जनसमाज संवाददाता, बिजनौर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से कानून-व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद सनसनीखेज घटना सामने आई है। जिले के एक गांव में बिजली चोरी रोकने और बकाएदारों की चेकिंग करने पहुंचे बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) और उनकी टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बात केवल बहस तक सीमित नहीं रही, बल्कि उग्र हुए ग्रामीणों ने जेई को जबरन बंधक बना लिया। इसके बाद उन्हें एक चारपाई पर बैठाकर बेदर्दी से पीटा गया और अभद्रता की गई। इस पूरी घटना का किसी ने वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आते ही पुलिस प्रशासन और बिजली महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना बिजनौर जिले के एक ग्रामीण इलाके की है। जानकारी के अनुसार, बिजली विभाग को काफी समय से इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कटिया डालकर बिजली चोरी किए जाने और उपभोक्ताओं द्वारा लंबे समय से बिल जमा न करने की शिकायतें मिल रही थीं। इसी सिलिसले में बिजली विभाग की एक विशेष टीम, जिसका नेतृत्व क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर (जेई) कर रहे थे, गांव में औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) के लिए पहुंची थी।
टीम ने जैसे ही गांव में दाखिल होकर बिजली के तारों की जांच शुरू की और अवैध कनेक्शन काटने की कार्रवाई अंजाम देनी चाही, वैसे ही स्थानीय लोग लामबंद होने लगे। शुरुआत में ग्रामीणों और बिजली विभाग के कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जेई ने विभागीय नियमों का हवाला देते हुए कार्रवाई जारी रखने की कोशिश की, जिससे ग्रामीण और ज्यादा भड़क गए।
देखते ही देखते दर्जनों ग्रामीणों की भीड़ ने चेकिंग टीम को घेर लिया। कर्मचारियों ने मौके की नजाकत को समझते हुए पीछे हटने का प्रयास किया, लेकिन उग्र भीड़ ने जूनियर इंजीनियर को पकड़ लिया और उन्हें गांव के बीचों-बीच स्थित एक परिसर में ले गए।
चारपाई पर बैठाकर मारपीट, वीडियो वायरल
ग्रामीणों ने जेई को भागने से रोकने के लिए एक चारपाई पर जबरन बैठा दिया और उन्हें बंधक बना लिया। इसके बाद कुछ उपद्रवियों ने उनके साथ हाथापाई की, गाली-गलौज की और थप्पड़ व थप्पड़ों से मारपीट शुरू कर दी। जेई लगातार खुद को छोड़ने और बात से मामला सुलझाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन आक्रोशित भीड़ के सिर पर खून सवार था।
इस पूरी वारदात के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इंटरनेट पर अपलोड होते ही यह वीडियो जंगल की आग की तरह फैल गया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी को चारपाई पर बैठाकर डराया-धमकाया जा रहा है और उनके साथ मारपीट की जा रही है। वीडियो में बिजली चोरी के साक्ष्य छिपाने और विभागीय टीम पर दबाव बनाने की कोशिश भी साफ उजागर हो रही है।
बिजली महकमे में आक्रोश, कामकाज ठप करने की चेतावनी
सरकारी अधिकारी के साथ सरेआम हुई इस बर्बरता और अभद्रता से बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। घटना की सूचना मिलते ही विभाग के उच्च अधिकारी और अन्य मंडलों के जेई व लाइनमैन एकजुट हो गए। बिजली कर्मचारी संघ ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है और दोषियों के खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि सरकारी ड्यूटी निभा रहे अधिकारियों पर इस तरह के जानलेवा हमले होंगे और उन्हें बंधक बनाया जाएगा, तो कोई भी कर्मचारी निर्भीक होकर काम नहीं कर पाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया, तो पूरा बिजली विभाग हड़ताल पर जाने और जिले की बिजली आपूर्ति ठप करने के लिए बाध्य होगा।
पुलिस की कार्रवाई और प्राथमिकी (FIR) दर्ज
वीडियो वायरल होने और बिजली विभाग के आला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन हरकत में आया। घटना की जानकारी मिलते ही भारी पुलिस बल गांव में तैनात किया गया ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। पीड़ित जूनियर इंजीनियर की तहरीर पर पुलिस ने घटना में शामिल नामजद और कई अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
दर्ज प्राथमिकी में सरकारी काम में बाधा डालने (IPC की धारा 353/relevant BNS sections), लोक सेवक पर हमला करने, अवैध रूप से बंधक बनाने (Wrongful Confinement), मारपीट और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर उपद्रवियों और हमलावरों की पहचान की जा रही है। वीडियो फुटेज में जो लोग जेई को पीटते और उकसाते हुए दिखाई दे रहे हैं, उन्हें चिन्हित कर संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
बिजली चोरी और सरकारी तंत्र पर सवाल
उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है, जिससे राज्य सरकार और पावर कॉर्पोरेशन को हर साल अरबों रुपये का राजस्व नुकसान (AT&C Losses) उठाना पड़ता है। सरकार लगातार विजिलेंस टीम और विभागीय चेकिंग के जरिए बिजली चोरी रोकने के प्रयास कर रही है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में अक्सर चेकिंग टीमों को स्थानीय लोगों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ता है।
बिजनौर की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि अवैध रूप से बिजली का उपयोग करने वाले भू-माफिया और दबंग किस तरह कानून को अपने हाथ में लेने से भी नहीं हिचकते। इस घटना ने न केवल विभागीय कर्मचारियों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी चेकिंग अभियानों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी कितनी अनिवार्य है।
फिलहाल, गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और एहतियातन पुलिस बल तैनात है। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और दोषियों को कानून के शिकंजे में लाकर बिजली कर्मचारियों में सुरक्षा का अहसास कैसे बहाल करता है।
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