रेडिट कार्ड MDR देते हैं)
├── 10% संग्रह: ₹1 करोड़+ टर्नओवर वाले मध्यम व्यापारी
└── 10% जोखिम: गैर-क्रेडिट कार्ड स्वीकार करने वाले छोटे/मध्यम व्यापारी (यहाँ चार्ज पास ऑन का जोखिम)
3. नियम और दरें: किन ट्रांजेक्शनों पर लागू होगा MDR?
15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले MDR फ्रेमवर्क की मुख्य शर्तें:
| श्रेणी | सीमा/शर्त | लागू MDR दर |
| P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) | कोई सीमा नहीं | 0% (पूर्णतः मुफ़्त) |
| छोटा मर्चेंट पेमेंट | ₹2,000 प्रति ट्रांजेक्शन तक | 0% (पूर्णतः मुफ़्त) |
| बड़ा मर्चेंट पेमेंट | ₹2,000 से अधिक प्रति ट्रांजेक्शन | 0.4% (अधिकतम कैप ₹300) |
| ऑटो-पे / रिकरिंग बिल | बिजली, OTT, SIP, FASTag | छूट प्राप्त (Exempted) |
| छोटे व्यक्तिगत मर्चेंट | ₹1 लाख/माह तक खाते में प्राप्ति | 0% MDR |
उदाहरण: यदि आप किसी बड़े स्टोर पर ₹10,000 का सामान UPI से खरीदते हैं, तो व्यापारी पर 0.4% के हिसाब से ₹40 का MDR लगेगा। क्रेडिट कार्ड का शुल्क 1.5% से 2.5% होता है, जिसकी तुलना में UPI MDR काफी कम है।
4. 75% व्यापारियों पर शून्य असर
दिलीप असबे ने बताया कि बाजार में लगभग 6 करोड़ यूनिक मर्चेंट हैं। इनमें से 75% QR कोड मर्चेंट्स ने आज तक ₹2,000 से अधिक का एक भी ट्रांजेक्शन प्राप्त नहीं किया है। इसलिए चाय की दुकान, किराना स्टोर और छोटे दुकानदारों पर इस नीति का कोई असर नहीं पड़ेगा।
कुल UPI मर्चेंट वॉल्यूम का 96% हिस्सा पूरी तरह से शून्य MDR फ्रेमवर्क के तहत सुरक्षित रहेगा।
5. नए चार्जेज की आवश्यकता क्यों पड़ी?
पिछले छह वर्षों से UPI पर शून्य MDR नीति लागू थी। NPCI प्रमुख ने बताया कि शुल्क का एक छोटा हिस्सा एकत्र करना क्यों आवश्यक है:
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश: बैंकों और फिनटेक कंपनियों को नेटवर्क की मजबूती, सर्वर क्षमता और डेटा सुरक्षा बनाए रखने के लिए सालाना ₹21,000 करोड़ से अधिक का खर्च आता है।
- इनोवेशन और AI इंटीग्रेशन: वॉइस-बेस्ड पेमेंट्स (Voice Payments), AI-पावर्ड सपोर्ट, और साउंडबॉक्स (Soundbox) इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए नए निवेश की आवश्यकता है।
- पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता: बिना किसी रेवेन्यू मॉडल के बैंकों और एग्रीगेटर्स के लिए लंबे समय तक बुनियादी ढांचे में निवेश करना कठिन हो रहा था।
NPCI की ओर से जारी यह विस्तृत स्पष्टीकरण दिखाता है कि आम नागरिकों और छोटे विक्रेताओं के लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली पहले की तरह ही सुलभ और मुफ़्त बनी रहेगी। MDR का मुख्य बोझ उन बड़े व्यापारिक संस्थानों पर पड़ेगा जो पहले से ही डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की लागत उठाते आ रहे हैं।
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